बुधवार, दिसंबर 27, 2017

पचास के दशक में इजराइल ने घोषणा कर दी की हमारा देश कोई धर्मशाला नहीं है जो मुसलमान सीना ठोककर यहाँ रह रहे हैं ...


Umakant Misra
पचास के दशक में इजराइल ने घोषणा कर दी की हमारा देश कोई धर्मशाला नहीं है जो मुसलमान सीना ठोककर यहाँ रह रहे हैं ...
3 मई1950 की रात में बारह हज़ार से ज्यादा मुसलमानों को इजराइली सरकार ने पिछवाड़े पे लात मारकर इजराइल की सीमा से बाहर कर दिया,हालाँकि उसके इस कदम की पूरी दुनिया में आलोचना हुई .....
संयुक्त राष्ट्र संघ ने इजराइल को धमकाया ..
अरब देशों ने धमकी दी की एक बूंद तेल नहीं देंगे ...
उधर सोवियत संघ ने इजराइल को इसका अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहने को कहा .....
इजराइल के ऊपर हुवे इन चौतरफा हमलों का असर ये हुआ की इस घटना के महज 4 महीने बाद यानी सितम्बर में इजराइल ने फिर से 6 हज़ार मुसलमानों को लतियाते हुवे इजराइल से बाहर निकाल दिया....और उनकी जमीने यहूदियों को बाँट दी ....और साफ़ साफ़ शब्दों में धमकी दी जो उखाड़ना है उखाड़ लो ..हम तो अईसे ही मारेंगे ...........
सत्तर के दशक तक इजराइल में मुसलमानों की हालत भीगी बिल्ली वाली हो के रह गयी थी ...
इजराइली सरकार ने मुसलमानों को साफ़ शब्दों में समझा दिया था की रहना है तो कायदे से रहो नहीं तो इजराइल की सीमा तुम्हारे लिए खुली है .......
इस घटना को आज 66 साल बीतने जा रहे हैं ....और आज तक इजराइल में किसी मुसलमान की हिम्मत नहीं हुई की वो बगावत का झंडा बुलंद कर सके ........
इजराइल ने मुस्लिम तुष्टिकरण का स्थाई समाधान निकाल लिया और समस्या हमेशा के लिए खत्म हो गयी
लेकिन भारत में क्या समस्या है ??
क्यों तुले हैं हम मुसलमानों का पिछवाडा चाटने पे ??.
कुछ समय पहले बंगाल में हिन्दुवों के घर जला दिए गये ..
उन्हें सडक पर घसीट घसीट के मारा गया .....
उनकी औरतों के साथ बुरा सुलूक किया गया ....
कुल 9 घंटे तक हिंसा लूटपाट का नंगा नाच हुवा ..
और सरकार मीडिया और देश का बुद्धिजीवी वर्ग कान में तेल डाल कर सो गया .......
किसी चैनल ने इस घटना की चर्चा करना भी जरुरी नहीं समझा .
क्यों की इससे देश की धर्मनिरपेक्षता खतरे में पड़ जाती .
लेकिन एक सेक्युलर हिन्दू सोचता है की मुझे क्या दिक्कत है ?
मै तो मजे में हूँ ...
मुझे क्या समस्या है . अबे दंगा तो बंगाल में हुवा है ..मै यहाँ बनारस में हूँ . बंगाल तो यहाँ से साढ़े छ सौ किलो मीटर दूर है ... मेरे बनारस के मुस्लमान तो साक्षात देव दूत हैं ...वो तो सावन के मेले में कावरियों को पानी पिलाते हैं दिवाली में पटाके भी जलाते हैं .. और नवरात्रों में तो मेरे यहाँ डांडिया भी खेलते हैं ......तो मुझे परेशान होने की क्या जरुरत ???..मै तो हिन्दू मुस्लिम भाई भाई का झंडा बुलंद करूँगा ..मै तो दंगल देखूंगा ....रईस देखूंगा ......मैं टाइगर भी देखूंगा..... मै तुम जैसे दक्षिणपंथी साम्प्रदायिक हिंदुत्व का हिस्सा नहीं हूँ .....मेरा हिंदुत्व मुझे भाईचारे मानवता का सन्देश देता हैं ..सारे मुस्लमान एक जैसे नहीं होते ..जरुर बंगाल में हिन्दुवों ने ही कोई गलती की होगी ......वरना मुसलमान भाई तो शांतिदूत माने जाते हैं ......मै पूछता हूँ की अगर वाकई हिन्दू बंगाल में मारा गया होता तो क्या सभी चैनल ये खबर नहीं दिखा रहे होते ??केवल जी न्यूज़ ही क्यों ये मुद्दा उठा रहा था??? जबसे बीजेपी सरकार आई है तबसे दंगे हो रहे हैं “..............
.....ये हर उस सेक्युलर सोच रखने वाले हिन्दू समाज की सोच है जिसे अकारण ही मुसलमानों से हमदर्दी है .......
लेकिन मै और मेरे जैसे राष्ट्रवादी सोच रखने वाले किसी भी व्यक्ति को भारत के मुसलमानों से कोई हमदर्दी नहीं है ..हमे कोई दुःख नहीं होता जब देश के किसी भी हिस्से में एक भी मुस्लमान किसी हिंसा में मारा जाता है ........जिन्हें भारत माता की जय बोलने में आपत्ति हो ..जिन्हें बन्दे मातरम गाने तकलीफ होती हो ...सूर्य नमस्कार करने में जिनकी अम्मी मरने लगती हों ..ऐसे लोगों से एक हिन्दू राष्ट्रवादी युवा कोई सहानभूति नहीं रखता ........
बंगाल की घटना का प्रतिक्रिया दी जानी चाहिए ..बिलकुल उसी तरह जैसे इजराइल ने एक ही दिन में 12 हज़ार मुसलमानों को लात मारकर देश से निकाल दिया था.......वो दिन दूर नहीं जब देश का हिन्दू समाज मुसलमानों के साथ वही सुलूक करेगा जो आज अमेरिका ..इजराइल और बाकी यूरोपीय देश मुसलमानों के साथ कर रहे हैं ......
हिंदुवो को असहिष्णु कहने वालों को समझना पड़ेगा की ये देश धर्मनिरपेक्ष तब तक ही है जब तक हिन्दू समाज इसे धर्मनिरपेक्ष बनाए रखता है .....जिस दिन हिन्दू समाज वाकई असहिष्णु हो गया भारत में मुसलमानों को रहने के लिए किसी दुसरे मुल्क की तलाश करनी पड़ जायेगी ........

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