सोमवार, सितंबर 23, 2013

आश्चर्य कोका कोला वास्तव में क्या है ?


आप को कभी आश्चर्य हुआ कि कोका कोला वास्तव में क्या है ? नही ? कोइ बात नही, स्टेप बाय स्टेप समजीये हो जायेगा आश्चर्य ।

पीने के 10 मिनट के बाद ः
कोला की एक गिलास में रही चीनी के दस चम्मच, शरीर के चयापचय की क्रिया के अवरोध से उल्टि का कारण बनता है लेकिन फोस्फोरिक एसिड चीनी की कार्रवाई को रोकता है ।

20 मिनट के बाद ः
खून में इंसुलिन का स्तर बढ जाता है । लिवर चीनी को फॅट में बदल देता है ।

40 मिनट के बाद ः
कैफीन की घूस शरीर में पूरी तरह हो जाती है । आंख में भारीपन आता है । लिवर और खून की चीनी को निपने की प्रक्रिया को लेकर रक्त दबाव बढ जाता है । Adenosine रिसेप्टर्स को अवरोध मिलता है, जीस से तंद्रावस्था या उनींदापन रोका जाता है और इस अवस्था को नकली ताजगी बताया जाता है ।

45 मिनट के बाद ः
शरीर डोपामाइन हार्मोन के उत्पादन को जन्म देता है, जो मस्तिष्क में रहे खुशी का अनुभव कराते केंद्र को उत्तेजित करता है, हेरोइन आपरेशन का ही ये एक सिद्धांत है ।

1 घंटे के बाद ः
फॉस्फोरिक एसिड, कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिन्क के मेल से पाचनतंत्र के मार्ग में चयापचय की क्रिया को बढा देता है । मूत्र के माध्यम से कैल्शियम का विमोचन भी बढ़ जाता है ।

बाद के समय में ः
मूत्रवर्धक प्रभाव का "खेल" शुरु होता है । कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिन्क, जो हमारी हड्डियों का हिस्सा है, साथ में सोडियम भी, शरीर से बाहर निकालने की क्रिया शुरु हो जाती है । एक कोका कोला में निहित पानी की पूरी मात्रा, मूत्र द्वारा निकाल दिया जाता है ।

क्या नकली ताजगी का आनंद उठाने के लिये कोक का एक ठंडा बोतल उठाते समय हम अपने गले में क्या रासायनिक "कॉकटेल" उतार रहे हैं हमें पता है ?

कोका कोला का सक्रिय संघटक orthophosphoric एसिड है । इसकी उच्च एसिडिटी के कारण, माल सडता नही भले वो कंपनी के विशेष स्टोर में हो, हेर फेर के दरम्यान रास्ते के टेंकर में हो या दुकान में रही बोतलों में हो ।

कंपनी एक ऍड में बहुत होंशियारी मारती है “कोका कोला लाइट विधाउट कैफिन” । जरा इस का पोस्ट मोर्टम करते हैं । इस में ऍक्वा कार्बोनेटेड E150D, E952, E951, E338, E330, Aromas, E211 होता है ।

एक्वा कार्बोनेटेड - एक शानदार पानी है । यह गैस्ट्रिक स्राव में हलचल पैदा करता है आमाशय रस की अम्लता बढ़ जाती है और गैस होने से पेट फुलता है । इसके अलावा, इस्तेमाल होनेवाला पानी कोइ मिनरल वॉटर नही, लेकिन नियमित रूप से उपयोग होता फ़िल्टर्ड पानी का इस्तेमाल किया जाता है ।

E150D – ये एक खाद्य कलर है जो खास तापमान पर चीनी के प्रसंस्करण के माध्यम से प्राप्त किया जाता है, और केमिकल के साथ या बिना कोइ केमिकल । कोका कोला बनाने के समय अमोनियम सल्फेट जोड़ा जाता है ।

E952 - सोडियम Cyclamate चीनी का विकल्प है । Cyclamate, एक ऐसा सिंथेटिक रासायन है जो चीनी से 200 गुना मीठा है, और एक कृत्रिम स्वीटनर के रूप में प्रयोग किया जाता है । Cyclamate, साकारीन और aspartame, जो प्रयोग के दौरान चूहों के मूत्राशय में कैंसर पैदा करने के कारण साबित हुए, तो 1969 में इन सब पर एफडीए द्वारा प्रतिबंधित डाला गया था । 1975 में जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर ने प्रतिबंध लगाया और सारा माल जब्त कर लिया था । 1979 में, डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन (इल्ल्युमिनिटी)), क्या मालुम क्यों, cyclamates का पूनर्जन्म करवाया और सुरक्षित होने का सर्टिफिकेट भी दे दिया ।

E950 - Acesulfame पोटेशियम । ये मिथाइल ईथर युक्त पदार्थ है और भी चीनी से 200 गुना अधिक मीठा है । यह हृदय प्रणाली के संचालन में छेड छाड करता है । इसी तरह, हमारे चेतातंत्र पर भी उत्तेजक प्रभाव पैदा कर सकता है और समय जाते यह लत का कारण बन सकता है । Acesulfame शरीर में बहुत बुरी तरह घुल जाता है, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए इस का प्रयोग सलामत नहीं है ।

E951 – ये है Aspartame, मधुमेह रोगियों के लिए चीनी का एक विकल्प है पर रासायनिक द्रष्टि से अस्थिर है : ऊंचे तापमान पर यह मेथनॉल और फेनिलएलनिन में विभाजित हो जाता है । मेथनॉल बहुत खतरनाक है : 5-10ml मेथनॉल ऑप्टिक तंत्रिका पर ऐसा असर करता है की असाध्य अंधापन आ जाता है । Aspartame की जहरिली असर किन मामलों देख सकते हैं: बेहोशी , सिर दर्द , थकान , चक्कर आना, उल्टी , घबराहट , वजन, चिड़चिड़ापन , घबराहट , स्मृति हानि , धुंधली दृष्टि , बेहोशी , जोड़ों में दर्द , अवसाद , प्रजनन , सुनने में हानि आदि । Aspartame इन रोगों को उत्तेजित कर सकता है - ब्रेन ट्यूमर , एमएस ( मल्टीपल स्केलेरोसिस ) , मिर्गी , 'कब्र रोग , क्रोनिक थकान , अल्जाइमर , मधुमेह , मानसिक कमी और तपेदिक ।

E338 - Orthophosphoric एसिड । यह त्वचा और आंखों की जलन पैदा कर सकता है । यह अमोनिया , सोडियम , कैल्शियम , एल्यूमीनियम का फॉस्फोरिक एसिड सोल्ट के उत्पादन के लिए प्रयोग किया जाता है । और भी उपयोग, लकड़ी का कोयला और फिल्म टेप के उत्पादन के लिए कार्बनिक संश्लेषण में, आग रोकने की सामग्री , मिट्टी के बरतन , गिलास , उर्वरक , सिंथेटिक डिटर्जेंट , दवा , धातु के उत्पादन के लिए , कपड़ा और तेल उद्योग, कार्बोनेटेड पानी के उत्पादन, पेस्ट्री में सामग्री को तैयार करने के लिए प्रयोग किया जाता है । यह orthophosphoric एसिड हड्डियों की कमजोरी पैदा कर सकता है , शरीर से कैल्शियम और लोहे के अवशोषण के साथ हस्तक्षेप कर सकता है । अन्य दुष्प्रभाव, प्यास और त्वचा पर चकत्ते हैं ।

E330 - साइट्रिक एसिड । यह व्यापक रूप से प्रकृति में फैला हुआ है और दवा और खाद्य उद्योग में प्रयोग किया जाता है । खून के संरक्षण के लिए - साइट्रिक एसिड ( citrates ) के साल्ट एसिड , संरक्षक , स्टेबलाइजर्स , और चिकित्सा क्षेत्र में और खाद्य उद्योग में उपयोग किया जाता है ।

Aromas - अज्ञात खुशबूदार योजक । अज्ञात इस लिए की इसे छुपाना है । बहाना मोनोपोली का बताया गया है, स्पर्धा के कारण और कोइ ईसका उपयोग ना करे । लेकिन बात इस तरह लिक हुई है की ये पदार्थ मानव भ्रुण के किडनी के सेल्स से बना है । ये बात सच हो या जो बात लिक की गई है, सच या जुठ, उस के पिछे वर्ल्ड पोलिटिक्स का एजन्डा ही काम कर रहा है । दुनिया के देशों की जनता का धर्म भ्रष्ट करना है । जैसे १८५७ में भारतिय सनिकों का धर्म भ्रष्ट करने के लिए कारतूस में गाय और डुक्कर की चरबी मिलाई गई थी । वो कारतूस सिल मुंह से तोडना होता था ।

E211 - सोडियम Benzoate । यह बैक्टीरियल और एंटी फंगल एजेंट के रूप में कुछ खाद्य उत्पादन में प्रयोग किया जाता है । यह एस्पिरिन के प्रति संवेदनशील हैं , जीन को अस्थमा है ऐसे लोगों के लिए सिफारिश नहीं है । ब्रिटेन के शेफील्ड विश्वविद्यालय के पीटर पाईपर द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि ये डीएनए के लिए महत्वपूर्ण नुकसान का कारण बनता है । उनके शब्दों के अनुसार , इस प्रिजर्वेटिव में एक सक्रिय घटक सोडियम बेंजोएट है वो डीएनए को नष्ट नही करता लेकिन उसे निष्क्रिय करता है । यह सिरोसिस और पार्किंसंस रोग जैसे अपक्षयी रोगों को जन्म दे सकता है ।

तो, क्या समज में आया ? खैर, यह कोका कोला का "गुप्त नुस्खा" सिर्फ एक विज्ञापन का खेल है और कुछ नही । कैसा भी सिक्रिट हो हम जान गये हैं की ये प्रिजर्वेटिव, खाद्य कलर, स्टेबिलाईजर्स आदी कोकीन का एक कमजोर समाधान है और हमारे लिए तो ये लिगल कोकेन ऍडिक्शन और शुद्ध जहर है ।

अगर, आप कोका कोला के बिना जीवन की कल्पना नहीं कर सकते, तो निम्न सिफारिशों का लाभ उठाओ:

- अमेरिका में खूद कोका कोला से कई वितरक इस पेयजल से अपने ट्रक इंजनों की सफाई करते हैं तो भारत में आप को कौन रोकता है ।

अमेरिका में कई पुलिस अधिकारी अपनी कार में कोका कोला की बोतल रखते हैं । कोइ दुर्घटना होती है तो वो इस से सड़क से खून के दाग साफ करते हैं ।

- कोका कोला कारों के क्रोम सतहों पर से जंग के दाग को हटाने के लिए एक महान प्रवाही है । कार बैटरी से जंग हटाने के लिए, कोक के साथ यह डालना और जंग गायब हो जाएगा ।

- इसमें डुबाया कपडा कुछ मिनिट जंग खाये नट-बोल्ट के उपर घुमाओं वो आसानिसे खुल जायेगा ।

-अच्छा डिटर्जन्ट है, कपड़े से दाग को साफ करने के लिए, गंदे कपड़े पर कोका कोला डालना, वाशिंग पाउडर जोड़ सकते हैं । और सामान्य रूप से कपड़े धोने की मशीन चला सकते हैं । आप परिणाम से आश्चर्यचकित हो जाएगी ।

- यह सस्ता है और प्रभाव पूरी तरह से संतोषजनक है इस लिए भारत के कुछ किसान, कीटनाशक की जगह कोका कोला का उपयोग कर रहे हैं । आप भी करिये ।

कोइ शक नही कि कोका कोला एक बेहतरिन प्रोडक्ट है । लेकिन पीने के लिए नही, अन्य उपयोग के लिए । प्रोपर उपयोग ढूंढ लो, मजा आयेगा इस के उपयोग से ।

यहां कोका कोला के बारे में एक वीडियो है !
http://www.youtube.com/watch?v=gVyZiYbsvLY SaveFrom.net

रविवार, सितंबर 22, 2013

ऐसा ही एक षड्यंत्र है आधार कार्ड

ऐसा ही एक षड्यंत्र है । वैश्विक पहचान संख्या Universal Identification Number जिसे अमेरिका में सोशल सिक्यूरिटी नंबर कहा जाता है । अब इसे भारत में भी लागू किया जा रहा है । आधार कार्ड के रूप में । इसके अंतर्गत एक रिकार्ड बनाया जाता है । जिसमें आपको एक नंबर मिलता है । और आपसे सम्बंधित आपके परिवार के व्यक्ति । परिजन । आपकी संपत्ति । सभी सम्बंधित खाते । सुविधा और संसाधन सभी का लेखा जोखा एक नंबर से जोड़ दिया जायेगा । जिस प्रकार से ये आपकी पहचान को हर प्रकार के बायोमेट्रिक माध्यम से गहराई से रिकॉर्ड करते हैं । अगर आप थोड़ा ध्यान दें । तो आपको पता चल जायेगा कि इनके द्वारा प्रयोग में लायी जा रही नीतियां आपको पहचान देने के लिए कम । अपितु आप पहचान छुपा न पाए । इसके लिए अधिक समर्थ हैं । इस नंबर को बनवाने के लिए आपको विभिन्न प्रकार के प्रलोभन दिए जायेंगे । और इसके लाभ गिनाये जायेंगे । पर आपको इसके दुष्प्रयोग के विषय में कुछ भी नहीं बताया जायेगा । और इसे पूर्णतः सुरक्षित बताया जायेगा । इस नंबर को आवंटित करने का मूल उद्देश्य है । हर व्यक्ति को एक अनन्य संख्या की पहचान देना है । अगर कोई व्यक्ति सरकार के विरुद्ध जाता है । और किसी प्रकार की क्रांति लाना चाहता है । तो उस पर नज़र रखकर उसे हर एक सुविधा और साधन से काट कर उसे कमजोर बना देना ही इसका उद्देश्य है । और आज के कम्प्यूटरी युग में ये नंबर किसी आपराधिक मानसिकता वाले व्यक्ति के हाथ लग जाये । इसकी भी सम्भावना को नकारा नहीं जा सकता
https://www.youtube.com/watch?v=RjPH5Ezig8A
भारत में देशवासियों को विदेशी पूंजी निवेश से विकास कराने के नाम पर भी ठगा जा रहा है । ये देश के विकास का नहीं । अपितु इसे और भी अधिक गरीब बनाने का षड्यंत्र है । एक तो ये निवेश विदेशी न होकर हमारे देश में रहने वाले भृष्ट लोगों की काली कमाई का धन जिसे किसी अन्य का धन बनाकर विदेशी निवेश के रूप में भारत में लगाया जा रहा है । और अगर कोई व्यक्ति एक साधारण सी बात पर थोड़ा सोचे । और ध्यान दे कि अगर कोई व्यक्ति निवेश कर भी रहा है । तो हम पर दया करके तो ऐसा कर नहीं रहा होगा । उसका कुछ फायदा तो अवश्य होगा उसे । ये जितना निवेश करेंगे । उससे अधिक धन यहाँ से ले भी जायेंगे । इससे ये पहले से ही धनवान भृष्ट लोग । जिनका ये धन निवेश के रूप में लगा है । और भी धनवान हो जायेंगे । और भारत का धन विदेश जाने के कारण रूपए का मूल्य गिरेगा । महंगाई बढ़ेगी । इससे अंत में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग मारा जायेगा ।
https://www.youtube.com/watch?v=SPElhVyOJM8
इसके साथ ही आयेगा देश में निवेश के रूप में अमेरिकी डालर । जो कि पूर्ण रूप से खोखली मुद्रा है । इसका मूल्य मात्र अमेरिका के दबदबे के कारण है । क्योंकि अमेरिकी सरकार कहती है कि इसका मूल्य है । जिसके पास जितना अमेरिकी डालर है । वो व्यक्ति उतना ही कर्ज में है । यही कारण है कि अमेरिका की आर्थिक स्थिति बहुत तीव्रता से गिरती जा रही है
https://www.youtube.com/watch?v=LCYoq8lVkzA
अगर ये कर्ज रुपी मुद्रा भारत में निवेश की जाती है । तो ये भारत के आर्थिक तंत्र से अपना मूल्य बनाएगी । इससे पुनः रुपये का अवमूल्यन होगा । और महंगाई बढ़ेगी । पर इन सबके साथ ही देश में आएंगी । बहु ब्रांड वाली खुदरा व्यापार करने वाली कंपनियाँ । जैसे वालमार्ट । जो पहले से ही दूसरे देशों में गरीबी लाने के लिए बदनाम हैं । और इन्हीं के पीछे होंगी । टीवी केबल चैनल की कंपनियाँ । जो अन्य विदेशी कंपनियों के साथ सांठ गाँठ करके आयेंगी । और सस्ते दामों पर टीवी चैनल उपलब्ध कराएंगी । सरकार के द्वारा केबल टीवी का डिजिटल उन्नतीकरण Digitization इन्हीं के लिए कराई गयी सुविधा है । जब इनके प्रलोभन में आकर लोग इनकी सुविधाओं को लेने लगेंगे । तब ये दिन भर इन्हीं विदेशी कंपनियों के प्रचार दिखाएंगी । और उन्हें अच्छा बतायेंगी । जिससे उनके जाल में लोग फंसकर उन विदेशी कंपनियों के खाद्य पदार्थ । कपड़े और अन्य उत्पाद सुविधायें आदि लेने लगेंगे । और पुनः हमारे देश का धन दूसरे देश में जायेगा । ये विदेशी कंपनियाँ पहले ही भारत में जैविक रूप से संवर्धित अन्न प्रचालन में ला चुकी हैं । किसानों को ठग कर कि इसमें खाद कम लगती है । और कीड़े भी नहीं लगते । उत्पादन अधिक है आदि । जिसे खाकर लोग विभिन्न प्रकार की व्याधियों विकारों से समस्या में हैं । इसके साथ ही ये खेत में विभिन्न प्रकार की रासायनिक खाद डलवाकर और पारंपरिक फसल चक्र को भृष्ट कर खेत की उर्वरता को सीमित कर देंगे । जिससे एक निश्चित प्रकार की फसलें ही मात्र पैदा हो सकें । और विविधता नष्ट हो जाये । इसके बाद ये कुपोषण के शिकार लोगों को पोषण प्राप्त करने के लिए मांसाहार की सलाह देंगे । अपने खाद्य पदार्थों में देशी गायों को मरवाकर गो मांस बेचेंगे । ऐसा ये इसलिए करेंगे । क्योंकि इन्हें पता है कि मात्र भारत की गायों में ऐसे खास अनुवांशिक गुण हैं । जिनके कारण उससे प्राप्त होने वाले पञ्च गव्यों से अनेकों प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं । ऐसा करने से ये लोगों को रोग ग्रस्त कर विदेशी मेडिकल सुविधाओं को भी निवेश के माध्यम से देश में लायेंगे । इस प्रकार इस विदेशी निवेश के अंतहीन कुचक्र में फँसकर रुपये का अवमूल्यन कराता जायेगा । और देश गरीब से गरीब होता जायेगा https://www.youtube.com/watch?v=GA5HWoevE74
इन विदेशी कम्पनियों द्वारा फैलाया गया एक अत्यंत भयावह जाल है - जैविक संवर्धन का । ऐसा करके ये लोग प्रकृति के साथ खेल खेलना चाहते हैं । ये कम्पनियां पेड़ पौधों अनाज के बीजों और पशु आदि के अनुवांशिक गुणों को बदल कर जैविक रूप से संवर्धित प्रजाति पैदा करते हैं । इन पैदा कराई गयी प्रजातियों में अच्छाइयां कम और बुराइयाँ अधिक होती हैं । ऐसा ये मात्र अपने फायदे के लिए करते हैं । और लोगों को इनकी अच्छाइयां मात्र बता कर ठगते हैं
http://www.youtube.com/watch?v=-5gyWRrfkbE
उदाहरण के लिए अनाज के लिए ये जो बीज उपलब्ध कराते हैं । उमसे आपको ये लालच देते हैं कि इसमें कम लागत में अधिक उत्पादन होगा । और इसमें कीड़े आदि नहीं लगेंगे । किसान इनके लालच में आकर इन्हें खरीद लेता है । और अपने खेत में लगाता है । इन बीजों को लगाने के लिए कम्पनियां पुनः विभिन्न प्रकार की रासायनिक खादों को उपयोग करने के लिए बोलती हैं । इन बीजों में या तो यह होता है कि नयी उगी हुई फसल में पुनः उस फसल को उगाने के लिए या तो बीज नहीं होते । या अगर बीज होते भी हैं । तो उनमें कोई क्षमता नहीं होती । अथवा अगर आप इनके द्वारा बताये गए निर्देश से फसल उगाते हैं । तो आपके खेत की उर्वरक क्षमता सीमित हो जाती है । जिससे आप मात्र कुछ ही प्रकार की फसलों को उगा सकते हैं । जैसे सोयाबीन की फसल । ये सोयाबीन की फसल विदेशों से यहाँ लायी गयी । क्योंकि विदेशों की कम उर्वरक धरती पर इस फसल का उत्पादन करने से वहाँ की उर्वरक क्षमता बहुत ही सीमित हो गयी । क्योंकि वहाँ सोयाबीन का प्रयोग सूअरों तथा भैंसों के चारे के रूप में किया जाता है । जिससे उनमें मांस की मात्रा बढ़ती है । और उन देशों में मांसाहार का प्रचलन अधिक है । इसलिए वहाँ सोयाबीन की आवश्यकता होती ही है । ऐसे में उन्होंने ने भारत की और देखा । जहां की धरती अत्यंत उर्वरक क्षमता वाली है । यहाँ का किसान अधिक उत्पादन के लालच में आकर इसे उगाता है । और 10 वर्ष के बाद 11वे वर्ष उसकी भूमि कपास के अलावा अन्य किसी फसल को उगने की क्षमता नहीं रखती । सोयाबीन का उत्पादन इतना अधिक बढा दिया गया है विश्व भर में कि अब इसे मनुष्य के खाने योग्य घोषित कर खपाया जा रहा है । भारत में सूरजमुखी और सोयाबीन के तेल का अत्यधिक प्रचालन है । जो कि एक षड्यंत्र के अंतर्गत फैलाया गया है । ये दोनों तेल मनुष्य के खाने योग्य नहीं हैं । इन्हीं के कारण हमारे देश में इतने अधिक दिल के रोग और मधुमेह रोगी बढ़ते जा रहे हैं । ऐसा ही कुछ कार्य ये कम्पनियां पशु पालन के क्षेत्र में भी कर रही हैं

https://www.youtube.com/watch?v=fE7SqkFv03M
ये गाय तथा भैंसों के शुक्राणुओं में अनुवांशिक बदलाव कर एक नए प्रकार की प्रजाति बना रही हैं । जो कि अधिक दूध का उत्पादन करें । और साथ ही साथ उनमे अधिक चर्बी हो । ऐसा ये गाये भैंस के लिए उपयोग में लाये जा रहे बीजों में सूअर की जाति के गुण डालकर कर रहे हैं । अब ऐसे में इनके द्वारा दिए जा रहे दूध में किसके गुण रहेंगे ? स्पष्ट है । सूअर के ही रहेंगे । जिस गाय को हमारे देश में माता के रूप में पूजा जाता है । और उससे प्राप्त होने वाला पञ्च गव्यों को अमृत स्वरुप समझा जाता है । जिनमे अनगिनत रोगों का नाश करके हष्ट पुष्ट करने की क्षमता होती है । अब उस गौ माता और सूअर में कोई भेद नहीं रह जायेगा । बस बाहरी रूप से वह कुछ कुछ गाये के जैसी दिखेगी । और अंदरूनी रूप में वो सूअर ही होगी । https://www.youtube.com/watch?v=yqMLtY_LQG4
इस प्रकार से ये कम्पनियां अनेकों प्रकार के नए रोग उत्पन्न कर रही है । और करेंगी । और इसका कारण ये कुपोषण बतायेंगी । इस प्रकार ये भारतीयों में भृम फैलाएंगी कि शाकाहार में कम पोषक तत्व है । और इसकी पूर्ति के लिए मांसाहार आवश्यक है । ऐसा करके ये देश में बहुतायत में कत्ल खाने खुलवायेंगी । और वहाँ इन्हीं पशुओं को कटवाएंगी । ऐसे इन्हें अपने वैश्विक मांसाहार के व्यवसाय में लाभ होगा । https://www.youtube.com/watch?v=fAXiZvfVP-g
यही वो कंपनियां है । जो बीमारी फैलाती हैं । और इन्हीं से सम्बंधित कंपनियां हैं । जो दवाइयों का व्यापार करती हैं । इन्हीं से सम्बंधित संस्थान है । जो अंग्रेजी पद्धति के चिकित्सकों को पढ़ाते हैं । और यही वो चिकित्सक हैं । जो इनके द्वारा बनाई गयी दवाइयों को रोगियों के लिए लिखते हैं । इनके मूल में है । वे लोग । जो अधिक से अधिक धन अर्जित कर शक्ति का केंद्रीकरण करना चाहते हैं । और बीमारी और अन्य साधनों के प्रयोग से लोगों को मार कर उनके संसाधन और संपत्ति पर स्वामित्व प्राप्त करना चाहते हैं । https://www.youtube.com/watch?v=LZs1V8mpcoY

शनिवार, सितंबर 21, 2013

धर्म और मजहब में फर्क

अब यह जानना आवश्यक है की धर्म और मजहब में फर्क क्या और कहाँ कहाँ है, मै पहले ही विस्तार से धर्म को दर्शा चूका हूँ |फिर भी धर्म वह शब्द है जिसका वर्णन पूरी जिन्दगी कोई पूरा नहीं कर सकता,वह इतना व्यापक विषय है | अब मै धर्म और मजहब में अंतर बताऊगा |धर्म और मजहब समानार्थक नहीं है और न धर्म ईमान या बिश्वास का विषयहै| कारण धर्म वस्तु है कृयात्मक, और मजहब विश्वासात्मक | धर्म मनुष्य के स्वभावानुकूल. अथवा मानव प्रकृति होने के कारण स्वाभाविक है. इसका आधार ईश्वरीय अथवा सृष्टि नियम ही है | परन्तु मजहब मनुष्य कृत होने से.अप्राकृतिक अथवा अस्वाभाविक है | कारण मजहबों का अनेक होना भिन्न भिन्न होना परस्पर विरोधी होना,अनेक मनुष्य कृत होना,अथवा बनावटी होने का प्रमाण.है कारण स्वाभाविक धर्म मनुष्य मात्र का एक ही है | जैसा, माता को माता ही कहना जानना और मानना, पिताको पिता कहना जानना,और मानना,यह स्वाभाविक धर्म जो मानव मात्र के लिए है| किन्तु मजहब अनेक है, और प्रत्येक मजहब उसके अनुयायियों के अतिरिक्त दूसरों के लिए अमान्य और अग्राह्यः है,इसलिए वह सार्वजानिक नहीं है |
धर्म सदाचार का नाम है धर्मात्मा होने के लिए सदाचारी का होना अनिवार्य है | परन्तु मजहबी या पन्थाई होने के लिए सदाचारी होना आवश्यक नहीं है | अर्थात जिस तरह धर्म के साथ सदाचार का नित्य सम्बन्ध है, उस तरह मजहब के साथ सदाचार का कोई सम्बन्ध नहीं है | क्योंकी की किसी मजहब का अनुयायी न होने पर भी मनुष्य सदाचारी [धर्मात्मा]बन सकता है| परन्तु आचार सम्पन्न होने पर भी कोई मनुष्य उस वक़्त तक मजहबी अथवा पन्थाई.नहीं बन सकता जब तक की मजहब के मन्ताब्वों पर ईमान अथवा बिश्वास नहीं लता, जैसे की चाहे कोई कितना ही सच्चा ईश्वरोपासक और उच्च कोटि का ही सदाचारी, क्यों न हो वह जब तक,हज़रत, मुहम्मद पर, हज़रात ईसा पर कुरान,और बाईबिल पर ईमान नहीं लाता तब तक कोई ईसाई ,या फिर मुस्लमान नहीं बन सकते, यह है मज़हब| इसपर ईमान लेन पर ही कोई ईसाई,व मुसलमान बन गया मजहबी बनगया |
धर्म के लिए यह ज़रूरी नहीं की आप किसी व्यक्ति विशेष को मानें,अथवा उनकी बनाई,या बताई गयी पुस्तक या उनके बनाये नियमों को माना जाये धर्म में इस के लिए कोई जगहनहीं| और यह धर्म मानव मात्र के लिए है, किसी व्यक्ति के लिए नहीं, किसी वर्ग विशेष के लिए नहीं और यहाँ न तो बाईबिल, और ईसा, की बात है | और नहीं कुरान और मुहम्मद की बात है, और न राम की बात है, और न ही कृष्ण की, कारण धर्म ही मनुष्य को मनुष्य बनाता है | अर्थात धार्मिक गुणों को या कर्मों को धारण करने से ही, मनुष्य कहलाने का अधिकारी बनता है | या फिर यह कहें धर्म और मानवता एक दुसरे के पूरक है,धर्म को धारण करना ही मनुष्यत्व है | धर्म प्राण है, मजहब, शारीर, प्राण के बिना शारीर को मुर्दा, शव,अर्थी, अदि नामों से पुकारते हैं| फिर विचार करें,मजहबी,या पन्थाई. बन्ने के लिए उनके जो अरकान हैं,जैसा इस्लाम का, कलमा, नमाज, रोज़ा, ज़कात, हज, यह उनकी बुनियाद है भिंत या पिलर है | पर धर्म के लिए यह जरुरी नहीं है, जो ऊपर बताया गया वह किसी वर्ग के लिए नहीं मानव मात्र के लिए है,किन्तु हर कोई मानव न कलमा पढता न नमाज न रोज़ा न ज़कात न हज ? हाय है मज़हब यही भेद है मजहब और धर्म में | इस मजहबी भेद को जाने बिना धर्म का जानना या मानना,अथवा मानव कहलाना संभव ही नहीं,धर्म और मजहब के भेद को जानना जरुरी है जो इस्लाम जनता ही नहीं और नहीं जानना चाहता है,कारण यही तो मजहबी जूनून है |
जहाँ धर्म उच्च कोट का मनुष्य अथवा देवता बनने और जीवन मुक्त तथा विदेह मुक्त होने के लिए ज्ञान पूर्वक सदाचार को ही सर्वोपरि साधन बताता है | वहीँ मजहब नजात के लिए ज्ञान और सदाचार को अनावश्यक और निरर्थक ठहराता है | और,मात्र मजहबी उपदेश को ही अपना जीवन शैली बताता है | जैसा ईमान,जो की आप ने बिश्वास किया,अमन्तो बिल्लाहे वा मालाइ कतेही वा कुतुबिही व रुसुलिही,वल याव मिल अखेरे वलक़द्रे,खैरेही व शररेही मिनाल्लाहे तयला वल बय्से बादल मौते |أمنت با الله ومليكه و كتبه و ر سله و أ ليو م أ لا خر و أ لقد خير ه و شر ه من أ لله تعا لى ؤ أ لبعث بعد ا لمو ت हिंदी में पहले लिखा हूँ इसका अर्थ ---ईमान लाया मै अल्लाह पर और उसके फरिश्तों पर,और उसके किताबों पर और उसके रसूलों पर और क़यामत के दिन पर और उसपर की.अच्छी और बुरी तकदीर खुदाये तायला की तरफ से होती है,और मौत के बाद उठाये जानेपर| यह है मजहबी ईमान,अब देखें की यह मनुष्य मात्र के लिए है या फिर किसी वर्ग विशेष केलिए? अब धर्म में परमात्मा का मानना तो जरुरी है ? किन्तु हज़रत मुहम्मद को रसूल कोई ज़रूरीनहीं और न ही कुरान को परमात्मा की किताब मानना ज़रूरी है |कारण धार्मिक किताब,और.मजहबी, किताब में भी अन्तर है | धर्म की किताब मानव मात्र का उपदेश है, मजहबी किताब में सिर्फ मजहब के मानने वालों के लिए उपदेश है | मात्र इतनाही नहीं कुरान के अतिरिक्त,उनसे पहले की किताबों को मानना पड़ेगा,आश्चर्यजनक बात है की जिस किताब को बातिल कर दिया गया छांट दिया गया,रिजेक्ट, कर दिया गया उसे भी मानना होगा |यह सब मजहबी मान्यता है अगर आप इसको संदेह करते है, या नहीं मानते हैं तो मजहब में आप के लिए कोई जगह नहीं|
अब देखें की उनके रसूलों पर बिश्वास करना होगा, वह रसूल कितने है ? चार [4 ] उनके नाम पहले बताया गया है | रसूल उनको कहाजाता है जिन पर अल्लाह ने किताबें नाज़िल की हों, यद्यपि नबी,या पैगम्बर एक लाख या दो लाख चौबीस हज़ार बताये जाते है | जो इन लोगों को भी सठीक पता नहीं, इन सब पर बिश्वास करना या ईमान लाना होगा | धर्म में इसकी कोई ज़रूरत नहीं है, कारण धर्म की किताब मानव मात्र का एक ही है वह अदि प्रारम्भिक काल से है उसे बदलने से परमात्मा पर दोष लगेगा, जो पहले ही दर्शया गया ही | यहाँ मै यह बताना चाहूँगा की पैगम्बर, का अर्थ है पैगाम लाने वाला,वह पैगाम किसका,अल्लाह का | तो खुलासा यह हुवा की कुरान का अल्लाह सर्वब्यापक नहीं है ? अगर वह हर जगह होता तो फिर पैगम्बर के हाथ अपना पैगाम नहीं भेजता | इसी को हिन्दू लोग अवतार कहते और मानते हैं | किन्तु धर्म में अवतार के लिए कोई जगह नहीं,परमात्मा का कोई अवतार नहीं होता, यही कारन है की डॉ जाकिर नाईक, और उसके चेले यह सब कह रहे हैं की हज़रत मुहम्मद कलि युगके अवतार हैं, जो कल्कि अवतार बतारहे हैं,वेद और पुरानों का हवाला दे रहे हैं |
जो की यह सब मजहबी जूनून इसी को कहते हैं, कारण धर्म में इसकी कोई ज़रूरत ही नहीं वेड में परमात्मा अवतार नहीं लेते,और नहीं वेड में किसी व्यक्ति विशेष की चर्चा और न किसी की नाम की कोई गुन्जायेश | मजहब किसी व्यक्ति के निर्मित हैं, जैसा इस्लामी मजहब से मुहम्मद को हटाया जाये तो मजहब का अस्तित्व समाप्त | तो मजहब किसी इन्सान निर्मित है,और धर्म परमात्मा निर्मित | यही कारण है की धर्म सबके लिए है,मजहब सबके लिए नहीं, यानि जो मुहम्मद को अल्लाह्का आखरी रसूल नहीं मानता या मुहम्मद को नहीं मानता वह मुस्लमान नहीं बन सकता | कुरान गवाह है ,,देखें يٰٓاَيُّھَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْٓا اَطِيْعُوا اللّٰهَ وَاَطِيْعُوا الرَّسُوْلَ وَاُولِي الْاَمْرِ مِنْكُمْ ۚ فَاِنْ تَنَازَعْتُمْ فِيْ شَيْءٍ فَرُدُّوْهُ اِلَى اللّٰهِ وَالرَّسُوْلِ اِنْ كُنْتُمْ تُؤْمِنُوْنَ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِ ۭ ذٰلِكَ خَيْرٌ وَّاَحْسَنُ تَاْوِيْلًا 59؀ۧ اے وہ لوگوں جو ایمان لائے ہو، حکم مانو تم اللہ کا اور حکم مانو اس کے رسول صلی اللہ علیہ وسلم کا ف۱ اور ان لوگوں کا جو صاحب امر ہوں تم میں سے ف۲، پھر اگر تمہارا اگر کسی بات پر آپس میں اختلاف ہوجائے تو تم اس کو لٹا دیا کرو اللہ اور اس کے رسول صلی اللہ علیہ وسلم کی طرف، اگر تم ایمان (ویقین) رکھتے ہو اللہ پر، اور قیامت کے دن پر، یہ بہتر ہے (تمہارے لئے فی الحال) اور (حقیقت اور) انجام کے اعتبار سے بھی،
अब देखें की यही मजहब है कुरान का कहना है की अगर आप मुहम्मद को नहीं मानते तो कोई भी मुस्लमान नहीं बनसकता | यह मजहब है, और धर्म में इसके लिए कोई ज़रूरी नहीं की आप किसी इन्सान का बताया,या चलाया हुवा मान्यता को आप मानें | धर्म में परमात्मा के साथ किसी भी बिचोलिया की ज़रूरत ही नहीं, सीधा आप परमात्मा को जानें और उसी का ही आदेश का पालन करें |

सोमवार, सितंबर 16, 2013

आने वाली पीढ़ी को बांझ बनाने के लिए आयरन की नीली गोली दी जा रही हैं?



आजकल कई राज्यों में (विशेष रूप से कांग्रेस तथा सपा शासित) जैसे हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक आदि मे आयरन की नीली गोली दी जा रही हैं। ये गोलिया बेहद खतरनाक है।शायद आने वाली पीढ़ी को बांझ बनाने के लिए OXYTOCIN जैसा कोई कैमिकल तो नहीं मिलाया है। क्या बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कोई प्रयोग तो नहीं ? पता नहीं मनमोहन सिंह ने क्या मिला रखा है ?

http://khabar.ndtv.com/news/show/879-chidren-fall-ill-after-consuming-iron-pills-37852
http://www.ehealthme.com/drug_side_effects/Stadol-1887961
http://treato.com/Iron+Supplement,Oxytocin/?a=s 
http://www.p7news.com/state/11623-delhi-200-children-feels-sick-by-eating-iron-tablet.html

छात्राओं के लिए मर्ज बन गई नीली गोली

सामान्य अस्पताल प्रशासन को नहीं छात्राओं के स्वास्थ्य की फिक्र

चिकित्सक की बजाए ट्रेनिंग नर्सों के हाथ में थी छात्राओं के उपचार की कमान

नरेंद्र कुंडू
जींद। छात्राओं में खून की कमी दूर करने के लिए दी जा रही नीली गोलियां अब छात्राओं के लिए मर्ज बन चुकी हैं। मारे दर्द के छात्राओं का दम निकला जा रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी छात्राओं के इस दर्द को नजरअंदाज कर रहे हैं। जींद के सामान्य अस्पताल में तो आलम यह है कि यहां मौजूद चिकित्सक आयरन

 की गोलियां लेने के बाद बीमार होकर आने वाली छात्राओं के उपचार की तरफ ध्यान देना भी अपनी जिम्मेदारी नहीं समझ रहे हैं। http://nkundu.blogspot.in/2013/08/blog-post_9.html अस्पताल प्रशासन के अधिकारी भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों की लापरवाही के कारण नीली गोलियों का खौफ छात्राओं के जहन में लगातार बढ़ता जा रहा है। सामान्य अस्पताल के एमरजैंसी वार्ड में तैनात चिकित्सकों की लापरवाही वीरवार को उस समय फिर उजागर हुई, जब आयरन की गोलियां लेने के बाद तबीयत बिगडऩे पर गांव धनखड़ी के राजकीय उच्च विद्यालय की 11 छात्राओं को उपचार के लिए यहां लाया गया। एमरजैंसी वार्ड में तैनात चिकित्सक द्वारा इन छात्राओं का ठीक से उपचार करना तो दूर, चिकित्सक ने एक बार भी इन छात्राओं के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेने की जहमत तक नहीं उठाई। एमरजैंसी वार्ड में मौजूद ट्रेङ्क्षनग नर्सों द्वारा इन छात्राओं का उपचार किया गया।
धनखड़ी गांव के राजकीय उच्च विद्यालय में बुधवार को छात्राओं को आयरन की गोलियां बांटी गई थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम की मौजूदगी में सभी छात्राओं को आयरन की गोलियां खिलाई गई। गोलियां लेने के बाद बुधवार को तो छात्राएं ठीक-ठाक घर चली गई लेकिन जैसे ही वीरवार सुबह स्कूल में पहुंची तो कई छात्राओं को पेट दर्द, सिर दर्द की शिकायत हुई। स्कूल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी छात्राओं को उपचार के लिए सी.एच.सी. कंडेला में पहुंचाया लेकिन यहां मौजूद स्टाफ ने छात्राओं का उपचार करने की बजाए छात्राओं को जींद के सामान्य अस्पताल में रैफर कर दिया। इसके बाद स्कूल स्टाफ के सदस्य सभी छात्राओं को उपचार के लिए जींद के सामान्य अस्पताल में ले आए लेकिन यहां स्थिति वहां से भी बुरी थी। यहां मौजूद स्टाफ ने छात्राओं के साथ आए अध्यापकों से छात्राओं की पर्ची के पैसे की मांग की। इसके बाद अध्यापकों ने अपनी जेब से पैसे खर्च कर छात्राओं की पर्ची बनवाकर छात्राओं का उपचार शुरू करवाया।

ट्रेनिंग नर्सों ने किया छात्राओं का उपचार

सामान्य अस्पताल के एमरजैंसी वार्ड में मरीजों के उपचार के लिए चिकित्सक तो मौजूद था लेकिन ड्यूटी पर मौजूद इस चिकित्सक ने एक बार भी दर्द से करहा रही छात्राओं के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेने की जहमत नहीं उठाई। वार्ड में मौजूद चिकित्सक द्वारा छात्राओं का उपचार शुरू नहीं करने पर वार्ड में मौजूद ट्रेनिंग नर्सों ने ही छात्राओं का उपचार किया।

जबरदस्ती खिलाई गोलियां

राजकीय उच्च विद्यालय धनखड़ी की 9वीं कक्षा की छात्रा अंजू, माफी, मन्नू, छात्र अंकित, 8वीं कक्षा की छात्रा नीतू, रेनू, रीतू, 7वीं कक्षा की छात्रा अंजू, अन्नू, ज्योति, तथा छठी कक्षा की छात्रा मोनिका ने कहा कि आयरन की गोलियां देने आए स्वास्थ्य विभाग की टीम के सामने ही उन्होंने गोलियां लेने से मना कर दिया था लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जबरदस्ती उन्हें गोलियां खिलाई।

पैसे लेकर बनाई पर्ची

धनखड़ी गांव के राजकीय उच्च विद्यालय के पी.टी.आई. अध्यापक सतबीर ने बताया कि जब वह स्कूल की 11 छात्राओं को उपचार के लिए जींद के सामान्य अस्पताल में लेकर पहुंचा तो यहां मौजूद चिकित्सक ने उसे छात्राओं की पर्ची बनवाने को कहा। जब वह पर्ची बनवाने के लिए खिड़की पर पहुंचा तो वहां मौजूद कर्मचारी ने उससे पर्ची के पैसे मांगे। अध्यापक सतबीर ने बताया कि उसने खिड़की पर मौजूद कर्मचारी को पूरे मामले से अवगत करवाया लेकिन वह फिर भी पैसे लेकर पर्ची बनाने की जिद पर अड़ा रहा। इसके बाद उसने अपनी जेब से पैसे देकर पर्ची बनवाई। सतबीर ने बताया कि जब उसने मीडिया के सामने यह मामला रखा तो इसके बाद उसे पैसे वापिस दिलवाए गए।
सामान्य अस्पताल में पिछले 17 दिनों से उपचाराधीन नगूरां की छात्राएं।

सी.एच.सी. कंडेल पर नहीं दिया गया छात्राओं को प्राथमिक उपचार

छात्राओं के साथ आए अध्यापकों ने बताया कि जब वह छात्राओं को उपचार के लिए सी.एच.सी. कंडेला पर लेकर गए तो वहां मौजूद स्टाफ ने छात्राओं का प्राथमिक उपचार करना भी वाजिब नहीं समझा। वहां मौजूद स्टाफ ने बिना प्राथमिक उपचार के ही सभी छात्राओं को जींद के सामान्य अस्पताल में रैफर कर दिया। जबकि वहां छात्राओं के उपचार के लिए वह सभी दवाइयां मौजूद थी जो जींद के सामान्य अस्पताल में छात्राओं को दी
गई।
मीडिया के सामने अपनी बेटी को सरकारी स्कूल नहीं भेजने की जानकारी देते नगूरां की महिला।

स्टाफ नर्स ने बीमार छात्राओं पर झाड़ा रौब

सामान्य अस्पताल में उपचार के लिए आई छात्राएं उस समय बहुत डर गई जब वहां मौजूद स्टाफ नर्स ने उन पर अपना रौब झाडऩा शुरू किया। वहां मौजूद स्टाफ नर्स ने छात्राओं को डांटते हुए कहा कि तुम्हें कुछ नहीं हुआ है, तुम जानबुझ कर यह ड्रामा कर रही हो। स्टाफ नर्स ने छात्राओं पर बरसते हुए कहा कि अगर अब कि बार किसी भी छात्रा ने पेट दर्द की शिकायत की तो वह उनकी नाक में नलकी डाल देगी। स्टाफ नर्स की इस धमकी के बाद तो छात्राओं की हालत और पतली हो गई। अब वह न तो अपने दर्द को छूपा सकती थी और न ही बयां कर सकती थी।

एक बैड पर हुए 11 छात्राओं का उपचार

आयरन की गोलियां लेने से धनखड़ी गांव के स्कूल की 11 छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद इन छात्राओं को उपचार के लिए जींद के सामान्य अस्पताल में लाया गया। यहां पर इन छात्राओं को लेटने के लिए तो क्या ठीक से बैठने के लिए भी जगह नहीं मिली। 11 छात्राओं का उपचार एक बैड पर ही किया गया। एक बैड पर 11 छात्राएं होने के कारण वह इस पर लेट तो क्या ठीक से बैठ भी नहीं पा रही थी।

बाहर से लानी पड़ रही हैं दवाइयां

लगभग 17 दिन पहले आयरन की गोलियां लेने के बाद बीमार हुई नगूरां स्कूल की 2 छात्राओं की तबीयत में अब तक भी कोई सुधार नहीं है। नगूरां स्कूल की 9वीं कक्षा की छात्रा मनीषा के पिता कपूर ङ्क्षसह तथा ताऊ हरकेश ने बताया कि लगभग 17 दिनों से वह अपनी बच्ची का उपचार करवा रहे हैंं लेकिन उसकी तबीयत में कोई सुधार नहीं है। मनीषा के परिजनों ने आरोप लगाया कि यहां मौजूद चिकित्सकों द्वारा उपचार के लिए उनसे बाहर से दवाइयां मंगवाई जा रही हैं। कपूर सिंह ने कहा कि वह मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा है। उसकी आॢथक स्थित काफी कमजोर है। इसलिए वह बाहर से दवाइयां लाने में सक्षम नहीं है। वहीं नगूरां गांव की 9वीं कक्षा की छात्रा मोना की मां सावित्री ने कहा कि लगभग 17 दिन पहले उसकी बेटी ने भी आयरन की गोली ली थी और उसी दिन से वह भी बीमार चल रही है। पिछले 17 दिनों से अस्पताल में ही दाखिल है लेकिन इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी उसकी बेटी की हालत में कोई सुधार नहीं है। सावित्री ने कहा कि अब वह कभी भी अपनी बेटी को सरकारी स्कूल में नहीं भेजेगी।

मानसिक रुप से कमजोर हैं छात्राएं

छात्राओं को ज्यादा दिक्कत नहीं है। उन्होंने खुद एमरजैंसी में जाकर छात्राओं से बातचीत की है और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली है। गोलियों के कारण थोड़ा बहुत साइडिफेक्ट हो जाता है। यह इतनी ज्यादा गंभीर समस्या नहीं है लेकिन कुछ छात्राएं मानसिक रुप से कमजोर होने के कारण ज्यादा डर जाती हैं। नगूरां की जो लड़की पिछले कई दिनों से अस्पताल में दाखिल है, वह भी मानसिक रुप से कमजोर है। इसलिए वह ज्यादा डरी हुई है। उसे उपचार से ज्यादा एकांत की जरुरत है। यहां वह लोगों की ज्यादा भीड़ को देखकर भी भयभीत हो जाती है। सी.एच.सी. कंडेला में तैनात स्टाफ ने इस मामले में लापरवाही की है। इसलिए उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
डा. दयानंद, सिविल सर्जन
सामान्य अस्पताल जींद
हरियाणा सरकार ने मंगलवार को स्वीकार किया कि एक राज्यस्तरीय अभियान के तहत आयरन की गोलियां खाने के लिए दिए जाने के बाद 879 बच्चे बीमार पड़ गए। बच्चों में गोलियों के दुष्प्रभाव के रूप में पेट में दर्द और मिचली आने की शिकायतें पाई गईं। आयरन की गोलियां खाने से 50 बीमार, 8 गंभीर
रेवाड़ी :जिले के गांव मामडिय़ा अहीर के स्कूल में आज आयरन की गोलियां खाने से 50 बच्चे बीमार हो गए। जिसमें 8 बच्चों की गंभीर हालत को देखते हुए रेवाड़ी के ट्रोमा सेन्टर में भर्ती कराया गया। बाकी बच्चों को ग्रामीण स्वास्थ्य केन्द्रों पर ही इलाज के लिए भर्ती करा दिया गया है। स्कूल के कार्यकारी मुख्याध्यापक सुनील कुमार ने बताया कि आज प्रात: सरकार के आदेश पर बच्चों को आयरन की गोलियां खिलाई गईं। गोलियां खाने के थोड़ी देर बाद ही बच्चों में उल्टी-दस्त व पेट दर्द की शिकायत शुरू हो गई। 8 बच्चों को ज्यादा तकलीफ हुई तो उनको रेवाड़ी के ट्रोमा सेन्टर में भर्ती कराया गया। बाकी बच्चों को खोल व सीहा के स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया गया।
गुस्साए अभिभावकों ने की स्कूल अध्यापक से हाथापाई
हांसी :राजकीय उच्च विद्यालय सुलतानपुर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई आयरन की गोलियोंं से बीमार पड़े छात्र-छात्राओं के अभिभावकों ने स्कूल में आकर हंगामा कर दिया।
अभिभावकों का कहना था कि स्कूल अध्यापक प्रशासन के रोकने के बावजूद बच्चों को आयरन की गोलियां दे रहा है। उधर स्कू ल के अध्यापक ने एक छात्र के पिता पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने स्कूल में आकर बेवजह अध्यापकों को धमकाना शुरू कर दिया और उनसे गाली गलौच शुरू कर दी। जब उसने उसे ऐसा करने से रोका तो उसने उससे हाथापाई करनी शुरू कर दी, दूसरे अध्यापकों ने बीच-बचाव कर उसे बचाया।
धांसू स्कूल के 26 छात्र बीमार
हिसार :स्वास्थ्य विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को आयरन की गोलियां देने के सघन अभियान के तीसरे दिन भी विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों की हालत खराब हो गई। इस कड़ी में आज धांसू गांव स्थित सरकारी हाई स्कूल के 26 से अधिक विद्यार्थियों की गोली लेने के बाद तबीयत खराब हो गई। पता चलते ही स्कूल प्रशासन तुरंत विद्यार्थियों को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में दाखिल कराया गया। वहीं नारनौंद में बीते दिन गोली लेने से बीमार अधिकांश विद्यार्थियों की हालत में अभी सुधार नहीं हुआ है। इसी तरह हांसी के सुल्तानपुरा गांव और बरवाला के बयानाखेड़ा गांव के सरकारी स्कूल में गोली लेने वाले 50 से अधिक विद्यार्थियों के पेट में दर्द की परेशानी दूर नहीं हुई है।
सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
भूना : भूना ब्लॉक के गांव चौबारा में आयरन की गोली खाने से एक दर्जन से अधिक बच्चों की हालात खराब होने पर अभिभावकों ने स्वास्थ्य विभाग व सरकार के खिलाफ जमकर रोष प्रदर्शन किया। अभिभावकों का कहना है कि सरकार आयरन की गोलियां छात्राओं को देने की बजाए उन्हें मिड-डे-मिल में ताजा अनार खिलाए ताकि विद्यार्थियों में खून की कमी न रहे। गांव के लोगों ने स्वास्थ्य विभाग पर आरोप लगाया है कि घटिया स्तर की आयरन की गोलियां बच्चों को दी जा रही हैं। जिसके कारण बच्चों का स्वास्थ्य सुधरने की बजाए बिगड़ रहा है।
जींद के घोघडिय़ा गांव में 66 बच्चे अस्पताल में
जींद : आयरन की गोली खाने के बाद जिले के घोघडिय़ा गांव के राजकीय सीनियर सैकेंडरी स्कूल में आज प्रात: हो रही प्रार्थना सभा में एकाएक छात्र-छात्राओं को चक्कर आने लगे। विद्यार्थी पेट को हाथ से पकड़ कर जमीन पर बैठने लगे। जिसके चलते यहां उपस्थित स्कूल स्टाफड्ड में हड़कंप मच गया। घोघडिय़ा स्कूल में 326 छात्र-छात्राओं को आयरन की गोलियां दी गई थी। अध्यापक अपने-अपने निजी वाहनों में पेट दर्द, उल्टी आने की शिकायत करने वाले विद्यार्थियों को लेकर तुरंत गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य में पहुंचने लगे। स्वास्थ्य केंद्र में 66 छात्र-छात्राओं को पेट दर्द, उल्टी की शिकायत होने पर उपचार के लिए लाया गया।
यहां एकाएक इलाज के लिए विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने पर बेड़ों की संख्या कम पडऩे पर चारपाई पर लेटा कर इलाज किया गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद पीडि़त विद्यार्थियों के अभिभावकों का जमघट अस्पताल में लग गया। दोपहर दो बजे तक गंभीर रूप बीमार एक दर्जन विद्यार्थियों को छोड़ सभी को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
कथूरा प्रबंधन कमेटियों के अध्यक्षों ने दिए इस्तीफे ,ग्रामीणों ने मांगी माफी
गोहाना : गांव कथूरा के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयरन की गोलियां खाने के बाद छात्राओं की तबीयत बिगडऩे से उपजे विवाद को लेकर गुरुवार को विद्यालय परिसर में बैठक हुई। बैठक में विद्यालय के शिक्षकों के साथ दुव्र्यवहार करने वाले लोगों ने सार्वजनिक तौर पर माफी मांग ली। कन्या विद्यालय और गांव के दूसरे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के विद्यालय प्रबंधन समितियों के अध्यक्षों ने अपने पदों से इस्तीफे दे दिए।
झोरडऩाली के दो छात्र बीमार
सिरसा :आयरन की गोली खाने के दूसरे दिन गांव झोरडऩाली के दो स्कूली छात्रों को पेट दर्द की शिकायत के बाद सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया है। स्कूल के अन्य बच्चों की भांति कक्षा नौ के छात्र सुनील पुत्र कृष्ण तथा आठवीं के छात्र योगेश पुत्र पृथ्वीराज ने दो दिन पहले आयरन की नीली गोली खाई थी।
फरीदाबाद में 20 बच्चे अस्पताल में
http://blog.bharatthakurgroup.com/2013/07/blog-post_8788.html

शनिवार, सितंबर 14, 2013

भारत के मंदिरों से धन लूटने के आधुनिक (सभ्य) तरीका

भारत के मंदिरों से धन लूटने के आधुनिक (सभ्य) तरीका 


किसी ज़माने में जब भारत सोने की चिड़िया हुआ करता था तब आक्रान्ता सेना लेकर आते थे तथा भारत के मंदिरों व अन्य धार्मिक स्थलों पर लूटपाट और हत्याएं कर चले जाया करते थे ......

65 वर्ष पूर्व तक अंग्रेज़ भी यही कर रहे थे पर आज 21 वीं सदी में लूटपाट करने का तरीका कुछ बदल गया है l

अब तक तो यही समझा जा रहा था की भारत में अब सब कुछ लुट चूका है और अब लूटने के लिए वो अपार दौलत नहीं बची है पर जैसे ही वर्ल्डबैंक/ IMF जैसी अमरीकी संस्थाओं को भारत के मंदिरों में अपार सोना व अन्य कीमती धातु रूप में अपार धन होने खबर मिली वैसे ही भारत में कार्यरत उनके एजेंटों ने उसे अमरीका भिजवाने का कार्य शुरू कर दिया l

सबसे पहले तो जिन मंदिरों में अपार सम्पदा रखी है उन्हें भारत सरकार ने अपने कब्ज़े में ले लिया साथ ही भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर पद पर अपना व्यक्ति आसीन कर दिया l

अब भारतीय बाजारों से डॉलर निकाल कर रुपये की कीमत को जान बूझ कर कम किया गया तथा मीडिया में भ्रम फैलाया गया की यह सब अन्तराष्ट्रीय हालातों के कारण हो रहा है ......

अब रुपये को स्थिर करने के लिए भारतीय मंदिरों का सोना गिरवी रखने की बात फैला दी गयी जिसके बाद मीडिया में यह भ्रम फैलाया गया की यह पैसा देश के काम आ रहा है .......
जबकी ऐसा बिलकुल नहीं है .......क्योंकि सदियों सोने को ही असल धन माना जाता जिसकी वास्तविक कीमत होती है जबकि करंसी नोट के बदले यदि उतने ही मूल्य का सोना नहीं मिलता तो करंसी नोट की कीमत एक कागज़ के टुकड़े से ज्यादा कुछ नहीं होती.....

यह बात अमरीकी कॉरपोरेट्स द्वारा चालित IMF/वर्ल्डबैंक जैसी संस्थाओं को अच्छे से पता है तथा उन्हें यह भी पता है की इसके दम पर भारत अपना पुराना क़र्ज़ उतार स्वयं सामर्थवान हो सकता है ......इसीलिए इस धन को भारत से लेने के लिए यह सब प्लान रचा गया ......

क्योंकि भारत में अव्वल दर्जे के मूर्खों की कोई कमी नहीं जिन्हें यह अर्थशास्त्र की एक मामूली प्रक्रिया नज़र आ रही है क्योंकि वो इन लूटने वाली संस्थाओं द्वारा चालित न्यूज़ चैनलों पर इनके नौकर अर्थशास्त्रियों के व्याख्यान पढ़ते और सुनते हैं ......

अंग्रेजियत में डूबे इन IMF एजेंटों की डिग्रियों के बोझ तले दबे इन मूर्खों को यह समझने की ज़रूरत, बैठे बिठाये हमारा धन तिजोरी से निकल कर गैर की तिजोरी में कभी वापस ना आने क लिए जा रहा है और बदले में हमें कुछ पैसों का एक कागज़ का टुकड़ा थमाया जा रहा है.......

फिर भी इन्हें इसमें कॉमन सेन्स नहीं सिर्फ अर्थशास्त्र और ऐसा करने वालों की डिग्रियां नज़र आती हैं ..... !!!


world bank,IMF और अमेरिका कैसे भारत को लूटते है विस्तार से जानने के लिए यहाँ click करे !!

http://www.youtube.com/watch?v=elicZLUmp9s

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वन्देमातरम !
#anshuaman

बड़ा झूठ प्रचारित किया जाता है कि अंग्रेजी के बिना कुछ नहीँ हो सकता

अंग्रजी भाषा की डिक्शनरी मेँ मात्र चार लाख शब्द हैँ........!!

मित्रोँ, हमारे देश मेँ एक सबसे बड़ा झूठ प्रचारित किया जाता है कि अंग्रेजी के बिना कुछ नहीँ हो सकता क्योँकि यह पूरे विश्व की भाषा है और सबसे समृद्ध है। आइये आपको अंग्रेजी की सच्चाई बताते हैँ-

1. भारत ही शायद अकेला ऐँसा देश है जहाँ विदेशी भाषा अंग्रजी मेँ शिक्षा दी जाती है। बाकि सभी देश अपनी मातृ भाषा मेँ ही अपनी शिक्षा ग्रहण करते है।
2. पूरे विश्व मेँ सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा चीनी है फिर इसके बाद हिन्दी और तीसरे स्थान पर रुसी भाषा है। अंगेजी का बारहवाँ स्थान है। तो फिर अंग्रेजी पूरे विश्व की भाषा कहाँ से हो गयी?

3. हमारा देश ही एकमात्र अकेला ऐँसा देश है जहाँ विदेशी भाषा मेँ समाचार पत्र छपते हैँ। बाकि किसी भी दूसरे देश मेँ विदेशी भाषा मेँ अखबार नहीँ छपते हैँ। और अगर छपते भी हैँ तो बहुत कम मात्रा मेँ।

4. अंग्रजी भाषा की डिक्शनरी मेँ मात्र चार लाख शब्द हैँ और अंग्रेजी के मूल शब्द सिर्फ 65 हजार हैँ बाकि दूसरे भाषाओँ से चोरी किये हुये शब्द हैँ। इसके विपरीत हिन्दी मेँ 70 लाख तथा संस्कृत मेँ 100 अरब से भी अधिक शब्द हैँ और जिस भाषा का शब्दकोष जितना अधिक होता है वह भाषा उतनी ही अधिक समृद्ध होती है अर्थात अंग्रेजी का व्याकरण सबसे खराब है।

5. दुनिया का कोई भी धर्मशास्त्र और अन्य पुस्तकेँ कभी अंग्रेजी मेँ
नही लिखी गयी। इसके अलावा कोई भी दर्शनशास्त्री, धर्मशास्त्री आजतक
अंग्रेजी भाषा बोलने वाला नहीँ हुआ। रुसो, प्लूटो, अरस्तू इत्यादि इनका अंग्रेजी भाषा से कोई लेना-देना नहीँ था। यहाँ तक की ईसा मसीह की अपनी भाषा कभी भी अंग्रेजी नहीँ रही। ईसा मसीह ने जो उपदेश दिये थे
वो भी अंग्रेजी भाषा मेँ कभी नहीँ दिये। बल्कि ईसा मसीह ने अरमेक भाषा में अपने उपदेश दिए थे। और बाइबिल भी अंग्रेजी भाषा मेँ नहीँ लिखी गयी थी। बल्कि अरमेक भाषा में लिखी गयी थी। अरमेक भाषा की लिपि बिल्कुल बांग्ला भाषा की लिपि के तरह थी।

6. सयुक्त राष्ट्र महासंघ और नासा की रिपोर्ट के अनुसार संस्कृत भाषा कम्प्यूटर के लिये सबसे उत्तम् है क्योँकि इसका व्याकरण शत् प्रतिशत
शुद्ध है। इसके अलावा अंग्रेजों ने दुनिया में सबसे कम वैज्ञानिक शोध
कार्य किये। तो मित्रोँ ये कहानी है अंग्रजी भाषा की और हमारे देश मेँ
बच्चोँ के ऊपर जबरदस्ती अंग्रेजी थोप दी जाती है। तथा बच्चा बेचारा सारी उम्र अंग्रेजी का मारा फिरता रहता है। और उसके सिर्फ अंग्रेजी सीखने के चक्कर मेँ दूसरे महत्वपूर्ण विषय छूट जाते हैँ। इसके अलावा जब सेना के ऑफिसर की भर्ती होती है तो वहाँ भी अंग्रेजी आना जरुरी होता है।
अब अंग्रेजी का फौज से क्या लेना देना। विश्व के ताकतवर देश चीन जापान जर्मनी फ्राँस इत्यादि देश के सैनिक तो अंग्रेजी जानते भी नहीँ हैँ।
तो मित्रोँ हमको इस अंग्रेजियत की गुलामी से बाहर निकलना होगा। क्योँकि किसी भी राष्ट्र का सम्पूर्ण विकास सिर्फ उनकी मातृभाषा और
राष्ट्रभाषा मेँ हो सकता है।

गुरुवार, सितंबर 12, 2013

गुमनामी बाबा थे नेताजी सुभाषचंद्र बोस!


गुमनामी बाबा थे नेताजी सुभाषचंद्र बोस!

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फैजाबाद [कृष्णकांत]। गुमनामी बाबा के अट्ठाइस साल पुराने रहस्य में नया मोड़ आ गया है। राज्य सरकार भी अब उन्हें नेताजी सुभाषचंद्र बोस मान रही है। 17 मई को शासन स्तर पर गृहसचिव की अध्यक्षता में बैठक के निर्णयों पर हो रही कार्यवाही से तो यही प्रतीत हो रहा है। शासन और जिला प्रशासन के पत्राचार में गुमनामी बाबा उर्फ भगवन जी को नेताजी सुभाषचंद्र के तौर पर उल्लिखित किया गया है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इसी साल 31 जनवरी को गुमनामी बाबा से संबंधित दस्तावेजों को संग्रहालय में रखने व बाबा के संदर्भ में एक आयोग गठित करने का आदेश दिया था। गृहसचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में गुमनामी बाबा यानी नेता सुभाषचंद्र बोस से संबंधित दस्तावेजों को संग्रहालय में रखने का निर्णय तो किया है, लेकिन आयोग गठन शासन ने पुनर्विचार याचिका दायर करने का भी फैसला किया है। चार सितंबर को गृह अनुभाग से मिले पत्र के बाद जिला मजिस्ट्रेट विपिन कुमार द्विवेदी ने अयोध्या में निर्माणाधीन रामकथा संग्रहालय का चयन दस्तावेजों को रखने के लिए किया है।

रहस्यमय व्यक्तित्व वाले गुमनामी बाबा उर्फ भगवन जी की मृत्यु फैजाबाद के रामभवन में 16 सितंबर 1985 को हुई थी। उनके कमरे व बक्सों से मिले दस्तावेजों से उनकी पहचान नेताजी सुभाषचंद्र बोस के तौर पर होने के संकेत मिले। दस्तावेजों में नेताजी की पारिवारिक तस्वीरें, आजाद हिन्द फौज की वर्दी, जापानी, जर्मन व अंग्रेजी भाषा में लिखे पत्र, समाचार पत्रों पर राजनीतिक टिप्पणियां, नेताजी के जन्मदिवस 23 जनवरी पर टेलीग्राम से दिए गए सैकड़ों बधाई संदेश थे। आजाद हिंद फौज के गुप्तचर शाखा के प्रमुख डॉ. पवित्रमोहन राय के कुछ संदेश भी दस्तावेजों में मिले थे। उच्च न्यायालय के आदेश पर ये साक्ष्य फैजाबाद के कोषागार में डबल लाक में 24 बक्सों में रखे गए हैं।

गौरतलब है कि बरामद इन्हीं साक्ष्यों के मद्देनजर कोलकाता उच्च न्यायालय के आदेश पर गठित मुखर्जी आयोग ने 14 नवंबर 2005 को केंद्र को सौंपी अपनी रिपोर्ट में माना था कि नेताजी की मौत 1945 की विमान दुर्घटना में नहीं हुई। संसद में मई 2006 में रिपोर्ट पर जमकर बहस हुई थी। संसद ने इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया था।

समाधि बनी श्रद्धा का केंद्र: गुमनामी बाबा की समाधि सरयू के गुप्तारघाट पर स्थित है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश के लोग आते रहते हैं। यह स्थान पर्यटनस्थल के रूप में विकसित हो रहा है। यहां आने वाले अधिकांश लोग पश्चिम बंगाल के होते हैं।
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