शुक्रवार, अगस्त 30, 2019

आसमानी किताब की विकृत आयतों के कारण दुनिया के दो संपन्न देश इराक और सीरिया पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं.

खतरा कितना बड़ा है और स्थिति कितनी दुरूह है, इसकी आपको कल्पना नहीं है. अमेरिका के प्रशिक्षित लड़ाकू अपने पूरे संसाधनों के साथ बरसों से अफगानिस्तान में डटे हुए हैं. उसके बाद भी तालिबान को पूरी तरह समाप्त नहीं कर पाए हैं. आसमानी किताब की विकृत आयतों के कारण दुनिया के दो संपन्न देश इराक और सीरिया पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं. अल्लाह हू अकबर के नाम पर 21वीं सदी में लाखों लोग काल के गाल में समा गए हैं. दुनिया की 700 करोड़ की आबादी में 100 करोड़ हिंदु हजारों साल के कंठकाकीर्ण मार्ग को पार करते हुए अपने वैदिक धर्म और संस्कृति को बचाकर अस्तित्व में रह पाए हैं.
अच्छी तरह समझ लीजिए कि आज हिंदुओं का मुकाबला जहां एक ओर साम-दाम-दंड-भेद से आधी दुनिया को ईसाई बनाने में सफल रहे ईसा मसीह के पुजारियों से है, वहीं दूसरी ओर भूखे रहकर, जख्मी रहकर, परिवार छोड़कर, जीवन की सारी सुविधाएं छोड़कर, मानवता और दयालुता छोड़कर, आखरी सांस तक मजहब के नाम पर रक्त पात करने वाले अमानवीय हिंसक और जंगली लोगों से है. स्थिति की भयानकता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जब परिवार का बालक शरीर पर बम बांधकर चिथड़े चिथड़े हो जाता है तो परिवार में जश्न मनाया जाता है, कि बेटा मजहब के लिए जेहाद करते हुए अल्लाह ताला के पास जन्नत में चला गया है. आपका मुकाबला उन लोगों से हैं.
दूसरी और मुकाबला उन कायार लालची और गुलाम प्रवृत्ति के जयचंदों से भी है जिन्होंने धर्म के शत्रुओं की गोद में बैठ कर हमेशा हिंदुत्व को नुकसान पहुंचाया है. स्थिति की गंभीरता को समझिए और सावधान हो जाइए. आपकी पीढ़ी में आपकी जिम्मेदारी है कि जिस धर्म को शिवाजी और महाराणा प्रताप ने अपना रक्त देकर बचाया है आज उसकी अपेक्षाएं आपसे हैं. आपको तय करना है कि आप आने वाली पीढ़ियों को क्या देकर जाना चाहते हैं . एक सड़े हुए हिंसक मजहब में शामिल होने की मजबूरी या स्वतंत्रता के साथ अपने अति पुरातन और आधुनिक वैदिक सनातन धर्म के पालन करने की स्वतंत्रता.

सोमवार, अगस्त 12, 2019

तसलीमा नसरीन: ईद

तसलीमा नसरीन: ईद
ईद की सुबह स्‍नानघर में घर के सभी लोगो ने बारी-बारी से कोस्‍को साबुन लगा‍कर ठण्डे पानी से गुस्‍ल किया। मुझे नए कपड़े -जूते पहनाए गए, लाल रिबन से बाल से बाल संवारे गए, मेरे बदन पर इत्र लगाकर कान में इत्र का फाहा ठूंस दिया गया। घर के लड़कों ने कुर्ता-पाजामा पहनकर सिर पर टोपी लगाई । उनके कानों में भी इत्र के फाहे थे । पूरा घर इत्र से महकने लगा।
घर पुरूषों के साथ मैं भी ईद के मैदान की ओर चल पड़ी । ओह कितना विशाल मैदान था। घास पर बिस्‍तर के बड़े-बड़े चादर बिछाकर पिताजी ,बड़े भैया , छोटे भैया और बड़े मामा के अलावा मेरे सभी मामा वहां नमाज पढ़ने के लिए खड़े हो गए। पूरा मैदान लोगों से भरा हुआ था । नमाज शुरू होने के बाद जब सभी झुक गए, तब मै मुग्‍ध हो‍कर खड़ी-खड़ी वहां का दृश्‍य देखने लगी। बहुत कुछ हमारे स्‍कूल की असेम्‍बली के पीटी करने जैसा था , जब हम झुककर अपने पैरो की अगुलियां छूते थे , तब वहां भी कुछ ऐसा ही लगता होगा । नमाज खत्‍म होने के बाद पिताजी अपने परिचितों से गले मिलने लगे। गले मिलने का नियम सिर्फ लड़को में ही था । घर लौटकर मैंने अपनी मां से कहा, ''आओ मां ,हम भी गले मिलकर ईद मुबारक कहें।''
मां ने सिर हिलाकर कहा ,"लड़कियां गले नहीं मिलतीं ।"
"क्‍यों नहीं मिलतीं" पूछने पर वे बोलीं, "रिवाज नहीं है ।"
मेरे मन में सवाल उठा, "रिवाज क्‍यों नहीं है ?"
खुले मैदान में कुर्बानी की तैयारियां होने लगीं । तीन दिन पहले खरीदा गया काला सांड़ कड़ई पेड़ से बंधा था । उसकी काली आखों से पानी बह रहा था । यह देखकर मेरे दिल में हूक उठी कि एक जीवित प्राणी अभी पागुर कर रहा है , पूंछ हिला रहा है जो थोड़ी देर बाद गोश्‍त के रूप में बदलकर बाल्टियों में भर जाएगा । मस्जिद के इमाम मैदान में बैठकर छुरे की धार तेज कर रहे थे । हाशिम मामा कहीं से बांस ले आए । पिताजी ने आंगन में चटाई बिछा दी ,जहां बैठकर गोश्‍त काटा जानेवाला था । छुरे पर धार चढ़ाकर इमाम ने आवाज दी ।
हाशिम मामा , पिताजी और मुहल्‍ले के कुछ लोगों ने सांड़ को रस्‍सी से बांधकर बांस से लंगी लगाकर उसे जमीन पर गिरा दिया । सांड़ 'हम्‍बा' कहकर रो रहा था । मां और खाला वगैरह कुर्बानी देखने के लिए खिड़की पर खड़ी हो गई । सभी की आंखों में बेपनाह खुशी थी।
लुंगी पहने हुए बड़े मामा ने, जिन्‍होंने इत्र वगैरह नहीं लगाया था, मैदान के एक कोने पर खड़े होकर कहा, " ये लोग इस तरह निर्दयतापूर्वक एक बेजुबान जीव की हत्‍या कर रहे हैं। जिसे लोग कितनी खुशी से देख रहे हैं। वो सोचते हैं कि अल्‍लाह भी इससे खुश होते होंगे। दरअसल किसी में करुणा नाम की कोई चीज नहीं है।" बड़े मामा से कुर्बानी का वह वीभत्‍स दृश्‍य देखते नहीं बना। वे चले गए। मगर मैं खड़ी रही।
सांड़ हाथ-पैर पटक कर आर्तनाद कर रहा था। वह सात-सात तगड़े लोगों को झटक कर खड़ा हो गया। उसे फिर से लंगी मारकर गिराया गया। इस बार उसे गिराने के साथ ही इमाम ने धारदार छूरे से अल्‍लाह हो अकबर कहते हुए उसके गले को रेत दिया। खून की पिचकारी फूट पड़ी। गला आधा कट जाने के बाद भी सांड़ हाथ-पैर पटककर चीखता रहा।
मेरे सीने में चुनचुनाहट होने लगी, मैं एक प्रकार का दर्द महसूस करने लगी। बस मेरा इतना ही कर्तव्‍य था कि मैं खड़ी होकर कुर्बानी देख लूं। मां ने यही कहा था, इसे वे हर ईद की सुबह कुर्बानी के वक्‍त कहती थीं। इमाम सांड़ की खाल उतार रहे थे तब भी उसकी आंखों में आंसू भरे हुए थे। शराफ मामा और फेलू मामा उस सांड के पास से हटना ही नहीं चाहते थे। मैं मन्‍नू मियां की दुकान पर बांसुरी व गुब्‍बारे खरीदने चली गई। उस सांड के गोश्‍त के सात हिस्‍से हुए। तीन हिस्‍सा नानी के घरवालों का, तीन हिस्‍सा हमलोगों का और एक हिस्‍सा भिखाडि़यों व पड़ोसियों में बांट दिया गया।
****बड़े मामा लुंगी और एक पुरानी शर्ट पहनकर पूरे मुहल्‍ले का चक्‍कर लगाने के बाद कहते, ''पूरा मुहल्‍ला खून से भर गया है। कितनी गौएं कटी, इसका हिसाब नहीं। ये पशुधन किसानों को ही दे दिए जाते तो उनके काम आ सकते थे। कितने ही किसानों के पास गाय नहीं है। पता नहीं, आदमी इतना राक्षस क्‍यों है? समूची गाए काटकर एक परिवार गोश्‍त खाएगा, उधर कितने लोगों को भात तक नहीं मिलता।''
बड़े मामा को गुस्‍ल करके ईद के कपड़े पहनने के लिए तकादा देने का कोई लाभ नहीं था। आखिरकार हारकर नानी बोली, ''तूने ईद तो किया नहीं तो क्‍या इस वक्‍त खाएगा भी नहीं? चल खाना खा ले।'' '' खाऊंगा क्‍यों नहीं, मुझे आप खाना दीजिए। गोश्‍त के अलावा अगर कुछ और हो तो दीजिए।'' बड़े मामा गहरी सांस लेकर बोले।
नानी की आंखों में आंसू थे। बड़े मामा ईद की कुर्बानी का गोश्‍त नहीं खाएंगे, इसे वे कैसे सह सकती थीं। नानी ने आंचल से आंखें पोंछते हुए प्रण किया कि वे भी गोश्‍त नहीं छुएंगी। अपने बेटे को बिना खिलाए माताएं भला खुद कैसे खा सकती हैं। बड़े मामा के गोश्‍त न खाने की बात पूरे घर को मालूम हो गई। इसे लेकर बड़ों में एक प्रकार की उलझन खड़ी हो गई।
साभार: तसलीमा नसरीन: आत्‍मकथा भाग-एक, मेरे बचपन के दिन, वाणी प्रकाशन।

गुरुवार, अगस्त 01, 2019

पहली बार अगर किसी ने मुस्लिमों का विश्वास जितने की कोशिश करने वाले राजा दाहिर सेन थे मोहम्मद साहब के परिवार को शरण दी और बदले में उनको मौत मिली

पहली बार अगर किसी ने मुस्लिमों का विश्वास जीतने की कोशिश की होगी तो वो राजा दाहिर सेन थे मोहम्मद साहब के परिवार को शरण दी और बदले में उनको मौत मिली
राजा दाहिर सेन एक प्रजावत्सल राजा थे। गोरक्षक के रूप में उनकी ख्याति दूर-दूर तक फैली थी। यह देखकर ईरान के शासक हज्जाम ने 712 ई0 में अपने सेनापति मोहम्मद बिन कासिम को एक विशाल सेना देकर सिन्ध पर हमला करने के लिए भेजा। कासिम ने देवल के किले पर कई आक्रमण किये; पर राजा दाहरसेन और हिन्दू वीरों ने हर बार उसे पीछे धकेल दिया।
सीधी लड़ाई में बार-बार हारने पर कासिम ने धोखा किया। 20 जून, 712 ई. को उसने सैकड़ों सैनिकों को हिन्दू महिलाओं जैसा वेश पहना दिया। लड़ाई छिड़ने पर वे महिला वेशधारी सैनिक रोते हुए राजा दाहरसेन के सामने आकर मुस्लिम सैनिकों से उन्हें बचाने की प्रार्थना करने लगे। राजा ने उन्हें अपनी सैनिक टोली के बीच सुरक्षित स्थान पर भेज दिया और शेष महिलाओं की रक्षा के लिए तेजी से उस ओर बढ़ गये, जहां से रोने के स्वर आ रहे थे।
इस दौड़भाग में वे अकेले पड़ गये। उनके हाथी पर अग्निबाण चलाये गये, जिससे विचलित होकर वह खाई में गिर गया। यह देखकर शत्रुओं ने राजा को चारों ओर से घेर लिया। राजा ने बहुत देर तक संघर्ष किया; पर अंततः शत्रु सैनिकों के भालों से उनका शरीर क्षत-विक्षत होकर मातृभूमि की गोद में सदा को सो गया। इधर महिला वेश में छिपे मुस्लिम सैनिकों ने भी असली रूप में आकर हिन्दू सेना पर बीच से हमला कर दिया। इस प्रकार हिन्दू वीर दोनों ओर से घिर गये और मोहम्मद बिन कासिम का पलड़ा भारी हो गया।
राजा दाहरसेन के बलिदान के बाद उनकी पत्नी लाड़ी और बहिन पद्मा ने भी युद्ध में वीरगति पाई। कासिम ने राजा का कटा सिर, छत्र और उनकी दोनों पुत्रियों (सूर्या और परमाल) को बगदाद के खलीफा के पास उपहारस्वरूप भेज दिया। जब खलीफा ने उन वीरांगनाओं का आलिंगन करना चाहा, तो उन्होंने रोते हुए कहा कि कासिम ने उन्हें अपवित्र कर आपके पास भेजा है।
इससे खलीफा भड़क गया। उसने तुरन्त दूत भेजकर कासिम को सूखी खाल में सिलकर हाजिर करने का आदेश दिया। जब कासिम की लाश बगदाद पहुंची, तो खलीफा ने उसे गुस्से से लात मारी। दोनों बहिनें महल की छत पर खड़ी थीं। जोर से हंसते हुए उन्होंने कहा कि हमने अपने देश के अपमान का बदला ले लिया है। यह कहकर उन्होंने एक दूसरे के सीने में विष से बुझी कटार घोंप दी और नीचे खाई में कूद पड़ीं।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

शनिवार, जुलाई 27, 2019

स्त्रियाँ, कुछ भी बर्बाद नही होने देतीं।

स्त्रियाँ, कुछ भी बर्बाद
नही होने देतीं।
वो सहेजती हैं।
संभालती हैं।
ढकती हैं।
बाँधती हैं।
उम्मीद के आख़िरी छोर तक।
कभी तुरपाई कर के।
कभी टाँका लगा के।
कभी धूप दिखा के।
कभी हवा झला के।
कभी छाँटकर।
कभी बीनकर।
कभी तोड़कर।
कभी जोड़कर।
देखा होगा ना ?
अपने ही घर में उन्हें
खाली डब्बे जोड़ते हुए।
बची थैलियाँ मोड़ते हुए।
बची रोटी शाम को खाते हुए।
दोपहर की थोड़ी सी सब्जी में तड़का लगाते हुए।
दीवारों की सीलन तस्वीरों से छुपाते हुए।
बचे हुए खाने से अपनी थाली सजाते हुए।
फ़टे हुए कपड़े हों।
टूटा हुआ बटन हो।
पुराना अचार हो।
सीलन लगे बिस्किट,
चाहे पापड़ हों।
डिब्बे मे पुरानी दाल हो।
गला हुआ फल हो।
मुरझाई हुई सब्जी हो।
या फिर
तकलीफ़ देता " रिश्ता "
वो सहेजती हैं।
संभालती हैं।
ढकती हैं।
बाँधती हैं।
उम्मीद के आख़िरी छोर तक...
इसलिए ,
आप अहमियत रखिये!
वो जिस दिन मुँह मोड़ेंगी
तुम ढूंढ नहीं पाओगे...।
" मकान" को "घर" बनाने वाली रिक्तता उनसे पूछो जिन घर मे नारी नहीं वो घर नहीं मकान कहे जाते हैं
इसलिए #नारी का #सम्मान करो

शनिवार, जुलाई 06, 2019

डॉ वफ़ा सुल्तान की आत्मकथात्मक पुस्तक A GOD WHO HATES

डॉ वफ़ा सुल्तान की आत्मकथात्मक पुस्तक A GOD WHO HATES बड़े काम की है। इस किताब को पढ़ने-गुनने के बाद आपको मुसलमानों पर सिर्फ दया आएगी क्योंकि वे इस्लाम नामक घातक बीमारी के शिकार हैं और उन्हें इस बीमारी से मुक्त कराना हम सबका वैश्विक कर्तव्य है।
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चीन में मुस्लिम बच्चों को उनके माँ-बाप से अलग किया जा रहा है ताकि इस्लाम की शिक्षा उन्हें न मिले और वे जिहादी होने से बच जाएँ। मानवाधिकार को सुनिश्चित करने के लिए इससे बड़ा कोई काम नहीं हो सकता। इसके लिए चीन की सरकार बधाई की पात्र है।
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ऐसा इसलिए कि मजहब की शक़्ल में इस्लाम एक मानव-घाती कब्ज़ावादी राजनीतिक विचारधारा है जिसे माननेवाला चुप्पा या सक्रिय जिहादी होता है। इस लिहाज से इस्लाम के सबसे बड़े शिकार ख़ुद मुसलमान हैं और वे पूरी दुनिया को अपना शिकार बना रहे हैं। चीन ने इस बात को न सिर्फ समझा है बल्कि उससे बचाव का कारगर तरीका भी अपनाया है जिसे देर-सबेर सभी देशों को स्वीकारना पड़ेगा।
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चीन के क़दम का महत्त्व सीरियाई मनोचिकित्सक डॉ वफ़ा सुल्तान के शोध-निष्कर्ष से समझा जा सकता है जिसमें वे कहती हैं कि क़ुरान पढ़ने के बाद भी मुसलमान बना रहनेवाला मनोरोगी होता है। दूसरी तरफ़ INFIDEL की लेखिका अयान हिरसी अली इसी बात से बहुत ख़ुश हैं कि दुनिया के अधिकतर मुसलमान वह सब नहीं करते जो ख़ुद हुज़ूर ने किया भले वे उसे सही कहते-मानते हों। अगर ऐसा नहीं होता तो दुनिया अबतक नरक हो गई होती।
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इस कठिन समय में चीन के जिनपिंग और सऊदी राजकुमार बिन सलमान दुनिया की आशा के केंद्र हैं। वे यह साबित करते हैं कि दुनिया कभी विकल्पहीन नहीं होती। जिन्हें इन बातों के महत्त्व पर भरोसा न हो उन्हें क़ुरआन जरूर पढ़ना चाहिए, मोहम्मद की जीवनी भी क्योंकि यह पढ़ना आपके और पूरी दुनिया के अस्तित्व से जुड़ा है।
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अंग्रेजी पढ़नेवालों के लिए डॉ वफ़ा सुल्तान की आत्मकथात्मक पुस्तक A GOD WHO HATES बड़े काम की है। इस किताब को पढ़ने-गुनने के बाद आपको मुसलमानों पर सिर्फ दया आएगी क्योंकि वे इस्लाम नामक बीमारी के शिकार हैं और उन्हें इस बीमारी से मुक्त कराना हम सबका वैश्विक कर्तव्य है। इस पोस्ट के साथ इस्लाम और मुसलमानों पर लिखी कुछ बहुचर्चित पुस्तकों का फ्रंट-कवर स्क्रीनशॉट संलग्न है।
©चन्द्रकान्त प्रसाद सिंह

इस बार फिर से भाजपा ,अचानक ऐसा लग रहा है जैसे हिन्दू विरोधी अपराधों की एक आंधी सी आ रही है

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इस बार फिर से भाजपा सरकार बनते ही
अचानक ऐसा लग रहा है जैसे हिन्दू विरोधी अपराधों की
एक आंधी सी आ रही है... लगातार जगह जगह छोटी छोटी
बच्चियों से बलात्कार, पिछले 10 दिनों में ही 6 जगह हिन्दुओं के
मुहल्लों में 500-600 लोगों की भीड़ घुसकर पथराव, तोड़फोड़ कर रही है, हिन्दू मंदिरों पर पथराव किया जा रहा है, वहां भी तोड़फोड़ की जा रही है. यहां कुछ चीजें ध्यान देने योग्य हैं...
1. विपक्ष को इस बार बिल्कुल भी यह आशा नहीं थी कि इस बार भी भाजपा की सरकार बन जायेगी. वो लोग बौखलाये हुये हैं. और इसी बौखलाहट में उनके समर्थक किसी भी कीमत पर देश भर में जगह जगह छोटे छोटे दंगे करवाना चाहते हैं जिससे मोदी सरकार को बदनाम किया जा सके, जिससे विकास की राजनीति की जगह आपसी लड़ाई झगड़े और दंगों की बातें देश और दुनिया में फैलें, और अन्ततः मोदी का प्रशंसक वर्ग उससे नाराज होकर अगली बार भाजपा को वोट न दे...
2. सभी जगहों पर एक प्लानिंग के तहत इकठ्ठा होकर और बहुत छोटी सी बात को जबरन तूल देते हुए असावधान हिन्दुओं पर अचानक हमला किया जा रहा है जिसका कोई प्रतिरोध हिन्दू कर ही नहीं सके. हिन्दुओं के मंदिरों का अपमान और हिन्दू बच्चियों का बलात्कार हिन्दुओं का मनोबल तोड़ने के लिए किया जा रहा है...
3. प्रधानमंत्री पद की मर्यादा के अनुसार मोदीजी इन घटनाओं पर कोई बयान नहीं दे पा रहे हैं और इसलिये बहुत से पुराने मोदीभक्त भी मोदीजी को गालियां देने लगे हैं. ऐसे लोगों का कहना है कि जब गोरक्षकों के हाथों दो -तीन मामलों में गौतस्कर मारे गये थे तब तो मोदीजी ने तुरन्त गोरक्षकों की बुराई कर दी थी, तो अब वह कुछ क्यों नहीं कह रहे ? और भी 2-3 मामलों में हिन्दुओं के हाथों किसी चोर की पिटाई होने से उसकी मृत्यु होने जैसे मामलों में भी मोदीजी ने ऐसा न करने व करने वालों पर कार्रवाई करने का कहा, लेकिन इन लगातार हिन्दुओं के ऊपर हो रहे आक्रमण पर मोदीजी का न बोलना लोगों को बहुत क्रोधित कर रहा है...
मेरे यहां अपने हिन्दू मित्रों से कुछ प्रश्न हैं :-
1. क्या आप किसी सामान्य चोर, बलात्कारी या गौहत्यारे को पकड़ कर पीटने लगो, पीट पीटकर उसकी हत्या कर दो -और स्वयं ही इसकी वीडियो बनाकर वाइरल कर दो, तो मोदीजी क्या आपकी इस हरकत की प्रशंसा करेंगे? क्षमा कीजिए, मैं खुद आपके ऐसे किसी भी काम का विरोध करूंगा जहां कानूनन गलत हरकत करते हुये आप खुद ही वीडियो बनाकर वाइरल कर दें. आप चोरों को पकड़िये, बलात्कारियों व गौहत्यारों को पकड़ कर पुलिस के हवाले कीजिये.. पीटने का अधिकार तो कानून नहीं देता. और अगर आप ऐसे दुष्टों को पीटते भी हैं तो उसके वीडियो क्यों बना रहे हैं? आप स्वयं यह सुबूत बनाकर और उनको वाइरल करके वामपंथी मीडिया व वामपंथी समाज को यह मौका देते हैं कि वो आपको बदनाम करें और आपको जेल भेजने जाना भी सुनिश्चित करें. माफ कीजिये, आप वीडियो बनाकर अपनी ऐसी कानून तोड़ती हरकत का प्रचार करेंगे तो मोदीजी कभी भी आपका समर्थन नहीं कर सकते, वह आपको जेल में डलवाने का आदेश ही दे सकते हैं...
2. क्या हिन्दूवीरों ने गौर किया कि किसी भी घटना में हिन्दुओं के दोषी होने पर शहर शहर कितने विरोध प्रदर्शन होते हैं? जगह जगह " I am a Hindu. I am ashamed of... " की तख्ती लिये लोग खड़े हो जाते हैं? आप लोग भी ऐसा क्यों नहीं कर सकते? बड़े बड़े शहरों के चौराहों पर ऐसी ही तख्ती लेकर " I am a Hindu girl, I don't want to be raped", या "Hindu temples are being attacked. Why you hate us Hindus? " या इसी तरह की कोई तख्ती लिये क्यों खड़े नहीं हो सकते. जब जगह जगह ऐसे विरोध प्रदर्शन होंगे और उनको जमकर सोशल मीडिया पर भी शेयर किया जायेगा तो टीवी व न्यूजपेपर मीडिया को भी मजबूरन आपके पक्ष में बोलना -लिखना पड़ेगा. लेकिन क्या आपने ऐसा किया?
3. आप अपने MLA, MP के पास सैकड़ों की संख्या में पहुँचकर उनसे बात कीजिये कि वो इन मुद्दों पर सामने आकर आपका सपोर्ट क्यों नहीं कर रहे हैं? वो खुद नहीं आयेंगे लेकिन जब आप एक भीड़ के रूप में उनके पास जायेंगे तो उन्हें भी आपके साथ आना ही पड़ेगा...
4. सभी हिन्दुओं से विनम्र निवेदन. सप्ताह में कम से कम एक बार अपने मुहल्ले के मंदिर में जरूर जायें, वहां मुहल्ले के अन्य लोगों से सम्बन्ध बढायें. Whatsapp आदि पर कुछ ग्रुप बनायें, जिससे जरुरत पढ़ने पर सब लोग एक साथ घर से निकलकर अपने मुहल्ले पर आक्रमण करते लोगों का मुकाबला कर सकें. खास तौर से लाइसेंसी पिस्टल, राइफल रखने वाले हिन्दू इस मामले में आगे रहें. चार फायर होते ही आक्रमणकारियों की 400-600 की भीड़ भी 5 मिनट में गायब हो जायेगी. लेकिन, भगवान के लिए ऐसी फायरिंग आदि की कोई वीडियो न बनाइये. वीडियो सिर्फ आक्रमणकारियों की बनायें जिससे आप पुलिस को बता पायें कि आक्रमण आप पर किया गया था और आपने self defense में सिर्फ हवा में कुछ फायर किये थे...
मोदी आपसे कुछ नहीं कहेगा जब आप गौहत्यारों या गौतस्करों को पीटेंगे बशर्ते कि आप इस बात की वीडियो न बनायें. आप किसी दुष्ट को पीटते की वीडियो वायरल करके बहुत बड़ी बेवकूफी कर रहे होते हैं. जो करना है -उसका सुबूत छोड़ना बिल्कुल गलत है. बाकी, कुछ 7-8 प्रदेशों को छोड़कर सभी जगह आपकी ही राज्य सरकार है, आपकी ही पुलिस है. गुन्डों और अपराधियों को पकड़ने व मारने में पुलिस का सहयोग कीजिये. पर जो भी कीजिये, कानून सम्मत कीजिये...
आप कानून सम्मत रहेंगे तो मोदीजी भी आपकी तारीफ करेंगे. बाकी, विश्वस्त रहिये कि मोदीजी और अमित शाह की नजर इस तरह की सब घटनाओं पर है. यह वही अमित शाह हैं, यह वही मोदी हैं जो 2002 में गुजरात में थे. लेकिन उन्होंने उस समय भी कुछ भी कानून तोड़ने वाला काम नहीं किया था. एक और अंतिम बात, मोदी और अमित शाह आपसे कम कट्टर हिन्दू नहीं हैं...
और हां
जय हिंद

किसी ने सोचा कि कश्मीर बंगाल में मंदिर टूटते टूटते आखिर दिल्ली में मंदिर कैसे टूटने लगे ?

किसी ने सोचा कि कश्मीर बंगाल में मंदिर टूटते टूटते आखिर दिल्ली में मंदिर कैसे टूटने लगे ?
सीरिया से होते कश्मीर और कश्मीर से होते मेरठ में परसों हज़ारों लोग isis के काले झंडे लेकर कैसे और क्यों लहराने लगे ?
दिल्ली मोदी की और मेरठ योगी की ?
और दोनों देश के सबसे बड़े हिंदूवादी और कड़क शासक की गिनती में आते हैं.... तो क्या दोनों जगहों पर कुछ परीक्षण किया गया ?
बिल्कुल किया गया... सबसे पहले देखा गया कि काले झंडे देखकर सामान्य हिंदुओं की प्रतिक्रिया कैसी है ? क्या वो उसी वक़्त प्रतिक्रिया देते हैं ?
उन्होंने देख लिया कि हिन्दू काले झंडे से पटे जुलूस को देखकर भी उद्वेलित नहीं हुआ और योगी सरकार ने सिवाय डंडे फटकारने के कुछ नहीं किया और वो भी पुलिस तब पहुंची जब पता चला कि ISIS के झंडे लहलहा रहे हैं...
दिल्ली में मंदिर हिंदुओं के सामने तोड़ा गया... वहां भी वही रिजल्ट मिला... सामान्य हिन्दू और पुलिस मौन है और शांत है.. कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली...
कुल मिलाकर सबकुछ अनुकूल है... बल्कि वैसा ही जैसा 1990 के कश्मीर में था...
तबरेज के बहाने से हर शहर में लाखों मुसलमानों को जुटाकर एक और परीक्षण किया जा रहा है... ये देखा जा रहा है कि हरेक शहर में सब तैयार हैं या नहीं ? जोश जज्बा भरपूर है या नहीं... लाखों की भीड़ सड़क पर आने के लिए तैयार है या नहीं ?
ये भी अबतक अनुकूल रहा है... सरकार को ये भी भनक नहीं मिल पा रही कि लाखों लोगों ने आज किस शहर के किस चौराहे पर जुटने का प्रोग्राम बनाया है...
ये कमाल है कि लाखों लोग कितने एकजुट है कि बात लीक नहीं होती और उनके पास उनके आका का msg घर घर पहुंच जाता है...
तो तैयार रहिए... अब उनके अगले कदम का... मुझे जो आहट सुनाई दे रही है.. अगर वो आपको भी सुनाई दे रही है तो... तैयारी में लग जाइये... कम से कम इतना तो कल्पना कीजिये कि उस विषम हालात में आप क्या करने वाले हैं ? किस किस का फोन नम्बर आपके पास है ? घर के आसपास की सुरक्षा क्या है ? पास के थानों के नम्बर क्या है और वो नम्बर लगता है या नहीं ? आपके शहर के कौन से हिन्दू संगठन सबसे ज्यादा एक्टिव है और नम्बर... अगर कुछ बड़ा होने वाला है तो इन संगठनों के पास सबसे पहले न्यूज़ आ जाती है..
ये भी पता कर लीजिए कि आपके घर के आसपास में आपके जैसे विचारों वाले हिन्दू भाई कौन कौन हैं... उनसे मिलकर तैयारी कीजिये...
ये सब यूपी बिहार बंगाल दिल्ली आदि से ही शुरू होगा... राजस्थान,महाराष्ट्र, गुजरात का नम्बर बाद में आएगा... क्योंकि इसी का तो परीक्षण हो रहा है कि किस जगह की सरकार सबसे ज्यादा फेल्योर है...
बाकी आपकी मर्जी है...🚩