रविवार, मई 13, 2018

मुग़ल काल नाम से इतिहास में एक पूरे पार्ट की तरह पढ़ाया जाता है....क्यों?*

*बाबर ने मुश्किल से कोई 4 वर्ष राज किया। हुमायूं को ठोक पीटकर भगा दिया। मुग़ल साम्राज्य की नींव अकबर ने डाली और जहाँगीर, शाहजहाँ से होते हुए औरंगजेब आते आते उखड़ गया।*
*कुल 100 वर्ष (अकबर 1556ई. से औरंगजेब 1658ई. तक) के समय के स्थिर शासन को मुग़ल काल नाम से इतिहास में एक पूरे पार्ट की तरह पढ़ाया जाता है....क्यों?*
*मानों सृष्टि आरम्भ से आज तक के कालखण्ड में तीन भाग कर बीच के मध्यकाल तक इन्हीं का राज रहा!*
*अब इस स्थिर (?) शासन की तीन चार पीढ़ी के लिए कई किताबें, पाठ्यक्रम, सामान्य ज्ञान, प्रतियोगिता परीक्षाओं में प्रश्न, विज्ञापनों में गीत, ....इतना हल्ला मचा रखा है, मानो पूरा मध्ययुग इन्हीं 100 वर्षों के इर्द गिर्द ही है।*
*जबकि उक्त समय में मेवाड़ इनके पास नहीं था। दक्षिण और पूर्व भी एक सपना ही था।*
*अब जरा विचार करें..... क्या भारत में अन्य तीन चार पीढ़ी और शताधिक वर्ष पर्यन्त राज्य करने वाले वंशों को पाठ्यक्रम में इतना महत्त्व या स्थान मिला है? बिलकुल नहीं*
*अकेला विजयनगर साम्राज्य ही 300 वर्ष तक टिका रहा। हीरे माणिक्य की हम्पी नगर में मण्डियां लगती थीं।महाभारत युद्ध के बाद 1006 वर्ष तक जरासन्ध वंश के 22 राजाओं ने । 5 प्रद्योत वंश के राजाओं ने 138 वर्ष , 10 शैशुनागों ने 360 वर्षों तक , 9 नन्दों ने 100 वर्षों तक , 12 मौर्यों ने 316 वर्ष तक , 10 शुंगों ने 300 वर्ष तक , 4 कण्वों ने 85 वर्षों तक , 33 आंध्रों ने 506 वर्ष तक , 7 गुप्तों ने 245 वर्ष तक राज्य किया ।*
*फिर विक्रमादित्य ने 100 वर्षों तक राज्य किया था । इतने महान् सम्राट होने पर भी भारत के इतिहास में गुमनाम कर दिए गए। क्यों*
*उनका वर्णन करते समय इतिहासकारों को मुँह का कैंसर हो जाता है।क्यों? सामान्य ज्ञान की किताबों में पन्ने कम पड़ जाते हैं। पाठ्यक्रम के पृष्ठ सिकुड़ जाते है। कोचिंग वालों की नानी मर जाती है। प्रतियोगी परीक्षकों के हृदय पर हल चल जाते हैं।*
*वामपंथी इतिहासकारों ने नेहरूवाद का भोज भक्षण कर, जो उल्टियाँ की उसे ज्ञान समझ चाटने वाले चाटुकारों...!*
*तुम्हें धिक्कार है !*
*यह सब कैसे और किस उद्देश्य से किया गया ये अभी तक हम ठीक से समझ नहीं पाए हैं और ना हम समझने का प्रयास कर रहे हैं।
काश कि हम नेतागिरी नहीं,
कुरबानी देते।
जिंदा रहने के मौसम बहुत हैं
मगर
जान देने की ऋतु रोजआतीनहीं*
*
*जय हिंद*
🚩 *जय भारत* 🚩

सूफीवाद ...एक छलावा ...

Jitendra Pratap Singh
सूफीवाद ...एक छलावा ...
आपने पंचतन्त्र की रंगा सियार वाली कहानी जरुर पढ़ी होगी ,.. जिसमे एक सियार एक रंगरेज के रंग भरे बर्तन में गिर जाता है जिससे उसका रंग बदल जाता है फिर वो जंगल जाकर सभी जानवरों से कहता है की उसे खुदा ने जंगल का राजा बनाकर भेजा है .. वो सियार नही बल्कि एक राजा है ...
ठीक यही सूफीवाद है ....कट्टरपंथी बहाबी मुस्लिमो को जब लगा की वो तलवार के दम पर बहुत ज्यादा लोगो को इस्लाम में कन्वर्ट नही कर सकते क्योकि भारत और साउथ एशिया के कई लोग मरने के लिए तैयार थे लेकिन इस्लाम कुबूल करने के लिए नही तो उन्होंने एक बड़ा मायावी जाल बुना ..जो सूफीवाद कहलाता है ...
असल में इसके पीछे मकसद था की दुसरे धर्म के लोगो में उदारवादी इस्लाम की छवि पेश किया जाये और उन्हें पीरो के दरगाहो पर लाकर फिर उनका ब्रेनवाश करके उन्हें मुस्लिम बनाया जा सके ...
इतिहास में बहुत पीछे जाने की जरूरत नही है .. आप मशहूर संगीतकार ए आर रहमान को देखिये .. इनके घर में बहुत प्राब्लम थी .. इनकी दो बहने किसी रहस्यमय बीमारी से मर गयी .. एक पड़ोसी इनके पिताजी को एक सूफी संत के पास ले गया .. उस धूर्त सूफी संत ने इलाज, टोटका, तन्त्र मन्त्र किया और पानी देकर उन्हें ऐसा बरगलाया की ए आर रहमान जो दिलीप कुमारन थे उनके पिताजी ने पुरे परिवार के साथ इस्लाम कुबूल कर लिया ...
ये मकडजाल आपको भारत के सभी दरगाहो पर दिखेगा ..
बारहवी सदी में अफगानिस्तान में एक शक्स पैदा हुआ था जिसका नाम था जलालुद्दीन मुहम्मद "रूमी" ..ये सऊदी अरब गया और इब्न कबीले के प्रमुख वहाबियो और सउद कबीले के प्रमुख से मिला .. और इस्लाम को कैसे फैलाया जाये इस पर चर्चा किया .. फिर उसने एक सुझाव दिया की कट्टरपंथी होकर हम गैर मुस्लिमो को अपने तरफ आकर्षित नही कर सकते .. उसके लिए हमे रूहानी, संगीत, नृत्य आदि का भी इस्तेमाल करना होगा .. वहाबी तो पहले इस्लाम में इसकी इजाजत नही दिया लेकिन सउद कबीले के प्रमुख ने वहाब को समझाकर इसकी इजाजत दे दी ...फिर बाद में रूमी तुर्की में रहने लगा और "घूमता दरवेश" के नाम से प्रसिद्ध हो गया ... आपने कई फिल्मो में देखा होगा की कुछ लोग सफेद कपड़ा पहने सर पर ऊँची टोपी लगाये गोल गोल घूमते है ..असल में ये उसी जलालुद्दीन मुहम्मद रूमी की धूर्तता थी .. नृत्य संगीत की आड़ में रूमी में युवाओ को इस्लाम के तरफ खूब आकर्षित किया ... बाद में अखंड भारत में खूब दरगाहे बनाई गयी ..और कौवाली, नृत्य, संगीत, झाड़ फूंक टोटका तन्त्र मन्त्र आदि की आड़ में भोले भाले गैर मुस्लिमो को मुस्लिम बनाया गया ....
इसलिए मित्रो , सावधान ... इतिहास गवाह है की जितने लोग तलवार के डर से मुस्लिम नही बने उससे कई गुना ज्यादा लोगो को इसी चाल में दरगाहो पर आकर्षित करके तन्त्र मन्त्र झाड़ फूंक ,नृत्य संगीत आदि के आड़ में मुस्लिम बना दिया गया .. इसलिए इन दरगाहो से दूर ही रहे और अपने मित्रो जानने वालो को इन दरगाहो की सच्चाई बताये

इस्लाम का सबसे कट्टरपंथी सबसे खतरनाक "सुन्नी बहाबी" क्या है ?

इस्लाम का सबसे कट्टरपंथी सबसे खतरनाक "सुन्नी बहाबी" क्या है ?
अरब में वहाबी विचारधारा के प्रवर्तक मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब का जन्म 1703 में उयायना, नज्द के बनू तमीम कबीले में हुआ था , इस्लामी शिक्षा की चार व्याख्याओं में से एक हम्बली व्याख्या का उसने बसरा, मक्का और मदीना में अध्ययन किया इब्न अब्दुल वहाब की राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाएं काफी थीं सो 1730 में उयायना लौटने के साथ ही उसने स्थानीय नेता “मुहम्मद इब्न सऊद” (सऊदी अरब का संस्थापक शेख बादशाह) से एक समझौता किया, जिसमें दोनों परिवारों ने मिल कर सऊदी साम्राज्य खड़ा करने की सहमति बनाई ,तय हुआ कि सत्ता कायम होने पर सऊद परिवार को राजकाज मिलेगा; हज और धार्मिक मामलों पर इब्न अब्दुल वहाब के परिवार यानी अलशेख का कब्जा रहेगा (यही समझौता आज तक कायम है) सऊदी अरब का बादशाह अल सऊद-परिवार से होता है और हज और मक्का-मदीने की मस्जिदों की रहनुमाई वहाबी-सलफी विचारधारा वाले अल शेख परिवार के वहाबी इमामों के हाथ होती है, इब्न अब्दुल वहाब की विचारधारा को कई नामों से जाना जाता है, उसके नाम के मुताबिक उसकी कट्टर विचारधारा को वहाबियत यानी वहाबी विचारधारा कहा जाता है और खुद इब्न अब्दुल वहाब ने अपनी विचारधारा को सलफिया यानी ‘बुजुर्गों के आधार पर’ कहा था। आज दुनिया में वहाबी और सलफी नाम से अलग-अलग पहचानी जाने वाली विचारधारा दरअसल एक ही चीज है।
पूर्वी तट से लेकर दक्षिण के खतरनाक तापमान वाले रबी उल खाली के रेगिस्तान और उत्तर के नज्द (वर्तमान राजधानी रियाद का इलाका) और पश्चिमी तट के हिजाज (मक्का और मदीना सहित प्रांत) को वहाबी विचारधारा के एक झंडे के नीचे लाने में सऊद परिवार ने दो सौ साल संघर्ष किया और जहां-जहां वे इलाका जीतते, सलफी उर्फ वहाबी विचारधारा के मदरसे खोलते गए बद्दुओं यानी ग्रामीण कबीलों में बंटे अरबों को एक नकारात्मकतावादी विचारधारा के तहत लाकर 1922 और फिर 1925 के संघर्ष में अल सऊद ने वर्तमान सऊदी अरब के लगभग सारे इलाके जीत लिए, अब्दुल अजीज इब्न सऊद को इस संघर्ष में ब्रिटेन ने जोरदार सहयोग किया ब्रिटेन जानता था कि उस्मानिया खिलाफत को मार भगाने के लिए अब्दुल अजीज इब्न सऊद ही उसकी मदद कर सकता है क्योंकि आगामी राजनीति और आर्थिक नीति के सबसे बडे बम “कच्चे तेल / काले सोने” की खोज हो चुकी थी और दुनिया गाड़ी, टैंक, कार पर चलनी शुरू हो चुकी थी ।
इस बहाबी विचारधारा में इस्लाम को चरणबध्द तरीके से फैलाया जाता है .. सबसे पहले शिक्षा की आड़ में मदरसे खोले जाते है .. फिर इनमे नियुक्त मौलानाओ और आलिमो को सऊदी अरब बुलाया जाता है .. फिर इनका ब्रेनवश करके मुस्लिम बच्चो में कट्टरपंथी बाते और दुसरे धर्मो के लिए नफरत फ़ैलाने की बात सिखाई जाती है .. फिर सऊदी अरब से खूब पैसे भेजे जाते है .. उसके बाद उस इलाके में खूब मस्जिदे बनवाई जाती है .. और कई मुस्लिम परिवारों को बसाया जाता है ..जिससे दुसरे धर्मो के लोग उस इलाके से या तो चले जाये या धर्मपरिवर्तन कर ले ...
सोचिये .. सऊदी अरब का क्षेत्रफल काफी विशाल है और वहाँ हज यात्रियों के लिए करोड़ो ट्रेंट बने हुए है जो हज के बाद खाली ही रहते है .. फिर भी सऊदी अरब किसी भी मुस्लिम को अपने देश में शरण नही देता है ... असल में ये बहाबियो की एक पुरानी रणनीति है | सीरिया, अफगानिस्तान सहित गृहयुद्ध से ग्रसित कई इस्लामिक देशो से हजारो मुस्लिम आस्ट्रेलिया, यूरोप, अमेरिका आदि देशो में शरणार्थी बनकर जाते है .. फिर सऊदी अरब उनके लिए मदरसे और मस्जिदे बनवाता है .. फिर धीरे धीरे उस भूभाग का इस्लामीकरण किया जाता है |

वेद कहता है मानव बनो, कुरान कहता है मुस्लमान बन

Mahender Pal Arya
|| वेद कहता है मानव बनो, कुरान कहता है मुस्लमान बनो ||
तन्तुं तन्वन रजसो भानुमिन्विहि, ज्योतिष्मतः पथो रक्ष धिया कृतान |
अनुल्बणं वयत जोगुवामपो, मनुर्भव जनया दैव्यं जनम् || [ऋ १०|५३|६]
संसार को सदा जिसकी आवश्यकता रही है और रहेगी तथा इस समय भी जिसकी अत्यंत आवश्यकता है उस तत्त्व का उपदेश इस मन्त्र में किया गया है | वेद में यदि और उपदेश न होता केवल यही मंत्र होता तब भी वेदं का आसन संसार के सभी मतों और सम्प्रदायों से उच्च रहता |
| वेद कहता है – मनुर्भव – मनुष्य बन |
आज का संसार ईसाई बनने पर बल देता है, अर्थात ईसा का अनुकरण करने के लिए यत्नवान है | संसार का एक बड़ा भाग बौद्ध बनने में लगा हुआ है, अर्थात बुद्ध के चरण चिह्नों पर चलता हुआ बुद्धं शरणं गच्छामि का नाद गुंजा रहा है | इसी प्रकार संसार का एक भाग मुहम्मद का अनुगमन करने में तत्पर है | महापुरुषों का अनुकरण प्रशंसनीय है | किन्तु थोडा सा विचार करें तो एक विचित्र दृश्य सामने आता है अद्भुत तमाशा देखने को मिलता है |
ईसाई ने ईसा का नाम लेकर जो कुछ अपने भाइयों के साथ किया उसकी स्मृति ही मनुष्यों को कंपा देती है | बिल्ली के बच्चे तक की रक्षा करने वाले मुहम्मद की उम्मत का इतिहास भी भाइयों के रक्त से रंजित है | जिसे मुष्य कहते है वह मनुष्यता का वैरी हो रहा है | हमने संकीर्णता के कारण संकुचित दल बना डाले | एक दल दुसरे दल को कुचलने के लिए तत्पर है | आज मनुष्य मनुष्य का वैरी हो रहा है | अतः वेद कहता है मनुर्भव- मनुष्य बन |
ईसाई या बौद्ध या मुस्लमान बनने या किसी दुसरे सम्प्रदाय में सम्मिलित होने में वह रस कहाँ जो मनुष्य बनने में है | ईसाई बनने से केवल ईसयों को ममत्व से देखूंगा, बौद्ध हो ने से अन्य सबको असद्धर्मी मानूंगा, मुस्लमान होकर मोमिनों को ही अपने प्यार का अधिकार मानूंगा | किन्तु मनुष्य बनने पर तो संसार मेरा परिवार होगा सब पर मेरा एक सामान प्यार होगा | वसुधा को कुटुंब माना तो सारे कुटम्ब को प्यार करना चाहिए कुटुम्ब में समता का साम्राज्य होता है विषमता का व्यवहार कुटुम्ब की एकता पर वज्रप्रहार है | समतास्थिर रखने के लिए ही स्नेह का व्यवहार करना होता है तभी तो वेद ने कहा – मित्रस्य चक्षुषा समीक्षामहे [यजु ३६|१८]
सब को मित्र की स्नेहशील आँख से हम देखे | यहाँ वेद मनुष्य सीमा से भी आगे निकल गया प्यार का अधिकारी केवल मनुष्य ही न रहा वरन सब भुत प्राणी हो गए | यह उचीत भी है क्योंकि मनुष्य शब्द का अर्थ है – मत्वा कर्मणि सीव्यति अर्थात जो विचार कर कर्म करे अन्धाधुन्ध कर्म न करे | कर्म करने से पूर्व जो भली प्रकार विचारे की मेरे इस कर्म का क्या फल होगा ? किस-किस पर इसका क्या प्रभाव होगा? यह कर्म भूतों के दुःख प्राणियों की पीड़ा का कारण बनेगा या भुतहित साधेगा?
मनुष्य यदि सचमुच मनुष्य बन जाये तो संसार का सारा उपद्रव दूर हो जाये | धार्मिक दृष्टि से विचारें तो मनुष्य समाज के दो बड़े विभाग बन सकते है एक ईश्वरवादी और दूसरा अनीश्वरवादी | सभी ईश्वरवादी ईश्वर को पिता मनाते है और वेद ईश्वर को पिता के साथ साथ माता भी मानता है, और बन्धु व सखा भी मानता है | पर यह मान्यता कुरान तथा बाइबिल की नहीं है, और ना बौधों की है | इन्हों ने ने परमात्मा को मानने से भी इंकार किया |
ईसाइयों ने मन तो मात्र ईसा मसीह का पिता माना परमात्मा को, इस्लाम ने पिता मानने और कहने से भी मना किया | मनुष्य अगर सचमुच मनुष्य बन जाए तो संसार से सारा उपद्रोब ही दूर हो जाय | थोडा विचार करके देखें मानवता को जानिए वेद के इन उपदेश को हृदयंगम करें और धर्मिक दृष्टि से विचार करें, तो मनुष्य समाज में दो बड़े विभाग बन सकते हैं _एक ईश्वर वादी –दूसरा अनीश्वरवादी |
अब ईश्वरवादी प्रार्थना करता है प्रभु हमारे माता, पिता,है हम उनके सन्तान हैं, किन्तु कुसन्तान, जघन्य सन्तान, अयोग्य सन्तान विद्रोही सन्तान न बने | और जो अनिश्वरवादी है उसे तो यह पता ही नहीं है की वह सन्तान है अथवा नहीं ? और अगर हैं भी तो किनके सन्तान हैं ?
मानवों को सावधान हो कर सुनना चाहिए, और हमें घबराना नहीं चाहिए,हमें आचम्भित भी नहीं होना चाहिए | हम माता और पिता दोनों के सन्तान है किसी एक के संयोग से मनुष्य सन्तान की उत्पत्ति नहीं कर सकते | एकेली स्त्री या एकला पुरुष सन्तान नही पैदा कर सकते |प्रकृति पुरुष का, रयी प्राण का संयोग आवश्यक है | अर्थात दो मिले तो हम और आप धरती पर आयें | वैदिक मान्यता है वसुधा हमारा कुटुम्ब है हम एक दुसरे के भाई हैं आदि | यही वेद का उपदेश मनुर्भव कल्याण करी कल्याण साधक है अथवा नहीं ?
ईसाई, मुसलमान, सिख, जैनी बौधि बन्ने से ऊपर उठो मानव बनकर जिओं, मानवता को बर करार रखते हुए मरो मानव मात्र से आशीर्वाद लेकर मरो | ईसाई, मुसलमान जनि बौधि, बनने पर मानव मात्र का आशीर्वाद नहीं मात्र एक वर्ग या सम्प्रोदाय का ही आशीर्वाद मिलेगा मानव मात्र का नहीं | इस लिए हमें मानव बनना चाहियें, धन्यवाद के साथ |
महेन्द्रपाल आर्य =वैदिक प्रवक्ता = 13 =5 =18 =

शुक्रवार, मई 11, 2018

खतरनाक मंसूबे

Pawan Tripathi
खतरनाक मंसूबे
कश्मीर का नामी इस्लामिक चेहरा मुफ़्ती नासिर अचानक ही अपने मनसूबे जाहिर कर गया और खुलेआम 2025 तक की समय सीमा मुसलमानों को देते हुए साफ साफ बोला कि '' बस 6 साल और , अर्थात मात्र 2025 तक की बात है। कश्मीर में लड़ रही हिंदुस्तानी फौजें घुटने टेक देंगी और मुसलमानों को कश्मीर के रूप में फिर से मिलेगा एक नया आज़ाद हिन्दू विहीन मुल्क,,।
मुफ़्ती ने कहा कि 'भारत की फौजों में ज्यादा दम नही है और वो बस 2025 तक पस्त हो जाएंगी।अब कई तथाकथित सेकुलर लोगों के आदर्श मुफ़्ती ने खुल कर एलान किया कि हमने कश्मीर को पहले काफिरों अर्थात हिंदुओं से मुक्त किया है और जल्द ही इसको हिंदुस्तानी फौजों से भी मुक्त करवा लेंगे।वह यह भी बोला कि कश्मीर में अब भारत के गिने चुने दिन ही रह गए हैं।यहां ध्यान देने योग्य ये भी है कि सेना प्रमुख को गुंडा बोलने वाली कांग्रेस पार्टी ने अब तक देश को तोड़ देने की बात करने वाले और खुली चुनौती देने वाले मुफ़्ती के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोला है।बल्कि कई कांग्रेसी नेता तो बाकयदा उनके लिए माहौल बनाकर इन्तजार कर रहे हैं।इसी बहाने मोदी को गरिया रहे हैं।
When all these tactics of "terrorising Kashmiris" will not work, Mufti said the Indians will persuade their own people that it is futile to stay in Kashmir.
"They will make a public opinion against staying in kashmir and will leave," he said.
Mufti said that Kashmir movement was at its peak and even the professors and engineers were laying their lives for the freedom struggle.
वो खुलेआम जिन्ना के साथ खड़े हैं,
अफजल के साथ खड़े थे,
याकूब मेनन के साथ खड़े थे,
अजमल कसाब के साथ खड़े थे,
कश्मीरी पत्थरबाजों का समर्थन करते हैं,
उमर खालिद और कन्हैया कुमार का समर्थन करते है,
जिन्नाह की तस्वीर सजाते हैं और फिर भी कहते हैं हमसे देशभक्ति का सबूत नही मांगा जाए, जिन्नाह की तस्वीर निकलवा दोगे ! लेकिन इन जमीन-कब्जिया कर राष्ट्र को बांटते रहने वालो के दिलो-दिमाग से जिन्नाह की विचारधारा कैसे निकालगे?सरकार इन आस्तीन के सांपो को दूध पिलाने की बजाय इनके विषैले दांत उखाड़कर राष्ट्रवाद की बीन पर नचाइये! वरना ये भावी पीढ़ी को डँस जाएंगे। यह सब बातें प्रमाणित कर ही हैं की किसी भी इलाके की डेमोग्राफी न बिगड़ने दी जाये।वैसे अब साफ़-साफ़ सुन लो कोशिश तो तुम आठ सौ-सालो से कर रहे हो,जरूरत पड़ी तो इस बार वह सब कुछ करेंगे जो समस्या को सदा-सर्वदा के लिये खत्म करे लेकिन देश का एक इंच नहीं देंगे।

गुरुवार, मई 10, 2018

व्यापारियों की बर्बादी, वॉलमार्ट का इतिहास

9 may 2018  का दिन इतिहास में भारत के छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों की बर्बादी के नयी इबारत लिखे जाने के रूप में याद किया जाएगा, कहने को तो यह मात्र एक सौदा है लेकिन फ्लिपकार्ट ओर वालमार्ट की यह डील भारत के रीटेल मार्केट की तस्वीर पूरी तरह से बदलकर रख सकती है, लेख लम्बा तो जरूर है पर इस डील के निहितार्थ समझने के लिए पूरा जरूर पढियेगा
पूरी दुनिया मे वॉलमार्ट लोकल मार्केट को बर्बाद करने के लिए कुख्यात रहा है वॉलमार्ट का इतिहास यह रहा है कि वो बहुत कम कीमत पर सामान बेचकर छोटे-मोटे कारोबारियों को अपने रास्ते से हटा देती है. उसके पास न पैसे की कमी है ओर न राजनीतिक संपर्कों की, दुनियाभर के बाज़ारों में उसकी सीधी पहुँच है. ऐसे में वो दूसरे देशों का सस्ता सामान विशेषकर चीन से भारत में डंप कर चुटकियों में देश के लघु ओर मध्यम श्रेणी के उद्योगों को बर्बाद कर सकता है
स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक अरुण ओझा का यह अनुमान बिल्कुल सच है कि इस सौदे से छोटे कारोबारियों का कारोबार चौपट हो जाएगा और इससे देशभर में 20-22 करोड़ परिवार प्रभावित होंगे वालमार्ट और फ्लिपकार्ट के सौदे से वालमार्ट ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों के जरिए भारत के बाजार पर इन विदेशी कंपनीयो का प्रभुत्व कायम हो जाएगा'
अभी वालमार्ट देश के नौ राज्यों के 19 शहरों में 21 होलसेल स्टोर खोल चुकी है ओर 50 नये स्टोर्स खोलने की वह घोषणा कर चुकी है इस डील के बाद आप खुद अनुमान लगा लीजिए कि भारत के रिटेल मार्केट कैप पर इस कम्पनी का कितना बड़ा कब्जा होने जा रहा है
स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन कहते हैं कि विदेशी निवेश इक्विटी के जरिए होना चाहिए लेकिन रिटेल कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए उचित नहीं हैं
उनकी चिंता बिल्कुल जायज है क्योंकि ई कॉमर्स के क्षेत्र में कोई स्पष्ट नियम अभी तक नही बनाए गए हैं जिसकी जैसी मर्जी होती है वह अपने हिसाब से किसी भी ऑनलाइन सेल लगा लेता है फ्लिपकार्ट सिर्फ कहने के लिए एक प्लैटफॉर्म है लेकिन वह जिस तरह से छोटे व्यापारियों का धंधा छीन रहा है वह देश मे बेकारी की समस्या को ओर गहनतर करता जा रहा है
मूल रूप से ई कॉमर्स प्लेटफार्म में B2B बिजनेस के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गयी थी एफडीआई पॉलिसी 2016 की धारा 2,3 की उपधारा 9 कहती हैं कि ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस मॉडल सिर्फ तकनिकी प्लेटफार्म उपलब्ध कराएगा और किसी भी रुप में सीधे अथवा अप्रत्यक्ष रुप से कीमतों को प्रभावित नहीं करेगा और न ही कोई असमान प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाएगा लेकिन वास्तविकता में क्या होता है सब अच्छी तरह से जानते हैं
खुदरा कारोबारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) भी अब खुलकर इस सौदे के विरोध में उतर पड़ा है उसका कहना है ‘‘इस सौदे को मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि इससे ई-कामर्स क्षेत्र में लागत से भी कम दाम पर कारोबार करने और बाजार बिगाड़ने वाले मनमाने तरीके से कीमत तय करने को बढ़ावा मिलेगा जो पहले ही गलत व्यापारिक तरीकों की जकड़ में है.’’
लेकिन बात सिर्फ छोटे व्यापारियों के नुकसान तक ही सीमित नही है इस सौदे में सरकारी खजाने का भी बड़ा नुकसान होता दिख रहा है , ...............
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने फ्लिपकार्ट कंपनी को ईमेल भेजकर कहा है कि उसकी संपत्ति भारत में है, इसलिए टैक्स की देनदारी बनती है. चूँकि भारत में मौजूद संपत्ति का सौदा हो रहा है इसलिए विदहोल्डिंग टैक्स लगेगा. विदेशी भी भारत में मौजूद संपत्ति का सौदा करे तो ये टैक्स लगता है अनुमान है कि इस सौदे पर 10-20 फीसदी तक विदहोल्डिंग टैक्स लग सकता है.
लेकिन इस सौदे में अभी तक किसी भी प्रकार की टेक्स लायबिलिटी की बात कम्पनी ने नही मानी हैं, अश्विनी महाजन इस सौदे के बारे में कह रहे है कि "डील सिंगापुर में हुई, बेंगलुरु में अनाउंस हो रही है और दिल्ली में अप्रूवल लिया जा रहा है इससे भारत में एक भी पैसा नहीं आएगा"
लिख कर रख लीजिए यह सौदा थोड़े दिनों में छोटे और मझोले व्यापार के ताबूत की आखिरी कील साबित होगा क्योंकि मोदी सरकार ने उन्हें मृत्युशैया तक पुहचाने मे कोई कोर कसर बाकी तो पहले ही नही छोड़ी है ।।

https://www.patrika.com/opinion/walmart-in-india-2774406/   ओर अधिक जान ने के लिए ये लेख भी पढ़ लो ।।
https://www.patrika.com/economy-news/be-alert-walmart-brings-one-lakh-jobs-in-india-2767968/ 

ज़मीन_जिहाद

#ज़मीन_जिहाद
के तहत कोई भी सरकारी खाली जमीन पड़ी हो, उस पर नमाज़ पढ़ने शुरू कर दो और फिर धीरे धीरे उस पर पहले कपड़ो का तंबू लगाओ और फिर एक पूरी मस्जिद बना दो।
अब वोट बैंक हो तो,सरकार की परस्ती तो मिलेगी ही साथ मे अल्पसंख्यक का तमगा लगे होने का फायदा उठाते हुए, कोई तुम्हे रोके तो उस पर केस कर दो।
बिल्कुल ऐसा ही हुआ है,गुरुग्राम के वज़ीराबाद और कन्हाई गाँव मे।
जहां खाली पड़ी कई एकड़ ज़मीन पर,400-500 लोग नमाज़ पढ़ना शुरू करते है।
और जब वहां के कुछ लड़कों ने उन्हें रोका तो,कल उनके खिलाफ पुलिस करवाई कराकर 6 लोगो को जेल में बंद कर दिया।
अब सवाल की पुलिस ने इन्हें रोका क्यों, क्योंकी, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में भारतीय संविधान को धता बताने वाले इतने पॉइंट है, जो कानून को एक तरफ़ा करने में सक्षम है। इनमे कुछ हक़ इन्हें, संविधान ने दे दिए,और बाकी इन्होंने, अपनी जबरजस्ती और कट्टरता से, समाज मे कायम कर लिए।
जिसके चलते आप।
इन मुस्लिमो को बीच सड़क पर नमाज़ पढ़ने से नही रोक सकते।
ये जब और जहां चाहे, मस्जिद बनाकर, उस जमीन पर कब्ज़ा कर ले।
एक बार मस्जिद बन गई तो,उस ज़मीन पर फिर ये अल्लाह का हक़ बताते हुए, उसे किसी और काम मे लाने नही देते।
लाउडस्पीकर, जो पाकिस्तान में भी बेन है, तुम इनकी मस्जिद से उसे उतार नही सकते।
अगर कोई मुज़रिम, क़ुरान या नमाज़ पढ़ रहा है, और पुलिस उसको गिरफ्तार करने पहुचे, तो पुलिस को बैठ कर इंतज़ार करना होगा।
ये वो पॉइंट है, जो इन्होंने, अपनी कट्टरता के दाम पर समाज ही नही सिस्टम में भी मनवा लिए है।
अब इस जिहाद को रोकने के लिए,Uniform Civil code law जब आएगा तब आएगा पर mosque endowment act तो अभी आना चाहिए, जिस के तहत, मस्जिदे किसी वक़्फ़ बोर्ड की न होकर सरकार के आधीन हो।
और ये जबरजस्ती ज़मीन जिहाद के तहत, खाली पड़ी ज़मीनों पर कब्ज़ा करने से बाज़ आये।
Gaurav Sharma