रविवार, सितंबर 08, 2013

सेकुलरिज़्म की महान परम्परा(??)




"भारत निर्माण" और सेकुलरिज़्म की महान परम्परा(??) से सम्बन्धित तीन ख़बरें हैं-

१) पहली खबर के अनुसार अखिलेश भैया ने यूपी के किसानों को गुजरात सरकार की तरफ से आने-जाने का टिकिट देने के बावजूद वहाँ जाने से इसलिए रोक दिया कि शायद उन्हें लगता हो कि कहीं ये किसान गुजरात से आने के बाद "साम्प्रदायिक गेहूँ" ना उगाने लगें...

२) दूसरी खबर एक और सेकुलर राज्य अर्थात महाराष्ट्र की. जहाँ राज्य के गृह मंत्री ने वादा किया था कि गणेश भक्तों के कोल्हापुर व कोंकण दौरे को देखते हुए दस दिनों तक टोल टैक्स में छूट दी जाएगी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. यदि गणेश भक्त टोल टैक्स बचाना चाहते हैं तो वे खटारा-ऊबड़-खाबड़ मार्ग से ही यात्रा करें.

३) तीसरी सेकुलर खबर राजस्थान से (एक और सेक्यूलर राज्य) - अब पूजापाठ करने वालों से भी सर्विस टैक्स लिया जाएगा. यदि बिना सर्विस टैक्स दिए कोई ज्योतिष अथवा धर्म-कर्मकांड करता पाया गया तो उसे तीन साल की जेल मिलेगी...

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हो रहा भारत निर्माण, हो रहा भारत निर्माण...


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क्या सभी धर्मों का उद्देश्य एक है.......?????

आजकल हमारे कुछ माननीय धर्माचार्य...... एवं, अत्यधिक पढ़े लिखे ... सेकुलर प्रवृति के लोग.... सर्वधर्म समभाव की बात करते हैं... और, बताते हैं कि .....सभी धर्मों का उद्देश्य मनुष्यों को सत्य के रास्ते पर लाना ही है...!

उनका कहना है कि.....उनके मार्ग अलग-अलग हो सकते हैं..... लेकिन उनका लक्ष्य एक ही है..... क्योंकि, दुनिया के सारे धर्म एक ही सत्य को बताते हैं.... और , सभी धर्म मनुष्य को एक ही लक्ष्य कि ओर ले जाते है.

साथ ही उनका ये भी कहना है कि.....सभी धर्म सिखाते हैं कि .......सभी मनुष्य आपस में प्रेम करें और किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहें.....!

लेकिन क्या वास्तव में सत्य यही है ....?????

जी नहीं........ हकीकतन..... सच्चाई इसके बिल्कुल ही विपरीत है...!

हम हिन्दू तो हमेशा से ही..... सर्व धर्म समभाव और वसुधैव कुटुम्बकम ... जैसे आदर्शों को मानते आये हैं .... और, हमारे धर्म ग्रन्थ किसी भी जीव हत्या को स्पष्ट मना करते हैं.....

यहाँ तक कि... हमारे वेद में इसके बारे में स्पष्ट आदेश है कि....

--इममूर्णायुं वरुणस्य नाभिं त्वचं पशूनां द्विपदां चतुष्पदाम्।
त्वष्टुं प्रजानां प्रथम जनित्रमग्ने मा हिंसीः परमे व्योमन् ॥
(यजुर्वेद अ० 12, मन्त्र 40)

अर्थात..... इन ऊन रूपी बालों वाले भेड़, बकरी, ऊंट आदि चौपाये, पक्षी समेत किसी भी दो पग वालों को मत मार ।

परन्तु..... इसके ठीक विपरीत ....

मुसलमानों के धर्म इस्लाम के अनुसार इस्लाम ही सच्चा दीन (धर्म) है........ जिसमे ईमान (विश्वास) लाने वाले ही मुसलमान ही जन्नत (स्वर्ग) में प्रवेश पायेंगे.... और, देवी-देवता आदि की पूजा करने वाले काफ़िर अपने देवी-देवताओं सहित नरक में झोंक दिये जायेंगे.

इस्लाम में कुरान सिखाता है कि......

"यदि वह इस्लाम स्वीकार नहीं करें तो उन से इतना लड़ो कि सिर्फ पूरे का पूरा अल्लाह का धर्म इस्लाम ही बाकी रह जाये ".......सूरा -अल अनफाल 8:39

उसी प्रकार.... ईसाई धर्म का कहना है कि केवल ईसाई धर्म ही सच्चा धर्म है........ और, केवल ईसा मसीह को मानने वाले ही स्वर्ग में जायेंगे....... देवी-देवता रुपी शैतानों को पूजने वाले नही.....!

इस्लाम का तो साफ़ मानना है कि..... काफ़िर लोग फ़साद (झगड़े) की जड़ हैं...... क्योकि, इस्लाम स्वीकार करने से इंकार करने वाले इन इंकारियों को सजा देने के लिये ....मुसलमानों को उनसे युद्ध करना पड़ता है.

इस्लाम में मुसलमानों के साथ शान्ति और काफ़िरों के साथ युद्ध करने का अल्लाह का स्पष्ट आदेश है ......और, इन्हीं अल्लाह के आदेशों को मानते हुए ... आज पूरी दुनिया में मुस्लिम आतंकवाद फैलाए हुए हैं....

और, हमारे हिंदुस्तान की पावन धरती पर भी........ लगभग हर रोज ही..... दंगा करते करते हैं..... तथा , यहाँ -वहां आतंक फैलाते रहते हैं....!

क्या इतने स्पष्ट प्रमाणों के बाद भी .... किसी का यह बोलना है कि..... सभी धर्मों का उद्देश्य एक है.......?????

जब.... काफ़िरों का सफ़ाया करना ही इस्लाम का मुख्य उद्देश्य हो...........तो मुस्लिम .... हम हिन्दुओं के प्रति कैसे नरम रह सकता है.........और वो.... कैसे उनके प्रति अहिंसक हो सकता है.....?????

इसका सबूत अभी हम सब ... मुजफ्फरनगर में देख ही रहे हैं...!

कोई बुद्धिमान या सेकुलर किस्म का प्राणी .... मुझे समझाएगा कि...... जब एक धर्म दूसरे धर्म के ईश्वर को शैतान की संज्ञा देता है ........तो , कैसे मान लिया जाए कि ....सभी धर्मों का उद्देश्य एक ही है...........?????

इसीलिए.... हम हिन्दुओं को शांति और सहिष्णुता का उपदेश देने वाले मनहूस सेकुलरो.... जाकर अपनी ये सेकुलरता की पीपड़ी .......उन मुल्लों और जेहादियों के सामने बजाओ..... जो आये दिन देश में बम ब्लास्ट और दंगा कर .... हमारे हिंदुस्तान में अपनी इस्लामी गन्दगी फैला रहे हैं....!

जय महाकाल...!!!

विश्व की पहली भूगोल पुस्तक - श्री विष्णु पुराण . World's first Geography Book - Shri Vishnu Puran

विश्व की पहली भूगोल पुस्तक - श्री विष्णु पुराण . World's first Geography Book - Shri Vishnu Puran

जी हाँ! ठीक शीर्षक पढ़ा आपने, पृथ्वी का संपूर्ण लिखित वर्णन सबसे पहले विष्णु पुराण में देखने को मिलता है... विष्णु पुराण के रचियता है... महान ऋषि पाराशर...

ऋषि पाराशर महर्षि वसिष्ठ के पौत्र, गोत्रप्रवर्तक, वैदिक सूक्तों के द्रष्टा एवं ग्रंथकार थे... राक्षस द्वारा मारे गए वसिष्ठ के पुत्र शक्ति से इनका जन्म हुआ। बड़े होने पर माता अदृश्यंती से पिता की मृत्यु की बात ज्ञात होने पर राक्षसों के नाश के निमित्त इन्होंने राक्षस सत्र नामक यज्ञ शुरू किया जिसमें अनेक निरपराध राक्षस मारे जाने लगे। यह देखकर पुलस्त्य आदि ऋषियों ने उपदेश देकर इनकी राक्षसों के विनाश से निवृत्त किया और पुराण प्रवक्ता होने का वर दिया। इसके पश्चात् इन्होने विष्णु पुराण की रचना की...

यह पुराण अत्यन्त महत्त्वपूर्ण तथा प्राचीन है। इस पुराण में आकाश आदि भूतों का परिमाण, समुद्र, सूर्य आदि का परिमाण, पर्वत, देवतादि की उत्पत्ति, मन्वन्तर, कल्प-विभाग, सम्पूर्ण धर्म एवं देवर्षि तथा राजर्षियों के चरित्र का विशद वर्णन है। अष्टादश महापुराणों में श्रीविष्णुपुराण का स्थान बहुत ऊँचा है। इसमें अन्य विषयों के साथ भूगोल, ज्योतिष, कर्मकाण्ड, राजवंश और श्रीकृष्ण-चरित्र आदि कई प्रंसगों का बड़ा ही अनूठा और विशद वर्णन किया गया है।

यहाँ स्वयं भगवान् कृष्ण महादेवजी के साथ अपनी अभिन्नता प्रकट करते हुए श्रीमुखसे कहते हैं-

“त्वया यदभयं दत्तं तद्दत्तमखिलं मया।
मत्तोऽविभिन्नमात्मानं द्रुष्टुमर्हसि शङ्कर।
योऽहं स त्वं जगच्चेदं सदेवासुरमानुषम्।
मत्तो नान्यदशेषं यत्तत्त्वं ज्ञातुमिहार्हसि।
अविद्यामोहितात्मानः पुरुषा भिन्नदर्शिनः।
वन्दति भेदं पश्यन्ति चावयोरन्तरं हर॥"

इस पुराण में इस समय सात हजार श्लोक उपलब्ध हैं। कई ग्रन्थों में इसकी श्लोक संख्या तेईस हजार बताई जाती है। विष्णु पुराण में पुराणों के पांचों लक्षणों अथवा वर्ण्य-विषयों-सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, मन्वन्तर और वंशानुचरित का वर्णन है। सभी विषयों का सानुपातिक उल्लेख किया गया है। बीच-बीच में अध्यात्म-विवेचन, कलिकर्म और सदाचार आदि पर भी प्रकाश डाला गया है।

ये निम्नलिखित भागों मे वर्णित है-

१. पूर्व भाग-प्रथम अंश
२. पूर्व भाग-द्वितीय अंश
३. पूर्व भाग-तीसरा अंश
४. पूर्व भाग-चतुर्थ अंश
५. पूर्व भाग-पंचम अंश
६. पूर्व भाग-छठा अंश
७. उत्तरभाग

यहाँ पर मैं सारे भागों का संछिप्त वर्णन भी नहीं करना चाहता... क्योकिं लेख के अत्याधिक लम्बे हो जाने की सम्भावना है ... परन्तु लेख की विषय वस्तु के हिसाब से इसके "पूर्व भाग-द्वितीय अंश" का परिचय देना चाहूँगा .... इस भाग में ऋषि पाराशर ने पृथ्वी के द्वीपों, महाद्वीपों, समुद्रों, पर्वतों, व धरती के समस्त भूभाग का विस्तृत वर्णन किया है...

ये वर्णन विष्णु पुराण में ऋषि पाराशर जी श्री मैत्रेय ऋषि से कर रहे हैं उनके अनुसार इसका वर्णन सहस्त्र वर्षों में भी नहीं हो सकता है। यह केवल अति संक्षेप वर्णन है। हम इससे इसकी महानता तथा व्यापकता का अंदाजा लगा सकते हैं...

जो मनुष्य भक्ति और आदर के साथ विष्णु पुराण को पढते और सुनते है,वे दोनों यहां मनोवांछित भोग भोगकर विष्णुलोक में जाते है।

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ऋषि पाराशर के अनुसार ये पृथ्वी सात महाद्वीपों में बंटी हुई है... (आधुनिक समय में भी ये ७ Continents में विभाजित है यानि - Asia, Africa, North America, South America, Antarctica, Europe, and Australia)

ऋषि पाराशर के अनुसार इन महाद्वीपों के नाम हैं -

१. जम्बूद्वीप
२. प्लक्षद्वीप
३. शाल्मलद्वीप
४. कुशद्वीप
५. क्रौंचद्वीप
६. शाकद्वीप
७. पुष्करद्वीप

ये सातों द्वीप चारों ओर से क्रमशः खारे पानी, नाना प्रकार के द्रव्यों और मीठे जल के समुद्रों से घिरे हैं। ये सभी द्वीप एक के बाद एक दूसरे को घेरे हुए बने हैं, और इन्हें घेरे हुए सातों समुद्र हैं। जम्बुद्वीप इन सब के मध्य में स्थित है।
इनमे से जम्बुद्वीप का सबसे विस्तृत वर्णन मिलता है... इसी में हमारा भारतवर्ष स्थित है...

सभी द्वीपों के मध्य में जम्बुद्वीप स्थित है। इस द्वीप के मध्य में सुवर्णमय सुमेरु पर्वत स्थित है। इसकी ऊंचाई चौरासी हजार योजन है और नीचे कई ओर यह सोलह हजार योजन पृथ्वी के अन्दर घुसा हुआ है। इसका विस्तार, ऊपरी भाग में बत्तीस हजार योजन है, तथा नीचे तलहटी में केवल सोलह हजार योजन है। इस प्रकार यह पर्वत कमल रूपी पृथ्वी की कर्णिका के समान है।

सुमेरु के दक्षिण में हिमवान, हेमकूट तथा निषध नामक वर्ष पर्वत हैं, जो भिन्न भिन्न वर्षों का भाग करते हैं। सुमेरु के उत्तर में नील, श्वेत और शृंगी वर्षपर्वत हैं। इनमें निषध और नील एक एक लाख योजन तक फ़ैले हुए हैं। हेमकूट और श्वेत पर्वत नब्बे नब्बे हजार योजन फ़ैले हुए हैं। हिमवान और शृंगी अस्सी अस्सी हजार योजन फ़ैले हुए हैं।
मेरु पर्वत के दक्षिण में पहला वर्ष भारतवर्ष कहलाता है, दूसरा किम्पुरुषवर्ष तथा तीसरा हरिवर्ष है। इसके दक्षिण में रम्यकवर्ष, हिरण्यमयवर्ष और तीसरा उत्तरकुरुवर्ष है। उत्तरकुरुवर्ष द्वीपमण्डल की सीमा पार होने के कारण भारतवर्ष के समान धनुषाकार है।

इन सबों का विस्तार नौ हजार योजन प्रतिवर्ष है। इन सब के मध्य में इलावृतवर्ष है, जो कि सुमेरु पर्वत के चारों ओर नौ हजार योजन फ़ैला हुआ है। एवं इसके चारों ओर चार पर्वत हैं, जो कि ईश्वरीकृत कीलियां हैं, जो कि सुमेरु को धारण करती हैं,

ये सभी पर्वत इस प्रकार से हैं:-

पूर्व में मंदराचल
दक्षिण में गंधमादन
पश्चिम में विपुल
उत्तर में सुपार्श्व

ये सभी दस दस हजार योजन ऊंचे हैं। इन पर्वतों पर ध्वजाओं समान क्रमश कदम्ब, जम्बु, पीपल और वट वृक्ष हैं। इनमें जम्बु वृक्ष सबसे बड़ा होने के कारण इस द्वीप का नाम जम्बुद्वीप पड़ा है। यहाँ से जम्बु नद नामक नदी बहती है। उसका जल का पान करने से बुढ़ापा अथवा इन्द्रियक्षय नहीं होता। उसके मिनारे की मृत्तिका (मिट्टी) रस से मिल जाने के कारण सूखने पर जम्बुनद नामक सुवर्ण बनकर सिद्धपुरुषों का आभूषण बनती है।

मेरु पर्वत के पूर्व में भद्राश्ववर्ष है, और पश्चिम में केतुमालवर्ष है। इन दोनों के बीच में इलावृतवर्ष है। इस प्रकार उसके पूर्व की ओर चैत्ररथ , दक्षिण की ओर गन्धमादन, पश्चिम की ओर वैभ्राज और उत्तर की ओर नन्दन नामक वन हैं। तथा सदा देवताओं से सेवनीय अरुणोद, महाभद्र, असितोद और मानस – ये चार सरोवर हैं।

मेरु के पूर्व में

शीताम्भ,
कुमुद,
कुररी,
माल्यवान,
वैवंक आदि पर्वत हैं।

मेरु के दक्षिण में

त्रिकूट,
शिशिर,
पतंग,
रुचक
और निषाद आदि पर्वत हैं।

मेरु के उत्तर में

शंखकूट,
ऋषभ,
हंस,
नाग
और कालंज पर्वत हैं।

समुद्र के उत्तर तथा हिमालय के दक्षिण में भारतवर्ष स्थित है। इसका विस्तार नौ हजार योजन है। यह स्वर्ग अपवर्ग प्राप्त कराने वाली कर्मभूमि है। इसमें सात कुलपर्वत हैं: महेन्द्र, मलय, सह्य, शुक्तिमान, ऋक्ष, विंध्य और पारियात्र ।

भारतवर्ष के नौ भाग हैं:

इन्द्रद्वीप,
कसेरु,
ताम्रपर्ण,
गभस्तिमान,
नागद्वीप,
सौम्य,
गन्धर्व
और वारुण, तथा यह समुद्र से घिरा हुआ द्वीप उनमें नवां है।

यह द्वीप उत्तर से दक्षिण तक सहस्र योजन है। यहाँ चारों वर्णों के लोग मध्य में रहते हैं। शतद्रू और चंद्रभागा आदि नदियां हिमालय से, वेद और स्मृति आदि पारियात्र से, नर्मदा और सुरसा आदि विंध्याचल से, तापी, पयोष्णी और निर्विन्ध्या आदि ऋक्ष्यगिरि से निकली हैं। गोदावरी, भीमरथी, कृष्णवेणी, सह्य पर्वत से; कृतमाला और ताम्रपर्णी आदि मलयाचल से, त्रिसामा और आर्यकुल्या आदि महेन्द्रगिरि से तथा ऋषिकुल्या एवंकुमारी आदि नदियां शुक्तिमान पर्वत से निकलीं हैं। इनकी और सहस्रों शाखाएं और उपनदियां हैं।

इन नदियों के तटों पर कुरु, पांचाल, मध्याअदि देशों के; पूर्व देश और कामरूप के; पुण्ड्र, कलिंग, मगध और दक्षिणात्य लोग, अपरान्तदेशवासी, सौराष्ट्रगण, तहा शूर, आभीर एवं अर्बुदगण, कारूष, मालव और पारियात्र निवासी; सौवीर, सन्धव, हूण; शाल्व, कोशल देश के निवासी तथा मद्र, आराम, अम्बष्ठ और पारसी गण रहते हैं। भारतवर्ष में ही चारों युग हैं, अन्यत्र कहीं नहीं। इस जम्बूद्वीप को बाहर से लाख योजन वाले खारे पानी के वलयाकार समुद्र ने चारों ओर से घेरा हुआ है। जम्बूद्वीप का विस्तार एक लाख योजन है।

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प्लक्षद्वीप का वर्णन -

प्लक्षद्वीप का विस्तार जम्बूद्वीप से दुगुना है। यहां बीच में एक विशाल प्लक्ष वृक्ष लगा हुआ है। यहां के स्वामि मेधातिथि के सात पुत्र हुए हैं। ये थे:
शान्तहय,
शिशिर,
सुखोदय,
आनंद,
शिव,
क्षेमक,
ध्रुव ।

यहां इस द्वीप के भी भारतवर्ष की भांति ही सात पुत्रों में सात भाग बांटे गये, जो उन्हीं के नामों पर रखे गये थे: शान्तहयवर्ष, इत्यादि।

इनकी मर्यादा निश्चित करने वाले सात पर्वत हैं:

गोमेद,
चंद्र,
नारद,
दुन्दुभि,
सोमक,
सुमना
और वैभ्राज।

इन वर्षों की सात ही समुद्रगामिनी नदियां हैं अनुतप्ता, शिखि, विपाशा, त्रिदिवा, अक्लमा, अमृता और सुकृता। इनके अलावा सहस्रों छोटे छोटे पर्वत और नदियां हैं। इन लोगों में ना तो वृद्धि ना ही ह्रास होता है। सदा त्रेतायुग समान रहता है। यहां चार जातियां आर्यक, कुरुर, विदिश्य और भावी क्रमशः ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र हैं। यहीं जम्बू वृक्ष के परिमाण वाला एक प्लक्ष (पाकड़) वृक्ष है। इसी के ऊपर इस द्वीप का नाम पड़ा है।

प्लक्षद्वीप अपने ही परिमाण वाले इक्षुरस के सागर से घिरा हुआ है।

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शाल्मल द्वीप का वर्णन

इस द्वीप के स्वामि वीरवर वपुष्मान थे। इनके सात पुत्रों :
श्वेत,
हरित,
जीमूत,
रोहित,
वैद्युत,
मानस
और सुप्रभ के नाम संज्ञानुसार ही इसके सात भागों के नाम हैं। इक्षुरस सागर अपने से दूने विस्तार वाले शाल्मल द्वीप से चारों ओर से घिरा हुआ है। यहां भी सात पर्वत, सात मुख्य नदियां और सात ही वर्ष हैं।

इसमें महाद्वीप में
कुमुद,
उन्नत,
बलाहक,
द्रोणाचल,
कंक,
महिष,
ककुद्मान नामक सात पर्वत हैं।

इस महाद्वीप में -
योनि,
तोया,
वितृष्णा,
चंद्रा,
विमुक्ता,
विमोचनी
एवं निवृत्ति नामक सात नदियां हैं।

यहाँ -
श्वेत,
हरित,
जीमूत,
रोहित,
वैद्युत,
मानस
और सुप्रभ नामक सात वर्ष हैं।

यहां -
कपिल,
अरुण,
पीत
और कृष्ण नामक चार वर्ण हैं।

यहां शाल्मल (सेमल) का अति विशाल वृक्ष है। यह महाद्वीप अपने से दुगुने विस्तार वाले सुरासमुद्र से चारों ओर से घिरा हुआ है।

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कुश द्वीप का वर्णन

इस द्वीप के स्वामि वीरवर ज्योतिष्मान थे।

इनके सात पुत्रों :
उद्भिद,
वेणुमान,
वैरथ,
लम्बन,
धृति,
प्रभाकर,
कपिल

इनके नाम संज्ञानुसार ही इसके सात भागों के नाम हैं। मदिरा सागर अपने से दूने विस्तार वाले कुश द्वीप से चारों ओर से घिरा हुआ है। यहां भी सात पर्वत, सात मुख्य नदियां और सात ही वर्ष हैं।

पर्वत -
विद्रुम,
हेमशौल,
द्युतिमान,
पुष्पवान,
कुशेशय,
हरि
और मन्दराचल नामक सात पर्वत हैं।

नदियां -

धूतपापा,
शिवा,
पवित्रा,
सम्मति,
विद्युत,
अम्भा
और मही नामक सात नदियां हैं।

सात वर्ष -

उद्भिद,
वेणुमान,
वैरथ,
लम्बन,
धृति,
प्रभाकर,
कपिल नामक सात वर्ष हैं।

वर्ण -

दमी,
शुष्मी,
स्नेह
और मन्देह नामक चार वर्ण हैं।

यहां कुश का अति विशाल वृक्ष है। यह महाद्वीप अपने ही बराबर के द्रव्य से भरे समुद्र से चारों ओर से घिरा हुआ है।

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क्रौंच द्वीप का वर्णन -

इस द्वीप के स्वामि वीरवर द्युतिमान थे।

इनके सात पुत्रों :

कुशल,
मन्दग,
उष्ण,
पीवर,
अन्धकारक,
मुनि
और दुन्दुभि के नाम संज्ञानुसार ही इसके सात भागों के नाम हैं। यहां भी सात पर्वत, सात मुख्य नदियां और सात ही वर्ष हैं।

पर्वत -

क्रौंच,
वामन,
अन्धकारक,
घोड़ी के मुख समान रत्नमय स्वाहिनी पर्वत,
दिवावृत,
पुण्डरीकवान,
महापर्वत
दुन्दुभि नामक सात पर्वत हैं।

नदियां -

गौरी,
कुमुद्वती,
सन्ध्या,
रात्रि,
मनिजवा,
क्षांति
और पुण्डरीका नामक सात नदियां हैं।

सात वर्ष -

कुशल,
मन्दग,
उष्ण,
पीवर,
अन्धकारक,
मुनि और
दुन्दुभि ।

वर्ण -

पुष्कर,
पुष्कल,
धन्य
और तिष्य नामक चार वर्ण हैं।

यह द्वीप अपने ही बराबर के द्रव्य से भरे समुद्र से चारों ओर से घिरा हुआ है। यह सागर अपने से दुगुने विस्तार वाले शाक द्वीप से घिरा है।

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शाकद्वीप का वर्णन -

इस द्वीप के स्वामि भव्य वीरवर थे।

इनके सात पुत्रों :

जलद,
कुमार,
सुकुमार,
मरीचक,
कुसुमोद,
मौदाकि
और महाद्रुम के नाम संज्ञानुसार ही इसके सात भागों के नाम हैं।

यहां भी सात पर्वत, सात मुख्य नदियां और सात ही वर्ष हैं।

पर्वत -

उदयाचल,
जलाधार,
रैवतक,
श्याम,
अस्ताचल,
आम्बिकेय
और अतिसुरम्य गिरिराज केसरी नामक सात पर्वत हैं।

नदियां -

सुमुमरी,
कुमारी,
नलिनी,
धेनुका,
इक्षु,
वेणुका
और गभस्ती नामक सात नदियां हैं।

सात वर्ष -

जलद,
कुमार,
सुकुमार,
मरीचक,
कुसुमोद,
मौदाकि
और महाद्रुम ।

वर्ण -

वंग,
मागध,
मानस
और मंगद नामक चार वर्ण हैं।

यहां अति महान शाक वृक्ष है, जिसके वायु के स्पर्श करने से हृदय में परम आह्लाद उत्पन्न होता है। यह द्वीप अपने ही बराबर के द्रव्य से भरे समुद्र से चारों ओर से घिरा हुआ है। यह सागर अपने से दुगुने विस्तार वाले पुष्कर द्वीप से घिरा है।

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पुष्करद्वीप का वर्णन -

इस द्वीप के स्वामि सवन थे।

इनके दो पुत्र थे:

महावीर
और धातकि।

यहां एक ही पर्वत और दो ही वर्ष हैं।

पर्वत -

मानसोत्तर नामक एक ही वर्ष पर्वत है। यह वर्ष के मध्य में स्थित है । यह पचास हजार योजन ऊंचा और इतना ही सब ओर से गोलाकार फ़ैला हुआ है। इससे दोनों वर्ष विभक्त होते हैं, और वलयाकार ही रहते हैं।

नदियां -
यहां कोई नदियां या छोटे पर्वत नहीं हैं।

वर्ष -

महवीर खण्ड
और धातकि खण्ड।

महावीरखण्ड वर्ष पर्वत के बाहर की ओर है, और बीच में धातकिवर्ष है ।

वर्ण -

वंग,
मागध,
मानस
और मंगद नामक चार वर्ण हैं।

यहां अति महान न्यग्रोध (वट) वृक्ष है, जो ब्रह्मा जी का निवासस्थान है यह द्वीप अपने ही बराबर के मीठे पानी से भरे समुद्र से चारों ओर से घिरा हुआ है।

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समुद्रो का वर्णन -

यह सभी सागर सदा समान जल राशि से भरे रहते हैं, इनमें कभी कम या अधिक नही होता। हां चंद्रमा की कलाओं के साथ साथ जल बढ़्ता या घटता है। (ज्वार-भाटा) यह जल वृद्धि और क्षय 510 अंगुल तक देखे गये हैं।

पुष्कर द्वीप को घेरे मीठे जल के सागर के पार उससे दूनी सुवर्णमयी भूमि दिल्खायी देती है। वहां दस सहस्र योजन वाले लोक-आलोक पर्वत हैं। यह पर्वत ऊंचाई में भी उतने ही सहस्र योजन है। उसके आगे पृथ्वी को चारों ओर से घेरे हुए घोर अन्धकार छाया हुआ है। यह अन्धकार चारों ओर से ब्रह्माण्ड कटाह से आवृत्त है। (अन्तरिक्ष) अण्ड-कटाह सहित सभी द्वीपों को मिलाकर समस्त भू-मण्डल का परिमाण पचास करोड़ योजन है। (सम्पूर्ण व्यास)

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आधुनिक नामों की दृष्टी से विष्णु पुराण का सन्दर्भ देंखे तो... हमें कई समानताएं सिर्फ विश्व का नक्शा देखने भर से मिल जायेंगी...

१. विष्णु पुराण में पारसीक - ईरान को कहा गया है,
२. गांधार वर्तमान अफगानिस्तान था,
३. महामेरु की सीमा चीन तथा रशिया को घेरे है.
४. निषध को आज अलास्का कहा जाता है.
५. प्लाक्ष्द्वीप को आज यूरोप के नाम से जाना जाता है.
६. हरिवर्ष की सीमा आज के जापान को घेरे थी.
७. उत्तरा कुरव की स्तिथि को देंखे तो ये फ़िनलैंड प्रतीत होता है.

इसी प्रकार विष्णु पुराण को पढ़कर विश्व का एक सनातनी मानचित्र तैयार किया जा सकता है... ये थी हमारे ऋषियों की महानता

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अब एक महत्त्वपूर्ण बात -

महाभारत में पृथ्वी का पूरा मानचित्र हजारों वर्ष पूर्व ही दे दिया गया था।

महाभारत में कहा गया है कि - यह पृथ्वी चन्द्रमंडल में देखने पर दो अंशों मे खरगोश तथा अन्य दो अंशों में पिप्पल (पत्तों) के रुप में दिखायी देती है-

उक्त मानचित्र ११वीं शताब्दी में रामानुजचार्य द्वारा महाभारत के निम्नलिखित श्लोक को पढ्ने के बाद बनाया गया था-

"सुदर्शनं प्रवक्ष्यामि द्वीपं तु कुरुनन्दन।
परिमण्डलो महाराज द्वीपोऽसौ चक्रसंस्थितः॥
यथा हि पुरुषः पश्येदादर्शे मुखमात्मनः।
एवं सुदर्शनद्वीपो दृश्यते चन्द्रमण्डले॥
द्विरंशे पिप्पलस्तत्र द्विरंशे च शशो महान्।

"अर्थात हे कुरुनन्दन ! सुदर्शन नामक यह द्वीप चक्र की भाँति गोलाकार स्थित है, जैसे पुरुष दर्पण में अपना मुख देखता है, उसी प्रकार यह द्वीप चन्द्रमण्डल में दिखायी देता है। इसके दो अंशो मे पिप्पल और दो अंशो मे महान शश(खरगोश) दिखायी देता है।"

अब यदि उपरोक्त संरचना को कागज पर बनाकर व्यवस्थित करे तो हमारी पृथ्वी का मानचित्र बन जाता है, जो हमारी पृथ्वी के वास्तविक मानचित्र से शत प्रतिशत समानता दिखाता है।

पूरा मानचित्र देखने व आकृति को समझने के लिए यहाँ क्लिक करें - http://www.facebook.com/photo.php?fbid=337652073024493&set=pb.100003391094649.-2207520000.1378563340.&type=3&src=http%3A%2F%2Fm.ak.fbcdn.net%2Fsphotos-a.ak%2Fhphotos-ak-ash3%2F922096_337652073024493_417270629_o.jpg&smallsrc=http%3A%2F%2Fm.ak.fbcdn.net%2Fsphotos-a.ak%2Fhphotos-ak-ash3%2F935587_337652073024493_417270629_n.jpg&size=1800%2C1200

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संपूर्ण विष्णु पुराण पढने के लिए यहाँ क्लिक करें - http://www.bharatadesam.com/spiritual/vishnu_purana.php

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गौरवमयी आर्यावर्त को नमन है

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हरि ॐ

मुजफ्फरनगर में जबरदस्त हिंसा

मुजफ्फरनगर में जबरदस्त हिंसा, आईबीएन-७ के पत्रकार समेत ६ की मौत
September 7, 2013    


मुज़फ़्फ़रनगर मे हूए पूरे घटनाक्रम
की जानकारी इस प्रकार है
आज हिन्दू महापंचायत मुज़फ्फरनगर के साठू
नंगला गाँव में होनी तय थी।
पंचायत में मुल्लो का एक मुखबिर
था जो चुपके से मोबाइल से
विडियो बना रहा था हिन्दू के वेश में।
जब लोगों को शक हुआ तो उसको पकड़ कर
पूछा तो उसने बताया नहीं।
उसके गुप्तांग को देखकर जब
पता चला की मुल्ला ह तो उसे पीट
दिया भीड़ ने।
पंचायत से लोटते लोगो के ऊपर गाँव
शाहपुर गढ़ी के मुल्लो ने माकन कीछतों से
तेज़ाब और पत्थर फेंके।
26 लोग घायल हो गये।
फिर अगले गाँव पुर बालियान
की सीमा पर करीब 20000 हिन्दू
भाइयों को मुल्लो के 4 गाँवो ने घेर
लिया और निहत्थे लोगो पर
गोली चला दी।
सवाल यह है कि उनके पास इतना हथियार
कहाँ से आया कि उन्होंने इतने लोगों को घेर
लिया।
16 घायल हुए जिनमे से 9 की तत्कालमौत
हो गयी।
पुलिस और पीएससी मौके से भाग गये।
लोग अभी तक वहीँ फसे हुए हैं।
प्रशासन की और से
किसी कार्यवाही की सूचना नही है अब
तक।
उधर मीरपुर गाँव के मुल्लो ने हिन्दुओं के घर
जला दिये।
और 6 की हत्या कर दी।
मुज़फ्फरनगर शहर में अब तक 43 हिन्दू मारे
जा चुके हैं शाम से Kritika Vyas PaGe (Kritika)
मुजफ्फरनगर :
मुजफ्फरनगर में दोनों समुदायों के पिछले एक सप्ताह से सुलग रही चिंगारी ने आज हिंसा का रूप धारण कर लिया । शहर कोतवाली क्षेत्र के मौहल्ला अबूपुरा में आईबीएन-७ के पत्रकार राजेश वर्मा की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई, जबकि हिंसा में अन्य स्थानों पर भी ५ अन्य लोगों की मौत हो गई । इस साम्प्रदायिक हिंसा में कई अन्य जगह भी लोगों के मरने व भारी मात्रा में घायल होने की सूचना मिल रही है । जनपद में जगह-जगह हो रही हिंसक घटनाओं में जानमाल का काफी नुकसान हो रहा है । जिला प्रशासन ने नगर के तीनों थाना क्षेत्रों में कफ्र्यू लगाने के साथ ही पुलिस व अद्र्धसैनिक बलों की गश्त तेज कर दी है ।
राज्य के पुलिस महानिरीक्षक  (कानून व्यवस्था) राजकुमार विश्वकर्मा ने बताया कि  आज महापंचायत के बाद लौट रहे कुछ लोगों ने  सिखेडा क्षेत्र में एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी । उन्होंने बताया कि इसके बाद मुजफ्फरनगर शहर कोतवाली क्षेत्र के खालापार इलाके में भीड में मौजूद किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा गोली चलाये जाने के कारण वहां कवरेज कर रहे आईबीएन-७ के स्थानीय पत्रकार राजेश वर्मा की मृत्यु हो गयी । श्री विश्वकर्मा ने बताया कि घटना के बाद मुजफ्फरनगर शहर के कोतवाली, सिविल लाइन्स और नई मण्डी कोतवाली क्षेत्रों में बेमियादी कफ्र्यू लगा दिया गया है ।
इस बीच गृह विभाग के प्रवक्ता के अनुसार कवाल गांव की घटना में मारे गये व्यक्ति के परिजनों को जिला प्रशासन ने दो लाख रुपये और गंभीर रुप से घायलों को ३-३  हजार रुपये देने की घोषणा की है । पुलिस प्रवक्ता के अनुसार सिखेडा क्षेत्र के नंगला मदौड गांव में कवाल की घटना को लेकर आज हुई पंचायत में शामिल होने के बाद जब लोग सिखेडा थाने के निकट पहुंचे तो कुछ लोगों ने एक ट्रक चालक की पीट-पीटकर हत्या कर दी ।
उन्होंने बताया कि इसके बाद कुछ असामाजिक तत्वों ने अलमासपुर में मोटरसाइकिल को फूंक दिया । इस घटना के बाद नई मंडी कोतवाली इलाके में कुछ छात्रों के साथ भी मारपीट की गयी ।  प्रवक्ता के अनुसार मुजफ्फरनगर शहर कोतवाली इलाके के मुस्लिम बहुल क्षेत्र के खलापार में भीड की कवरेज करते समय अज्ञात  व्यक्ति द्वारा चलायी गयी गोली से न्यूज चैनल आईबीएन-७ के पत्रकार की मृत्यु हो गयी । घटना के बाद साम्प्रदायिक तनाव हो गया और जिला प्रशासन को शहर कोतवाली समेत तीनों थाना क्षेत्रों में कफ्र्यू लगाना पडा । इसके पहले शाहपुर क्षेत्र के बसी गांव में भी कुछ लोगों ने पंचायत में ट्रैक्टर-ट्राली पर आये लोगों के साथ मारपीट की, जिसमें १६ लोगों के घायल होने की सूचना है ।
गौरतलब है कि कवाल गांव में २७ अगस्त को छेडछाड के आरोपी अल्पसंख्यक वर्ग के युवक की हत्या के बाद उन लोगों ने लडकी के भाई समेत दो युवकों की हत्या कर दी थी । इस घटना के बाद पुलिस पर निर्दोष लोगों के खिलाफ मुकदमें दर्ज करने से नाराज जाट समुदाय के लोग आज सिखेडा क्षेत्र के नंगला मदोडा में पंचायत कर रहे थे । कवाल घटना के बाद जिले में साम्प्रदायिक तनाव था और पुलिस के बडे अधिकारी कई दिन से यहां कैम्प कर रहे हैं ।

मुजफ्फर नगर में कहाँ से आये आठ से दस हाजार बांग्लादेशी ???? .

. मुजफ्फर नगर के मुसलमान घरो में दुबके रहे लेकिन अचानक कंही से बांग्लादेशी दिखने वाले मुल्ले आठ से दस हज़ार की संख्या में आये और घात लगा कर पंचायत से लौट रहे हिन्दुओं पर हमला कर दिया ..

खबर है कि ये काम आजम खान के इशारे पर अखिलेश सरकार ने कराया है
स्त्रोत : एनसीआर खबर
आज हुई योजनाबद्धहिंसा में बड़ी संख्या में हिन्दुओं का नरसंहार किया गया है... एक कम से कम अनुमान के तहत 300 से अधिक हिन्दुओं की नृशंस हत्या की जा चुकी है ।
आज महापंचायत का आयोजन किया गया था, अधिकतर गांवों से लोग महापंचायत में भाग लेने पहुंचे थे ।
मंसूरपुर थाना क्षेत्र में शांतिदूत मुसलमानों ने आज योजनाबद्ध रूप से उन गाँवों के हिन्दुओं को घेरकर हमला किया जिन गाँवों के अधिकतर लोग आज महापंचायत में भाग लेने गये थे ।
सबसे अधिक जो हत्याएं हुई हैं वो पुर-बालियान गाँव में हुई है ।
इलाके में कई मुसलमान पुलिस की वर्दी में ही घूम रहे हैं जो यह दर्शाता है कि प्रशासन द्वारा मुसलमानों की नियुक्ति अधिक रूप से की गई उसका उद्देश्य क्या था ?
हमला करने वाले मुसलमानों के पास एके-47 भी थी और कई ऐसे हथियार जो कोई आम आदमी खरीद नहीं सकता... साफ है की इस नर संहार मे सरकार की बड़ीभूमिका थी
पुलिस प्रमुख अब्दुल हमीद, राणा स्टील के मालिक कादिर राणा, जाकिरराणा, तथा आजम खान इन दंगों और इन हत्याओं के पूरे पूरे उत्तरदायी सिद्ध हो चुके हैं ।

शुक्रवार, सितंबर 06, 2013

नित्यानंद स्वामी के मामले का फैसला आया तो मीडिया को सांप सूंघ गया

नित्यानंद स्वामी पर जब आरोप लगे थे तो मीडिया नें आसाराम बापू पर लगे आरोपों की तरह ही आसमान सर पर उठाया था लेकिन जब नित्यानंद स्वामी के मामले का फैसला आया तो मीडिया को सांप सूंघ गया और किसी नें दिखाना जरुरी नहीं समझा ! मीडिया हिंदू संतों को केवल बद्न्नाम करना चाहती है !
  http://www.daijiworld.com/news/news_disp.asp?n_id=123627   उन मित्रो के लिए जिन को हर खबर का पेड मीडिया से लिंक चाहिए

Click on images to read Clearly......

"सोना हमारे देश से बाहर जा रहा है



यह जो सोना हमारे देश से बाहर जा रहा है यह हमारे देशवाशियो ओर मंदिरो से एकत्रित किया गया सोना है जो हमारे देश के बुरे वक्त के लिये एकत्रित के किया गया था ...

लोग कहते है की मंदिरो मे सोने का क्या काम ..? सारा सोना पण्डित ही हड़प लेंगे ... तो मूर्खो अगर उनको हडपना ही होता तो कब का हड़प चुके होते ओर इस सोने को कभी इकट्ठा ही ना होने देते .... यह कभी खजाने का रूप ले ही नही पाता ....


फिर लोग कहने लगते है की सोना है तो उसे इस्तेमाल करो ना अगर इस्तेमाल नही किया तो क्या फायदा इस सोने का ...? तो मूर्खो कुछ ''सेफ रेजर्व'' का नाम भी सुना है कभी ... अपने बुरे वक्त के लिये तो चिटी भी खाना जोड़ कर रखती है तुम तो फिर भी इंसान हो ... अर्थशास्त्र का ज्ञान का चिटी से भी कम है ...?

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अब आते है सोनिया के अर्थशास्त्र पर इनका कहना है की जब सरकार नितिया बनती है तो सबको बजट देना पड़ता है इसलिये यह सब गड़बड़ा गया है ... तो इन महामूर्खो से पूछो की जब इनके पास पैसा नही था तो क्या जरूरत थी अफ़ग़ानिस्तान ओर पाकिस्तान को 100 मिलियन डालर दान करने की ...??

ओर जब सरकार को यह ही नही पता की बजट बनाते समय कितना बजट किस को पास करे ओर कितना आयत किया जाये कि हमारी अर्थव्यवस्था को कोई खतरा ना हो , तो यह सरकार किस काम की ...??

जिस सरकार को मांग ओर पूर्ति के सिद्धांत का ही ज्ञान नही तो क्या गारण्टी की यह जो सोना गिरवी रखा जा रहा है उसको वो कभी वापस भी ला पायेगी ...

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ओर अब जानिये असल बात की क्यू यह सोना गिरवी रखा जा रहा है ..भारत के फाइनान्स मिनिस्टर को अमेरिका के फेडरल रिजर्व और रोथ चाइल्ड ने खरीद लिया है ये रहा इसका सबूत ..अमेरिका के फेड रिजर्व में सोना का भण्डार खाली हो गया है ! अमेरिका का दिवाला निकल चुका है और जर्मनी फ़्रांस अदि यूरोपियन देश अमेरिका से सोना वापस मांग रहे है !

चाइना ने अमेरिका द्वारा दिया गया सोने से भरा हुआ जहा ज वापिस कर दिया है,क्योकि अमेरिका ने नकली सोना भेजा था ..टंगस्टन धातु पर सोने की परत चढा हुआ (गूगलकीजिये)

और अमेरिका के फेडरल रिजर्व में सोने की की पूर्ती के लिए भारत का फाइनान्स मिनिस्टर भारत में सोने पर टैक्स बढ़ा रहा है !

आम जनता को सोना खरीदने से दूररहने की सलाह दे रहा है ,और भारत में शुद्ध (बिस्कुट) सोना खरीदने पर रोक !

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अब बात आती है सोना वापसी की तो क्या आपको पता है की हमारे देश के म्यूजियम से सारी ओरिजनल वस्तुये गायब हो चुकी है ओर उनकी जगह ड्यूप्लिकेट वस्तुये रख दी गयी है ओर सारी ओरिजनल वस्तुये सोनिया की बहन के म्यूजियम मे पहुचा दी गयी है जो इटली मे है ... जब हमारे देश के म्यूजियम मे सारी चीज़े ही नकली है तो सोना असली लोटाया जायेगा ... यह सोचना भी मूर्खता होगी ...

अब जिस तरह भगत सिंह ने आने देश का सोना काकोरी काण्ड मे लुटने से बचाया था उसी तरह आज हमको भी लुटने से बचाना है ... वर्ना पाकिस्तान के लिये तिरपाल का खर्चा तो हमने उठा लिया था पर अब हमारे लिये पानी का खर्चा भी कोई उठाने के लिये आने वाला नही है ....

हमारी सोने की चिड़िया के प्राण तो पहले ही निकल दिये गये है अब उसकी अस्थियो को भी गिरवी रखा जा रहा है .... थू है ऐसे लोगो पर ...

बुधवार, सितंबर 04, 2013

आशाराम ::इसके पीछे दुश्मनी नहीं बल्कि अर्थशास्त्र है

यदि आप आशाराम बापू, बाबा रामदेव, श्री श्री रविशंकर, श्री जयेंद्र सरस्वती, गुरमीत राम रहीम आदि संतों को (जी हाँ मैं उन्हें अब भी संत कह रहा हूँ) झूठा, दुराचारी और ठग मानते हैं तो आपसे अनुरोध है की थोडा समय देकर यह पोस्ट अवश्य पढ़ें ....

बहुत दिनों से मीडिया में संत आशाराम के खिलाफ एक बवाला मचा हुआ है, पूरा मीडिया हाथ धो कर आशाराम के पीछे ऐसे पड़ गया है जैसे पूरे देश में वही एक पापी बचे हो और यह देश की इकलोती समस्या हो ......

कई लोग बिना कुछ सोचे समझे इस बाजारू मीडिया की बातों में आकर बिना सत्य की पड़ताल किये तथा बिना आशाराम बापू का पक्ष सुने उन्हें कोस रहे क्योंकि उन्हें लग रहा है जब इतने लोग उनके खिलाफ बोल रहे हैं तो सही ही होगा ......

यदि आप भी उन लोगों में से हैं तो यह जान लीजिये की आप पूर्णतया गलत हैं ....
आइये जानते हैं कैसे ....

जब भी मीडिया आश्रम व आदि संतों के खिलाफ दुष्प्रचार करता है तो हमारे द्वारा कहा जाता है की यह संतों के खिलाफ एक सोच समझा षड्यंत्र है .....अब आप कहेंगे की मीडिया को क्या पड़ी है जो केवल इन संतों के खिलाफ दुष्प्रचार करेगा ?

तो उसका उत्तर है की यह मीडिया वास्तविक देशहित में कार्य करने वाला मीडिया नहीं बल्कि यह बाजारू मीडिया है जिनके मालिको का सीधा सम्बन्ध उन बड़ी बड़ी विदेशी कम्पनियों से हैं जिनका माल आप खरीदते हो तो उन्हें मुनाफा होता है l

यदि विज्ञापनों से होने वाली आय को ना गिनें तो इन कम्पनियों के खुद के न्यूज़ चैनल हैं तथा ये देश के मुख्य अखबारों को सस्ता न्यूज़प्रिंट देती हैं l जिस कारण यह मीडिया इनका मुखपत्र बन कर रह गया है l

अब आप सोचते होंगे, चलो ये सब तो ठीक है मान लिया मीडिया विदेशी कम्पनियों द्वारा चालित है ......पर इससे आशाराम तो निर्दोष साबित नहीं होते ..... इन विदेशी कम्पनियों को आशाराम को बदनाम करने की क्या पड़ी है ?? क्या उनकी आशाराम से निजी दुश्मनी है ??

इसका उत्तर है की 'इसके पीछे दुश्मनी नहीं बल्कि अर्थशास्त्र है' ...आइये जानते हैं कैसे ....

मान लीजिये आशाराम बापू का एक अनुयायी हैं जो उनके बताये रस्ते पर चलते हुए...
शराब,सिगरेट,चाय, गुटखा, तम्बाकू का सेवन नहीं करता .....
विदेशी कम्पनियों द्वारा बनाये गए उत्पाद नहीं खरीदता ......
ब्रहमचर्य ला पालन करते हुए संयम बरतता हैं .....

तो इन कपनियों का इससे हर वर्ष हजारों करोड़ का नुक्सान होता है.....

आप कहेंगे ये क्या बकवास है ? इन सबसे इन कम्पनियों का नुक्सान कैसे होता है .....??

वो ऐसे की मान लीजिये वो यदि एक व्यक्ति महीने में इन सब चीज़ों का सेवन/उपयोग करता है तो उसका इन चीज़ों पर महीने भर का खर्च कम से कम 1000 रुपये (खर्चा निशित रूप से कई ज्यादा होता है) होगा और यदि आशाराम बापू के लगभग पूरे देश में 1 करोड़ अनुयायी हैं तो यह संख्या 1 हज़ार करोड़ हो जाती है l

तो यदि केवल 1 महीने इन कम्पनियों का 1000 करोड़ का नुक्सान होता है तो साल भर का नुक्सान 12000 करोड़ हुआ l

अब आप ही बताइए जब अकेले आशाराम बापू की वजह से इन कम्पनियों को सालाना 12 हज़ार करोड़ का नुक्सान हो रहा है तो यदि बाकि सभी संतों के अनुयाइयों की संख्या को इसमें जोड़ दी जाये तो यह आंकड़ा लाखों करोड़ में जाएगा l

तो जिनकी वजह से इन कम्पनियों को सालाना लाखों करोड़ का घाटा हो रहा हो जनता पर से उसका विश्वास हटाने के लिए क्या ये कम्पनियां आशाराम बापू व अन्य संतों को क्यों बदनाम नहीं कर सकती ? वो तो ज़रूर करेंगी .....

यह तो केवल आर्थिक कारण था इसके अलावा एक और कारण यह है की आशाराम बापू मिशनरियों द्वारा किये जा रहे धर्मांतरण में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं .........कई दलित व आदिवासी बच्चों को आशाराम बापू ने इसाई बनने से रोका है जिसका रोष मिशनरियों के मन में अब तक है ......
जब भी कोई संत भारतीय संस्कृति का प्रचार करता है अनुयाइयों के मन में एक गर्व उत्पन्न होता है और जिसके हृदय में संस्कृति और धर्म के प्रति यह गर्व उत्पन्न हो जाता उसका धर्मान्तरण करना लगभग असंभव हो जाता है ....

पर अब भी आपका मन इसे षड्यंत्र नहीं मान रहा होगा और यह सवाल मन में बार बार आ रहा होगा की कोई लड़की किसी पर ऐसा आरोप लगाकर स्वयं के साथ उस व्यक्ति को भी बदनाम क्यों करवाएगी ?

इसका उत्तर है की इस देश में बिकाऊ लोगों की कोई कमी नहीं है जिन्हें आसानी से खरीदा जा सकता है.....जिसके कारण इन विदेशी कम्पनियों को लाखों करोड़ का घाटा उठाना पड़ रहा हो उसे अपने रस्ते से हटाने के लिए क्या यह कम्पनियां कुछ करोड़ रुपये खर्च नहीं कर सकती ??

अतः इस लेख द्वारा हम आपको साफ़ कर देना चाहते हैं की यह केस मात्र आशाराम बापू को बदनाम करने के मकसद से किया गया है, इस केस में आशाराम बापू के खिलाफ कोई सबूत नहीं है तथा इसे केवल मीडिया ने चडाया हुआ है जिस कारण आशाराम बापू के बरी होने की पूरी पूरी सम्भावना है .....

हम आपको यह भी साफ़ कर देना चाहते हैं की हममें से कोई केवल आशाराम बापू का अनुयायी नहीं बल्कि हम सब पूरे संत समाज के अनुयायी हैं जिनकी वजह से हम अपनी लाखों वर्षों पुरानी महान संस्कृति को जान पाए ......इसीलिए हम सदा उनके साथ थे, हैं और सदा रहेंगे l

वन्दे मातरम् , भारत माता की जय


बिना किसी सबूत के आसाराम को भयंकर रूप से बदनाम कर चुके हैं मीडिया वाले....
सिर्फ इलेक्ट्रोनिक मीडिया ही नहीं बल्कि मे प्रिंट मीडिया ने भी तथाकथित वीडियो क्लिपिंग के नाम पर खूब बदनाम करने की कौशिश की।
आज जोधपुर पुलिस उपायुक्त अजय लांबा ने स्पष्ट किया की ऐसी कोई सीडी या विडियो क्लिपिंग नहीं मिली है।
मीडिया को इस हरकत की सजा अवश्य मिलनी चाहिए ...