बुधवार, अगस्त 14, 2013

एक विचित्र आजादी


एक विचित्र आजादी

* जहा जीत के सबसे बड़े ''योद्धा'' का गुमनाम बना दिया गया ,
* सम्पूर्ण स्वर्णिम इतिहास ''वामपंथियो'' की मदद से पलटा गया ,आर्थिक मदद अंग्रेजो के लूटे हुए धन से ली गयी ,
* जिन्ना को जबरदस्ती ''पाकिस्तान'' दिया गया , जबकि 5-6 % मुस्लिम समुदाय इस बटवारे के पक्षधर थे !
* उन अंग्रेजो की ''अंग्रेज़ी'' थाम ली जिसने हमको 200 साल लुटा , जिन अंग्रेजो ने नालन्दा जलाया , हमारे ज्ञान भंडार को अपने नाम से प्रकाशित किया ,
* अंग्रेजो की कूटनीति के तहत, मुस्लिम हिन्दू विरोधी दंगे मात्र सत्ता के लिये जबरदस्ती करवाये गये , आज जनता दुसमन अंग्रेज़ को नही पाकिस्तान को मानते है ,,

****************
अब इस गुलामी दिवस की पूर्व संध्या के रूप में मनाऊ ,या 35 लाख हिन्दू सिक्खों के बलिदान दिवस के रूप में मनाऊ ?

1947 में आजादी के नाम पर शुरु हुए दंगे आज तक जारी है , कभी असम कभी किस्तवाडा ,

न्याय , समाधन किसी को नही मिला , ना ही आगे भी दिख रहा है ,
डर है ,हिन्दू मुस्लिम के नाम पर मिली इस आजादी में, जल्दी ही कही कही पूरा देश ही ना जल जाये !

उधर ,व्यापारी चीन भी नये सौदे , संभावना की तलाश में सीमा पर खड़ा है ,
बस इन यहूदियो , अंग्रेजो और रोम के जाल (इल्लुमिनाती) पर जनता की नजर ही नही है ??

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें