शुक्रवार, जून 01, 2018

मोदी से हिन्दुओ को शिकायत

कैराना को #हिंदुओं की हार बताने वालों जरा मेरी भी सुनते जाना।
ये 2014 के बाद हिंदुओं की पहली हार नही थी।
1. पहली हार तब हुई जब #गौ -सेवकों और रक्षकों को गुंडा बोला और उनपर कार्यवाई की गई सरकार की ओर से
2. दूसरी हार तब जब राम मंदिर का तिरपाल बदलवाने की जगह #अजमेर_शरीफ में चादर चढ़ाई गई
3. तीसरी हार तब जब देश का सच्चा आदर्श #मुहम्मद को बताया गया
4. चौथी हार तब जब किसानों को # गालियाँ और
# गोलियाँ दी गयी
5. पांचवी हार तब जब #रामलला को गाली देने वाले को पार्टी में शामिल करवाया गया
6. छठी हार तब जब आपने #महबूबा के साथ मिलकर सरकार बनाई #कश्मीर में
7. सातवी हार तब जब #आसिफा कांड में हिंदुओं को फसाया गया और आप चुप रहे
8. आठवीं हार तब जब #गोआ में #गौमांश की बिक्री पर छूट दी आपने
9. नौवीं हार तब जब आप सारे #मस्जिद और # दरगाह घूमते रहे मगर 4 साल में एक बार भी #राम_मंदिर नही गए दर्शन के लिए भी
10. दसवीं हार तब हुई जब # लालकिला , #एयर_इंडिया ,
# रेलवे_स्टेशन आदि बेच दिए
11. ग्यारहवीं हार तब हुई जब आपने #रमजान में #सीजफायर का आदेश दिया
12. बारहवीं हार तब मिली जब आपको
# उज्ज्वला_योजना की प्रेरणा किसी #हामिद से मिली न कि किसी #हरि_राम से
13. तेरहवीं हार तब मिली जब आपने # अपनी_हार का ठीकरा हमेशा #हिंदुओं के सर फोड़ा
14. चौदवीं हार #धारा_370 के न हटने पर हुई
15. पंद्रहवीं हार #कॉमन_सिविल_कोड के न आने पर हुई
16. सोलहवीं हार जब #राजस्थान #मध्यप्रदेश #बनारस , #महाराष्ट्र में मंदिर तोड़े गए
17. सत्रहवीं हार जब इस देश मे #भीम_आर्मी ने सवर्णों को मारा और आप चूप्पी साधे रहे
18. अठारहवीं हार सवर्णों के आंदोलन को आपने बल पूर्वक दबाया
19. उन्नीसवीं हार जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद आपने SC-ST कानून को बदलने से मना कर दिया
20. बीसवीं हार तब मिली जब आपने #इफ्तारी देनी शुरू की, हज के नियम बदल दिए
नोट :- और भी है परंतु अब लिखने में उंगलियाँ दर्द हो रही है
आपने हिंदुओं को इतने घाव दिए और जब हिंदुओं ने सवाल पूछ लिया तो आप तिलमिला उठे ।।

बैंकर माफिया और अनार्थशास्त्र

दिनेश कुमार प्रजापति
अगर आप पूरी सच्चाई जानना चाहते तो पूरी कहानी पढे ।
(१) भूतकाल
कहानी शुरू होती है कई सालो पहले जब सोने और चाँदी के सिक्के चलते थे। तक बैंकिंग सिस्टम नही था। सिर्फ अर्थ-शास्त्र था। आज अर्थ-शास्त्र को बैंकिंग सिस्टम और शेयर बाजार ने पूरी तरह से हथिया लिया है। ये सब कैसे हुआ ये जानते है।
पहले सोने और चाँदी के सिक्के चलने लगे। जब सोने और चाँदी के सिक्के चलते थे तब बैंकर लोगो ने योजना बनाई और इस योजना के चलते उन्होने लोगो से बोला की आप अपना सोना चाँदी हमारे पास रखो हम उसकी हिफाजत करेंगे। जब भी कोई सोना चाँदी बैंकर के पास रखता तो उसको रसीद के तौर पर एक "पेपर रसीद" मिल जाती थी। ये पेपर रसीद ही शुरूआती पेपर नोट थे। बैंकर लोगो को रसीद बनाना आसान था बजाय कि सोना खोदने की और लोगो को भी इन कागज के नोट को मार्केट में उपयोग करना आसान था।
तब जितना सोना होता था उतनी ही रसीद होती थी।
फिर बैंकर लोगो को अर्थव्यवस्था में कब्जा जमाने को पहला कदम मिला, उन लोगो ने उधार देना चालू कर दिया। जो लोग बचत करते थे उसी सोने में से ही किसी दूसरे को उधार (लोन) मिलता था। इस तरह बैंकर लोगो को पहली बार इतिहास में अर्थशास्त्र को अपनी मर्जी से मोडने का पहला प्रावधान मिला। क्योंकी वो उधार दे सकते थे इसका सबके बडा फायदा अमीर और बहुत अमीर लोगो को हुआ क्योंकी अमीरो को बडी पूँजी आसानी से मिल गई जिससे उन्होने बडे बडे कारखाने लगाये और वो अमीर होते चले गये क्योंकि पैसे से पैसे बनाना बहुत आसान होता है। गरीब को भी लोन मिलता था उससे कोई फायदा नही था ग़रीबों को।
चलो चलते है दूसरे कदम पर जिससे बैंकर लोगो ने अर्थव्यवस्था पर पूरी तरह से कब्जा जमाने के चाल चली
एक दिन बैंकर को लालच आया और ये सोचा की वो उतना ही उधार दे सकता है जितना कि उसके पास सोना होता है। अगर ऐसा हो जाये की वो उस सोने के नाम की नोट देना चालू कर दे जो उसकी तिजोरी में है ही नही तो कैसे रहेगा। ये था दूसरा प्रावधान जिससे काफी सारी ऐसी बैंक नोट बनाये गये जिसके समानांतर कोई सोना था ही नही ।
लोगो को इस लूट के बारे में पता ही नही चल पाया क्योंकी लोग अब सोने के सिक्को में लेनदेन करते ही नही थे, वो तो कागज के नोट से ही लेनदेन करते थे। और सारे लोग एक साथ मिलकर अपना सोना बैंक से निकलवाते नही थे। मान लो अगर सारे लोग अपना सोना बैंक से निकलवाने पहुँच जाये तो बैंक तो लुट जायेगी क्योंकी उसने जितने नोट (रसीद ) बाँट रखी है उतना सोना तो है ही नही बैंक में।
इस दूसरे कदम के चलते दुनिया के अमीर लोग महाअमीर हो गये क्योंकि अब वो बैंक में रखे सोने के बराबर लोन लेने तक सीमित नही थे, बैंक असली सोने से कई गुणा ज्यादा की रसीदे (नोट) देकर इन अमीर को बडे बडे लोन सस्ती ब्याज दरों पर देती थी । इस पैसे से इन अमीरों ने बडे बडे कारखाने लगाये।
इसके कारण गरीब और ज्यादा गरीब हो गया। कैसे ? अरे भाई मान लो १०० लोग है हर एक के पास १ किलो सोना है। पूरी अर्थव्य्वस्था है १०० किलो सोने की और हर एक बंदे का मार्केट में रूतबा १% का है। अब बैंकर लोगो ने ५०० किलो की रसीद बना दी है और ४०० किलो की रसीद २ अमीर लोगो को दे दी । इस कारण से ९८ गरीब लोगो के पास ९८ किलो सोना है और बाकी २ अमीर लोगो से पास ४०२ किलो सोना । यानी जिस आदमी में का रूतबा १% का था वो अब 0.2% हो गया । यानी बिना किसी मेहनत से बैंक की कृपा से 2 अमीर बंदे 1% के ४०.२% पहुँच गये (४० गुणा बडत) और ९८ गरीब बंदे १% से ०.२% पर लुडक गये (५ गुणा निचे) ।
जो गरीब और अमीर के बीच खाई है उसका मुख्य कारण बैंकिंग सिस्टम ही है।
इन दोनो कदमों के बाद बडते है तीसरे कदम की ओर ।
तीसरे कदम में ये हुआ की सरकार ने पुराने बैंक खतम कर दिये और सोने चाँदी के सिक्को की जगह पेपर नोट (कागज के नोट) को ही मुख्य करंसी मान लिया । नये बैंक बने जो इस पेपर नोट को रखते थे।
फिर पेपर नोट चलने लगे । जब पेपर नोट थे तब बैंकर लोगो ने योजना बनाई और इस योजना के चलते उन्होने लोगो से बोला की आप अपना पेपर नोट हमारे पास रखो हम उसकी हिफाजत करेंगे । जब भी कोई पेपर नोट बैंकर के पास रखता तो उसको रसीद के तौर पर एक "बैंक पासबुक, चेक और एटीम कार्ड" मिल जाती था । ये रसीद ही शुरूआती "बैंक मनी" थे।
बैंकर लोगो को “बैंक पासबुक, चेक और एटीम कार्ड” बनाना आसान था बजाय कि नोट छापने की और लोगो को भी इन "बैंक पासबुक, चेक और एटीम कार्ड" को मार्केट में उपयोग करना आसान था। तब जितना "पेपर मनी" होता था उतनी ही "बैंक मनी" (यानी डीजीटल मनी) होती थी ।
फिर बैंकर लोगो को अर्थव्यवस्था में कब्जा जमाने को चौथा कदम मिला, उन लोगो ने उधार देना चालू कर दिया ।
जो लोग बचत करते थे उसी पैसे में से ही किसी दूसरे को उधार (लोन) मिलता था । इस तरह बैंकर लोगो को फिर से अर्थशास्त्र को अपनी मर्जी से मोडने का प्रावधान मिला । क्योंकी वो उधार दे सकते थे इसका सबके बडा फायदा अमीर और बहुत अमीर लोगो को हुआ क्योंकी अमीरो को बडी पूँजी आसानी से मिल गई जिससे उन्होने बडे बडे कारखाने लगाये और वो अमीर होते चले गये क्योंकि पैसे से पैसे बनाना बहुत आसान होता है । गरीब को भी लोन मिलता था उससे कोई फायदा नही था गरीबो को।
चलो चलते है पाँचवे कदम पर जिससे बैंकर लोगो ने अर्थव्यवस्था पर पूरी तरह से कब्जा जमाने के चाल चली
एक दिन बैंकर को लालच आया और ये सोचा की वो उतना ही उधार दे सकता है जितना कि उसके पास पेपर नोट होता है । अगर ऐसा हो जाये की वो उस रूपये के नाम की “डीजिटल मनी (चेक, लोन)” देना चालू कर दे जो उसकी तिजोरी में है ही नही तो कैसे रहेगा। ये था पाँचवा कदम जिससे काफी सारी ऐसी बैंक मनी बनाये गये जिसके समानांतर कोई रूपया था ही नही।
लोगो को इस लूट के बारे में पता ही नही चल पाया क्योंकी लोग अब पेपर नोट में लेनदेन करते ही नही थे , वो तो “चेक, डेबिट कार्ड , क्रेडिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिग” से ही लेनदेन करते थे । और सारे लोग एक साथ मिलकर अपना नोट बैंक से निकलवाते नही थे। मान लो अगर सारे लोग अपना पैसा बैंक से निकलवाने पहुँच जाये तो बैंक तो लुट जायेगी क्योंकी उसने जितने डिजीटल मनी बाँट रखी है उतने कागज के नोट तो है ही नही बैंक में।
(२) वर्तमान
आज दिल्ली जैसे महानगरो में रहने वाले लोगो की सेलेरी एटीएम कार्ड के अंदर आती है और कार्ड से ही खर्च हो जाती है । दिल्ली वालो को बस सब्जी और आटो वाले के लिये ही पेपर नोट की जरूरत पडती है ।
इस पाँचवे कदम के के चलते दुनिया के महाअमीर लोग और भी महामहाअमीर हो गये क्योंकि अब वो बैंक में रखे नोट के बराबर लोन लेने तक सीमित नही थे, बैंक इनको असली नोट से कई गुणा ज्यादा की बैंक मनी देकर इन अमीर को बडे बडे लोन सस्ती ब्याज दरों पर देने लगी । इस पैसे से इन अमीरों ने बडे बडे कारखाने लगाये ।
इसके कारण गरीब और गरीब हो गया। कैसे ? वो तो उपर बताया ही है । जो गरीब और अमीर के बीच खाई है उसका मुख्य कारण बैंकिंग सिस्टम ही है।
अब चलते है हमारे असली सवाल की ओर।
पहली ग़लतफ़हमी ये की बैंक आपका उधार में असली रूपया पैसा दे रहा है ।
दूसरी ग़लतफ़हमी ये की बैंक किसी दूसरे बंदे का पैसा आपको उधार या लोन दे रहा है । किसी दूसरे के पास ज्यादा पैसे थे उसने सोचा कि बैंक में रख देता हूँ ताकी थोडा बहुत ब्याज मिल जाये । और वो पैसे आपको लोन या उधार में मिल गये ।
तीसरी ग़लतफ़हमी ये है कि बैंक अपनी मेहनत की कमाई में से कुछ पैसा आपको उधार देता है।
ये तीनो बाते गलत है, मै बताता हूँ की असलीयत में क्या होता है। माना आपको २००० रूपये के केमरे की जरूरत है और आप किसी शोप पर क़ेडिट कार्ड उपयोग करते हो तो बैंक आपको कोई असली रूपया नही देता है । वो आपके खाते में लिख देगा -२००० (माइनस २ हजार) और दुकान वाले के खाते में लिख देगा +२००० ! चाहे आप लोन लो या किसी भी प्रकार का उधार, बैंक वाले आपको असली के नोट नही देते है वो आपको डीजीटल मनी देते है जिसका कोई अस्तित्व ही नही है।
आज हमारी अर्थव्यवस्था में ५% केश है और बाकी ९५% डीजीटल मनी है जो की हमारे बैंको ने मनमाने तरीके से मार्केट मे डाली है । ये सारा पैसा कंपुटर में ही अस्तित्व रखाता है । हमको पैसा कमाने में बहुत मेहनत लगती है लेकिन बैंक वाले बटन दबा कर मनचाही ”बैंक मनी” अमीर लोगो को धंधे खोलने के नाम पर दे देती है जिसको हमे वापस कमाने के लिये इन कंपनीयों के अंदर काम करना पडता है ।
आपको जानकर आश्चर्य होगा की ये सब एक प्रणाली के अंतर्गत होता है जिसको नाम दिया गया है - ”Fractional Reserve System” !
(४) Fractional Reserve System
दुनिया के सारे देशो में एक केंद्रिय बैंक होता है । जैसे युके में बैंक ओफ इंग्लैंड है, भारत में आरबीआई है अमेरीका में फेड है ।
ये केंद्रीय बैंक अपने अधीन बैंको के साथ ही Fractional Reserve System को चलाते है ।
हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते है पर बैंकिंग सिस्टम और उसकी प्रणाली में कोई लोकतंत्र नही है । FRS में जो भी नया पैसा बैंक पैदा करती है वो सारा पैसा उधार के रूप में पैदा होता है और उधार चुकाने पर खतम हो जाता है ।
FRS को समझना बहुत आसान है । मान लो रामू ने १०० रूपये (पेपर नोट) बैंक ने जमा किये । तो बैंक उसमें से ५ रूपये रख लेती है बाकी ९५ (डीजीटल मनी) वो किसी को लोन वो श्यामू को देती है । श्यामू इस लोन से मीरा से सामान लेता है, मीरा बैंक में ही ९५ लाकर जमा कर देती है ।
मीरा ने जो पैसे बैंक में डाले वो बैंक के ही थे जिसे हम बैंक मनी बोलते है, दिक्कत यहाँ से चालू होती है जब बैंक इस ९५ को भी नई जमा पूँजी मान लेती है और फिर से इसे लोन के लिये आगे कर देती है । इस बार बैंक ९५ में से ४.२५ अपने पास रख लेती है और बाकी के ९०.७५ रूपये फिर से लोन देती है । इस प्रकार बैंक ने दो बार लोन देकर १०० रूपये के १०० + ९५ + ९०.७५ = २८५.७५ रूपये दिखा दिये । बार बार इसी चक्र को बरा बार चलाया जाये तो होते है २००० रूपये ।
इस प्रकार जब भी बैक में १०० असली पैसा जमा होने पर बैंक २००० रूपया बना देती है । १९०० रूपया उधार के रूप में बनाया गया है । ये १९०० रूपया डीजीटल मनी है जो बैंक अपनी मनमानी तरीके से बाँटती है ।
भारत की सारी जनता उधार को कभी भी नही चुका सकती क्योंकी उधार ब्याज के साथ चुकाना पडता है और सारी जनता को ब्याज के साथ चुकाने के लिये जितनी डिजिटल मनी है उससे ज्यादा मनी लानी पडेगी । फिर से नई मनी (रूपया) बनाना पडेगा । बैंक नया रूपया उधार के रूप में ही बनाता है तो ये कभी उधार चुकने वाला नही है ।
आसानी से समझने के लिये पूरी दुनिया को एक गाँव मान ले, और सोने के सिक्को को रूपया । अब मान लो पूरी दुनिया का सोना १०० किलो ही है जो सारा का सारा उधार के रूप में बँट गया तो पूरी जनता को ११० किलो सोना लौटाना पडेगा जो की संभव ही नही है ।
जैसा की मैने बताया की जब भी बैंक नया लोन देती है वो डीजीटल मनी के रूप में नया पैसा पैदा करता है, इसके अलावा एक सच ये भी है की जब लोन चुकाया जाता है तो पैदा अर्थव्यवस्था से खतम भी होता है । अगर भारत की जनता किसी जादू से लोन चुका दे तो भारत की ९५% पूँजी खतम हो जायेगी ।
इसी बैंकींग सिस्टम ने ही अमीरो को महाअमीर और गरीबो को महागरीब बना दिया है । बडे हुये हाउसिंग प्राईज का जिम्मेदार भी यही सिस्टम है ।
(३) भविष्य
अब धीरे धीरे हमारा सिस्टम आखरी और छटे कदम की ओर जा रहा है । इस सिस्टम में जिस तरीके से सोने चाँदी के सिक्के गायब कर दिये गये उसी तरीके से पेपर नोट भी गायब कर दिये जायेंगे । हमें एक केशलेश (cashless) समाज की ओर धकेला जा रहा है । जहाँ पर अमीरो और गरीबो के बीच की खाई कभी नही भर पायेगी । सारी अर्थव्यवस्था की नकेल बैंकर माफीया लोग के साथ में आयेगी ।
यह मेरा पहला लेख है, भाषा को बहुत ज्यादा आसान बनाने की कोशिश की गई है । इस विषय पर मैं लगातार शोध कर रहा हूँ हो सकता है मेरी कोई बात थोडी सी गलत हो लेकिन मोटा मोटा आप ये मान ले की बैंकिंग सिस्टम को बैंकर माफिया चला रहे है ।
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1797037107019169&id=100001386907823&refid=7&ref=opera_speed_dial&_ft_=qid.6561983054691469610%3Amf_story_key.-9130214540688122383%3Atop_level_post_id.1797037107019169%3Asrc.22&__tn__=%2As-R

गुरुवार, मई 31, 2018

पशु बचाओ देश बचाओ

1959 की क्यूबा की कम्युनिस्ट क्रांति से पूर्व क्यूबा अमेरिका को बीफ निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश था। हालत ये हो गई थी कि क्यूबा में दुधारू पशुओं खास कर गायों की भारी कमी हो गई थी। कामरेड फिडेल कास्त्रो ने सत्ता सम्हालते ही गोवध पर रोक लगा दी और दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान किया जो अभी भी लागू है। क्यूबा ने गायों की कमी दूर करने के लिए भारत और कनाडा से गायें मंगवाई और भारी पैमाने पर डेरी फार्मिंग शुरू की। सप्ताह में कभी तीन से चार दिन मांस खाने वाले क्यूबाई लोग शाकाहारी बन गये। आज पशुपालन और कृषि क्यूबा की आय का मुख्य आधार है। भारत में बेहिसाब गोवंश और दुधारू पशुओं के वध का सिलसिला जो चल पड़ा है वो एक दिन क्यूबा में जो स्थिथि 1959 से पूर्व थी वेसी हो जाएगी। हो क्या जाएगी हो गई है। आज पशुओं की कमी के कारण रासायनिक खाद का प्रयोग होने लगा है जो बिमारियों की जड़ बन चुकी है। सिंथेटिक दूध बिक रहा है। सोयाबीन का दूध और दही बिक रहा है। गाँवों में कभी एक किसान के घर में पशुओं का रेवड होता था वहां अब गिनती के पशु रह गये हैं। ट्रेक्टर ने बेलों को खत्म कर दिया और आयातित पाउडर के पोलिपेक और डिब्बा बंद दूध ने गाय भेंस और बकरी को। अगर समय रहते नहीं चेते तो बहुत बुरे दिन आने वाले हैं। बच्चे दूध क्या होता है भूल जायेंगे। पशु बचाओ देश बचाओ।

शनिवार, मई 26, 2018

रेडक्लिफ के किस्से भारत और पाकिस्तान

ML Gurjar Lachipura ‘पाकिस्तान को लाहौर इसलिए दे दिया ताकि उनके पास कोई तो ढंग का शहर हो' ''मैंने तो लाहौर भारत को दे दिया था, लेकिन तभी मुझे अहसास हुआ कि पाकिस्तान के पास कोई बड़ा शहर नहीं है। मैं कलकत्ता पहले ही भारत को दे चुका था। मुझे लाहौर पाकिस्तान को देना पड़ा।''ये कहना था भारत-पाकिस्तान के बीच बंटवारे की लाइन खींचने वाले सिरील रेडक्लिफ का। लॉर्ड माउंटबेटन ने रेडक्लिफ को बाउंड्री कमीशन का चेयरमैन बनाया था। उन पर ही सीमा रेखा खींचने की पूरी जिम्मेदारी थी। रेडक्लिफ ने लाहौर के किस्से के बारे में एक इंटरव्यू में इसका जिक्र किया था। बंटवारे के ऐसे ही कई किस्से हैं, जो हम यहां बताने जा रहे हैं। # किस्सा नं.

 1 पाकिस्तान को एक बड़ा शहर देना था इसलिए लाहौर दे दिया लाहौर को पाकिस्तान में देने का किस्सा भी बहुत दिलचस्प है। लाहौर में हिंदू और सिख कम्युनिटी के लोग और उनकी प्रॉपर्टी ज्यादा संख्या में थी। इसके बावजूद ये शहर पाक को सिर्फ इसलिए दे दिया गया, क्योंकि उसके पास कोई बड़ा शहर नहीं था। भारत में बंटवारे की लकीर खींचने वाले रेडक्लिफ ने अपने एक इंटरव्यू में ये बात बताई थी। उन्होंने कहा था कि उनके पास इसके सिवा कोई विकल्प ही नहीं था। 'पाकिस्तानियों को शुक्रगुजार होना चाहिए' मुस्लिमों से भेदभाव के आरोप पर भी रेडक्लिफ ने कहा था, 'पाकिस्तानियों को मेरा शुक्रगुजार होना चाहिए, क्योंकि मैंने तर्कों से हटकर उन्हें लाहौर सौंप दिया, जोकि भारत का हिस्सा होना चाहिए था। बंटवारा करने में मैंने हिन्दुओं से ज्यादा मुस्लिमों का पक्ष लिया।

#किस्सा नं. - 2 मुस्लिम मेंबर ने छुट्टियां मनाने के लिए मांगा था दार्जिलिंग दार्जिलिंग भारत की मशहूर टूरिस्ट प्लेस में से है। बाउंड्री कमीशन का एक मुस्लिम मेंबर इसे पाकिस्तान का हिस्सा बनाना चाहता था। बाउंड्री कमीशन के चेयरमैन रेडक्लिफ ने बताया था कि बंगाल से आने वाले एक मुस्लिम मेंबर ने अकेले में ले जाकर उनसे इस बारे में बात भी की थी। मेंबर ने कहा था, ''मैं और मेरी फैमिली हर साल गर्मियों में छुट्टियां मनाने दार्जिलिंग जाते हैं। ऐसे में अगर दार्जिलिंग भारत के हिस्से में चला गया, तो वहां जाना बड़ा मुश्किल हो जाएगा।

#किस्सा नं.- 3 ऐन वक्त पर भारत के हिस्से में आ गया फिरोजपुर शहर बंटवारे में पंजाब का कौन सा हिस्सा भारत में रहेगा और कौन-सा पाकिस्तान के हिस्से में जाएगा, ये रेडक्लिफ तय कर चुके थे। उन्होंने हिंदुस्तान के नक्शे पर बंटवारे की लकीर भी खींच दी थी, लेकिन माउंटबेटन के दबाव में उन्हें ये फैसला बदलना पड़ा था। माउंटबेटन ने उन्हें खाने पर इनवाइट किया था। यहां खाने की मेज पर कई जगहें इधर से उधर कर दी गईं। इनमें फिरोजपुर जिला और जार तहसील भी शामिल थे, जो ऐन वक्त पर पाकिस्तान से भारत के हिस्से में आ गए थे। माउंटबेटन नेहरू के दबाव में आ गए थे और उनके कहने पर ही रेडक्लिफ को फिरोजपुर भारत को देना पड़ा था।

#किस्सा नं. - 4 ज्यादा दिन नहीं टिक पाएगा दीमक लगा पाकिस्तान जिन्ना ने जब मुस्लिमों के लिए अलग देश पाकिस्तान की डिमांड रखी थी, तब माउंटबेटन ने उन्हें आगाह किया था कि तुम्हें अपंग, बिखरा हुआ और दीमक लगा पाकिस्तान मिलेगा, जो ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएगा। दरअसल, लाहौर रेजोल्यूशन के मुताबिक, मुस्लिम लीग पंजाब और बंगाल में आने वाले किसी भी मुस्लिम जोन की डिमांड नहीं कर सकती थी, ये दोनों दलों के समर्थन पर ही निर्भर था। ऐसे में जिन्ना के चाहने से उन्हें कुछ नहीं मिलना था। बंटवारे से नाखुश जिन्ना ने माउंटबेटन को गुस्से में ये तक कह दिया था कि मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता कि आप मुझे कितना बड़ा या छोटा हिस्सा देंगे, लेकिन जो भी हिस्सा होगा वो मेरा अपना होगा

#किस्सा नं.- 5 बंटवारे से पहले महिंद्रा एंड मोहम्मद थी महिंद्रा कंपनी भारत की बड़ी कंपनियों में से एक महिंद्रा एंड महिंद्रा का भी आजादी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा है। 1945 में जब इस कंपनी ने लुधियाना में स्टील ट्रेडिंग कंपनी शुरू की थी, तब कंपनी में जेसी महिंद्रा और केसी महिंद्रा भाइयों के साथ एक पार्टनर गुलाम मोहम्मद भी हुआ करते थे। वहीं, कंपनी का नाम महिंद्रा एंड महिंद्रा की जगह महिंद्रा एंड मोहम्मद था। 1947 में जब बंटावार हुआ, तो गुलाम मोहम्मद पाकिस्तान चले गए और वहां की कैबिनेट का हिस्सा बने। ऐसे में बाद में कंपनी का नाम बदलकर महिंद्रा एंड महिंद्रा कर दिया गया। , https:// www.youtube.com/watch?v=GaZXAmnNDak

गुरुवार, मई 24, 2018

कठुआ तो एक टेस्ट ड्राइव था , असली निशाना तो भारतीय सेना हैं

 मैं ना कहता था कि कठुवा तो एक test-Drive है , असली निशाना इंडियन आर्मी है । वामी मीडिया, BollyDawood, कश्मीरी पुलिस और जिहादी नेता के समर्थन से कठुवा का fake Case बनाया गया, ताकि अगर ये experiment सफल हुवा तो आगे भारतीय सेना को fake rape केस में फँसा कर "Rapist Indian army" का खेल खेला जा सके। आपको मेजर गोगोई तो याद ही होंगे, वही मेजर गोगोई जिन्होंने एक कश्मीरी आतंकी को अपने jeep से बांध कर सफलतापूर्वक तरीके से कश्मीर में Election करवाया था, अब कठुवा फ़र्ज़ी बलात्कार कांड की अपार सफलता के बाद वामी मीडिया , BollyDawood और कश्मीरी पुलिस के nexus ने उन्ही मेजर गोगोई पे एक कश्मीरी लड़की का बलात्कार का आरोप लगाया..पहले चरण में इस news को सागरिका घोष, बरखा दत्त, राजदीप सरदेसाई ने धडाधड Tweet मारा...लेकिन दूसरे चरण में BollyDawood की छोकरियां अपने हाँथ में playboard लेके " I AM ASHAMED OF INDIAN ARMY" कहती , उसके पहले ही ये Fake news का गुब्बारा फुट गया। सारा मामला खुल के सामने आ गया है कि एक कश्मीरी युवक "समीर अहमद" एक लड़की को लेकर मेजर गोगोई के होटल में आया...वो मेजर गोगोई से मिलने की ज़िद करने लगा लेकिन होटल मैनेजर ने उन्हें मिलने नहीं दिया और बहसबाज़ी होने पर लोगों ने पुलिस को बुला लिया...अब क्योंकि कहानी पहले से तैयार थी, तो सागरिका घोष, बरखा दत्त, राजदीप सरदेसाई ने धडाधड Tweet कर दिए , की मेजर गोगोई बलात्कारी निकला..अब सच सामने आने के बाद वो पुराने गाने की Lyrics tweet करते देखे गए हैं। इसके पहले भी सोफियां में 2 कश्मीरी लड़कियों के डूब के मर जाने को कश्मीरी पुलिस ने Rape बता कर इंडियन Army के 2 जवान को फंसा दिया था, पर CBI जांच होने पे सारी साजिश बेनकाब हो गयी थी। आंखे खोलो भाइयों, उनका निशाना साफ है हिन्दू, हिंदुस्तान, हिंदुस्तानी सेना को बदनाम करना , हमें भी खुद को तैयार रखना है , 2019 आते-आते ऐसे हमलों की बाढ़ आ जायेगी। हर्षवर्धन साभार

बुधवार, मई 23, 2018

कांग्रेस मुक्त भारत के साथ - साथ सवर्ण मुक्त भारत - ??

दिनेश कुमार प्रजापति

 कांग्रेस मुक्त भारत के साथ - साथ सवर्ण मुक्त भारत - ?? सच्चाई ये है जिसे जनता राम भक्त समंझ रही है वो सच्चा अम्बेडकर भक्क्त हो चुका है , क्या आपने चुनाव जीतने के बाद एक भी बार अयोध्या जाते हुए मोदी जी को देखा है ?? पहले कांग्रेस ने आग लगाई तो हम सभी ने यह सोचा कि भाजपा हमारी पार्टी है जी भर कर वोट दिए और दिलवाए लेकिन भाजपा कांग्रेस मुक्त भारत के साथ साथ सवर्ण मुक्त भारत पर उतारू हो गई और यह तो सत्ता की लालच के लिए कांग्रेस से भी ज्यादा गिर गई। BJP अब BSP-2 बन चुकी है मोदी जी जिस तरह आप आरक्षण और SC/ST एक्ट पे जोर दे रहे है अगर उतना जोर राम मंदिर पे देते तो आज राम मंदिर बन गया होता !! जिस तरह से आपने आडवाणी जी , मुरली मनोहर जोशी , यशवंत सिन्हा जैसे हिंदूवादी नेताओ को किनारे किया ये साबित होता है कि आपकी हिदुत्व छवि सिर्फ एक जुमला बाजी है 4 सालो में एक भी हिंदुत्व का काम नही हुआ ! आखिर मोदी जी कहा गया आपका 56 इंच का सीना ?? या ये भी एक जुमला है ?? 56 इंच के सीने की बात करू तो 56 इंच का सीना वास्तविक रुप से तो हमने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना का देखा है जिन्होंने डंके की चोट में बांग्लादेश से आरक्षण को पूर्ण रुप से समाप्त कर दिया... मुझे पता है बहुत से सवर्ण नेताओ की गुलामी करते है क्योकि ये जय चंद बने बैठे है ...लेकिन कब तक गुलामी करोगे ?? तुम्हारे जो बच्चे होंगे वो नेताओ की गुलामी करे इसकी क्या गारंटी है ?? आरक्षण के मुद्दे पे क्यो मुँह पे ताला लगा के बैठे हो ??? क्यो अपने आका से जबाब नही माँगते ?? हिंदुत्व के ठेकेदार कह जानी वाली सरकार गौ- हत्या , कश्मीरी पंडित का पुनर्वास , राममंदिर , जैसे काम क्यो नही कर पा रही सिवाय बयान वाज़ी के ... जितना आरक्षण और SC/ST एक्ट पे जोर दे रहे है उतना राममंदिर पे क्यो नही दे पा रहे ?? याद रहे SC/ST एक्ट से हजारों निर्दोष सवर्ण और OBC वाले फसाये जा चुके है ...और अब इसको सरकार नोवी अनुसूची में डालने जा रही है ..याद रहे SC/ST एक्ट का विरोध नही हुआ तो भविष्य में स्वर्ण और ओबीसी वालो के लिए ये गले का फंदा साबित होगा ... मोदी जी आप SC/ST एक्ट के लिए तो सुप्रीम कोर्ट के विरुद्ध जाने की दम रखते हैं लेकिन राम मंदिर पर क्यो नही ?? आपके नेता बोलते है "कसम राम की खाते है मंदिर वही बनाएंगे" अपने बाप की क्यो नही खाते भाई?? कहि इस लिए तो नही अगर मंदिर बन गया तो आपका एक मुद्दा खत्म हो जाएगा ?? 1- बाबा साहब की वजह से PM बना हु - माननीय मोदी जी 2- कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नही कर सकता - शिवराज सींग 3- BJP आरक्षण खत्म ना करेगी ना ही करने देगी - मोटू टकला 4- हजार सालो में भी खत्म नही होगा आरक्षण ,- उमा ताई तो सुन लो अगर तुम जैसे नेता हाथ धोके सवर्णो के पीछे पड़ेंगे तो सवर्ण तो दबायेग ही नोटा , फिर दलाल कहते फिरेंगे हिन्दू गद्दार है !! कर्नाटक में जो सवर्णो ने NOTA दबा के विरोध किया है उससे आज कई पार्टीया डरी सहमी है अपनी ताकत को पहचाने और एक जुटता दिखाए !! मानता हूं कुछ दलाल लोग NOTA वालो का मजाज उड़ाएंगे लेकिन उनसे डरे नही ..जयचंद जैसे लोग जीवन मे हमेशा तुम्हे मिलेंगे !!कुछ लोग तो तुम्हे देश द्रोही तक का सर्टिफिकेट देंगे ..लेकिन असल मे ये एक खुद देश द्रोही है ! जो देश को ग्रह युद्ध के लिए धकेल रहे है ! माननीय मोदी जी यदि आप 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले आरक्षण मुक्त भारत और एससी एसटी एक्ट को पूर्ण रुप से प्रतिबंधित कर दिए तो हम सभी यह वादा करते हैं कि आपको 2019 में प्रधानमंत्री बनने से कोई नहीं रोक पायेगा क्योंकि आज भी औसत एक सवर्ण के पास 10 दलित भाइयों की वोट है हमारी संख्या कम आंकने की कोशिश मत करिए, छोटी सी चींटी विशाल हाथी को बैठाया देती है और एक छोटा सा छेद बड़े से बड़ा जहाज को डुबो देता है। हमारी इस बात को गंभीरता से लीजिए। क्यों देश में नफरत का बीज बो रहे है, इस आरक्षण और एससी एसटी एक्ट के कारण समाज मे बहुत ज्यादा नफरतें बढ़ती जा रही है जो आने वाले भविष्य में गृह युद्ध का कारण बनेगी। अभी भी समय है मान जाइए अन्यथा यह देश नष्ट हो जाएगा अपनी सत्ता की लालच और अंधी भूख में इस देश को नष्ट मत करिए। जिस देश को आजाद कराने के लिए हमारे पूर्वजों ने अपने प्राणों की आहुति दी है उसको नष्ट होने से बचा लीजिए। नोट- पार्टी समर्थकों से अनुरोध है यहा कुतर्क ना दे आरक्षण पे क्या राय है बस वही दे ! जय हिंद जय भारत,आरक्षण मुर्दाबाद, !!

हिंदू प्राणी

संसार का सबसे बुद्धिमान,परिवर्तन शील प्राणी है हिन्दू मुसलमान को देखिए, ये आज भी कुरान पर ही ईमान लाता है, जैसे कुरान लिखे जाने के समय लाता था। कुरान के विरुद्ध न सुनना चाहता है न कुछ करना। ईसाई को देखिए, बाइबिल के विरुद्ध न सुनना चाहता है और न करना ये ईसाई और मुल्ले कितने भी रईस हो जाये , कितने भी पढ़ लिख जाए किन्तु प्रचार अपनी उन्ही घिसीपिटी शिक्षाओं का करते है। संसार के किसी मुल्ले और ईसाई ने अपने त्योहार मनाने का तरीका नही बदला अब अपने हिन्दू को देख लो इसके धर्म की मूल पुस्तक है "वेद", ये यह भी नही जानता, वेद का पालन तो क्या खाक करेगा। और अगर गलती से वेद पढ़ लिया तो यह जानकर की वेद जड़पूजा अर्थात प्रतिमा पूजा, अवतारवाद, भाग्यवाद, आडम्बर के विरुद्ध है, कर्म, संघर्ष और पराक्रम की शिक्षा देता है तो ये उसे भी फाड़ कर फेंक देंगे क्योकि इसे न संघर्ष करना है न कर्म, इसे तो भगवान भरोसे बैठना है भगवान के नाम पर व्रत, तीर्थ यात्रा, पूजन का आडम्बर करना है। आज 300 से अधिक रामायण है मिलावटी, ये मूल प्रति को छोड़ कर सब को मानता है, क्योकि मूल प्रति में महृषि वाल्मीकि जादू टोनो की बात न करके विज्ञान व वेद की शिक्षा देते है और श्री राम को मनुष्य कहते हुए उन्हें वेदो का विद्वान कहते है, मूल प्रति में न तो राम को विष्णु का अवतार कहा गया, न राम को भगवान बताया गया, न सीता की अग्नि परीक्षा हुई , न हनुमान जी के पूँछ थी, न जटायु पक्षी था, न रामसेतु तैरते पत्थरो से बना, न श्री हनुमान बन्दर की शक्ल थे, न श्री हनुमान ने उड़कर समुद्र पार किया, न राम ने सबुरी के झूठे बेर खाये, न लक्षण ने कोई लक्षण रेखा खींची, न जामवंत रीछ जानवर थे, न श्री राम ने शिवलिंग की स्थापना की। इसलिये हिन्दू इस मूल प्रति को पढ़ना ही नही चाहता क्योकि इसे तो सुख संघर्ष में नही चाहिए, राम भरोसे बैठने में चाहिए। काल्पनिक गपोड राम कथा को ये ईश्वर की लीला बताकर पूजा भक्ति में लीन रहना धर्म समझते हैं। 1000 साल तक इस हिन्दू ने गुलामो की तरह अपने धर्म मे अनेको परिवर्तन स्वीकार किये, 70 श्लोकों की गीता 700 की बना दी, कृष्ण को भी रसिया छलिया, चोर, चरित्रहीन, विष्णु अवतार बना कर ही दम लिया। यह हिन्दू आज भी यह जानना ही नही चाहता कि रक्षाबंधन राखी बांधने का नही अपितु यज़योपवित धारण करने का त्योहार है, स्त्री पुरुष सभी अपने पुराने यजयोपवीत उतार कर नए धारण करते है, यह यग्योपवीत ही हमारी रक्षा का सूत्र है। जन्मदिन पर केक नही काटा जाता बल्कि यज्ञ-संध्या-उपासना करके आत्मवलोकन किया जाता है। लेकिन ईसाई कुसंस्कृति को इसने अपना लिया। दिवाली पटाखे फोड़ने का नही बल्कि दिए (दीपक) जलाकर, नई फसल के अन्न से यज्ञ करके पर्यावरण को सुगन्धित करने का त्योहार है। होली नई फसल के आने के उपलक्ष्य में मनाए जाना प्राकृतिक पर्व है। अग्नि में 7 प्रकार के अन्न की आहुति देकर यज्ञ कर फागुन के रंग से खुशी मनाई जाती है। हिन्दू ने अपने मूल सिद्धांतों व संस्कृति की बलि दे दी आधुनिक बनने की होड़ में याद रखना, वेद कहते है जो धर्म के सिद्धांतो से समझौता करके धर्म की रक्षा करने का प्रयास करता है वह समूल नष्ट हो जाता है। यही कारण है हिन्दू हर तरह से समूल नष्ट होता जा रहा है। पहले तो अरबी गाली 'हिन्दू' नाम स्वीकार कर नाम भ्रष्ट हो गया, फिर धार्मिक गलत मान्यताओं को जन्म देकर तीर्थ, पूजन, कर्मकांड, ब्राह्मण दान, दुर्गा पूजा, गणेश चतुर्थी पूजन जैसे कुचक्रों को जन्म देकर पतित हो गया। हिन्दुओ लौट आओ वापस अपनी महान संस्कृति की ओर, वेदो के महान विज्ञान व पराक्रम की ओर, वेदों की शिक्षाओं को अपना कर उत्कृष्ट बनो, आर्य नाम धारण करो।