बुधवार, मई 09, 2012

सुप्रीम कोर्ट ने हज-सब्सिडी को गैर-इस्लामिक बताते हुए समाप्त करने के निर्देश दिऐ


सुप्रीम कोर्ट ने हज-सब्सिडी को गैर-इस्लामिक बताते हुए समाप्त करने के निर्देश दिऐ
कुरआन के अनुसार सच्चे मुसलमान के लिए हज यात्रा केवल अपनी कमाई से प्राप्त धन से ही हलाल मानी जाती है.
पाकिस्तान ने भी हज सब्सिडी गैर इस्लामिक मानकर उसे उसे बंद कर दिया
किसी भी मुस्लिम देश में हज यात्रियों के लिए सरकारी सब्सिडी नहीं है
मुल्लो ने मुफ्त की सब्सिडी पर अब तक कोई फतवा क्यों नहीं दिया
यह शरियत की हिदायतों के खिलाफ है फिर भी कर रहे हो
तो फिर वन्देमातरम गाने में क्या हर्ज है
अयोध्या में मंदिर निर्माण में क्या परेशानी है

आज माननीय सुप्रीम कोर्ट ने हज-सब्सिडी को गैर-इस्लामिक बताते हुए समाप्त करने का केंद्र -सरकार को निर्देश दिया है. परन्तु तथाकथित सेकुलर जमात के कुछ पहरेदार और कुछ राजनैतिक-पार्टियां हज-सब्सिडी खत्म करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से गहरे-सन्निपात में हैं. कैसी विडम्बना है कि वंदे मातरम गाने में आपत्ति है क्योंकि वो इस्लाम विरुद्ध है पर इस्लाम विरुद्ध तरीके से हज पर जाने में आपत्ति नहीं है? क्या शर्मनाक नहीं है ये दोहरापन ?मैं पूछना चाहता हूँ कि बात- बात पर फतवे जारी करने वाले इतने सालों से मुफ्त की सब्सिडी पर क्यों कोई फतवा नहीं निकाल पाए? मेरा कहना है कि अमरनाथ और मानसरोवर यात्रा पर तो सरकार कोई भी सब्सिडी नहीं देती फिर भी प्रति वर्ष लाखों गरीब-भक्त इन दोनों स्थानों पर दर्शन करने जाते हैं| ऐसे में जो राजनैतिक-पार्टियां सुप्रीम कोर्ट द्वारा हज-सब्सिडी खत्म किये जाने का विरोध कर रही हैं दर-असल उन्हें हज से कोई लेना देना नहीं है बल्कि वो सिर्फ मुस्लिम-वोट हथियाने की राजनीति के चलते इस मुद्दे को हवा में उछाल रहे हैं.
कुरआन-ए-पाक में स्पष्ट उल्लेख है कि सच्चे मुसलमान के लिए हज यात्रा केवल अपनी कमाई में से या फिर निकट सम्बन्धी से प्राप्त धन राशि से ही हलाल मानी जाती है. इसीलिए किसी भी मुस्लिम देश में हज यात्रियों के लिए सरकारी सब्सिडी का प्रावधान नहीं है ,क्योंकि यह शरियत की हिदायतों के खिलाफ है.
जब सब्सिडी लेकर हज यात्रा की जा रही है इसका मतलब मुसलमान शरियत की हिदायतों का पालन नहीं कर रहा है और तो देशहित में बहुत बातों में सहयोग क्यों नहीं करते तो फिर वन्देमातरम गाने में क्या हर्ज है
अयोध्या में मंदिर निर्माण में क्या परेशानी है
भारत सरकार प्रतिवर्ष 600 करोड़ रुपये से ज्यादा हज सब्सिडी पर खर्च करती है जिसका फायदा लगभग 1.25 लाख हाजी हर वर्ष उठाते हैं। पिछले पांच वर्षो में भारत ने हज यात्रा पर करीब 2,891.71 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की है। गत-वर्ष भारत सरकार ने हज यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को एयर इंडिया की हवाई यात्रा में 38,800 रुपये प्रति श्रद्धालु की सब्सिडी दी थी। वैसे भी इस्लाम तो हज पे अपने धन से जाने की बात करता है, इसीलिए पाकिस्तान में न्यायालय ने सरकार को आदेश दिया था कि हज सब्सिडी गैर इस्लामिक है और पाकिस्तान ने उसे बंद कर दिया | दुनिया का कोई भी देश वर्तमान समय में हज-सब्सिडी नहीं देता है. इसलिए भारत में हज-सब्सिडी समाप्त करने का माननीय सुप्रीम कोर्ट का निर्णय निश्चित तौर पर स्वागत-योग्य है परन्तु यदि हज-सब्सिडी गैर-इस्लामिक है तो 10 वर्ष बाद सरकार को हज-सब्सिडी खत्म करने के निर्देश का कोई औचित्य समझ में नहीं आता . तत्काल हज-सब्सिडी समाप्त की जानी चाहिए.

जस्टिस आफताब आलम और रंजना प्रकाश देसाई की बेंच ने मंगलवार को यह आदेश जारी किया। बेंच ने हज यात्रा पर जाने वाले प्रधानमंत्री के शिष्टमंडल में प्रतिनिधियों की संख्या 30 से घटा कर दो करने के भी निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि वह हज कमेटी के कामकाज और हज यात्रियों की चयन प्रक्रिया की भी जांच करेगा। सुनवाई के दौरान केंद्र ने हज यात्रियों को सब्सिडी देने की नीति का बचाव किया।
उसने हलफनामा पेश कर कहा कि 'लोगों को जीवन में एक बार सब्सिडी देने के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं। इसके तहत उन आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी जिन्होंने कभी हज नहीं किया।'

क्या था मामला : सुप्रीम कोर्ट बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की अपील पर सुनवाई कर रहा था। दरअसल हर साल 11 हजार हज यात्री वीआईपी कोटा के तहत जाते हैं। हाईकोर्ट ने इनमें से 800 यात्रियों को प्राइवेट ऑपरेटर के जरिए भेजने के निर्देश दिए थे। इसके लिए विदेश मंत्रालय को निर्देशित किया गया था। केंद्र सरकार ने इस फैसले को ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

कब दी गई कितनी सब्सिडी

वर्ष आवेदन आए हज पर गए सब्सिडी

2009 3,57,388 1,20,131 690 करोड़ रु.

2010 3,00,680 1,26,191 600 करोड़ रु. 2011 3,02,616 1,25,051 605 करोड़ रु.

खेल हवाई टिकट का : भारत से हर साल हज कमेटी की ओर से सवा लाख लोग हज करने जाते हैं। इन्हें हज सब्सिडी मिलती है। करीब 50 हजार लोग निजी ऑपरेटर के जरिये हज को जाते हैं। इन्हें सब्सिडी नहीं मिलती। लेकिन दोनों के खर्च में कोई खास फर्क नहीं होता। दोनों ही में हज यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति 95 हजार से लेकर 1.5 लाख रुपये तक खर्च आता है। क्योंकि हज कमेटी सिर्फ एयर इंडिया की चार्टर्ड फ्लाइट बुक करती है। फ्लाइट काफी महंगी पड़ती है, जबकि निजी एयरलाइन से जाना सस्ता पड़ता है

1 टिप्पणी:

  1. सरकार जल्द से जल्द अपना निर्णय लेवे ...ताकि शरियत का झुठा हवाला देनेवालो के मुहँ मे गोबर पडे..भ्हैस का ..क्षोकी गाय का तो इन्हे नही चलेगा....😠😠

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