सोमवार, अक्टूबर 07, 2013

अंग्रेज़ी महीनों के नाम , संस्कृत सप्ताम्बर, अष्टाम्बर, नवाम्बर, दशाम्बर जैसे शुद्ध संस्कृत रूपोंसे मिलते क्यों प्रतीत होते हैं?


‘सप्तांबर, अष्टांबर, नवाम्बर, दशाम्बर’ आपके मनमें, कभी प्रश्न उठा होगा कि अंग्रेज़ी महीनों के नाम जैसे कि, सप्टेम्बर, ऑक्टोबर, नोह्वेम्बर, डिसेम्बर कहीं, संस्कृत सप्ताम्बर, अष्टाम्बर, नवाम्बर, दशाम्बर जैसे शुद्ध संस्कृत रूपोंसे मिलते क्यों प्रतीत होते हैं? विश्व की और विशेषतः युरप की भाषाओं में संस्कृत शब्दों के स्रोत माने जाते हैं।

इस विषय की कुछ कडियां, जो आज शायद लुप्त हो चुकी हैं, उन्हें जानने, इस लेखकने जो काम किया है, वह आपके सामने प्रस्तुत करता हूं। जो जुड़ती कडियों का अनुसंधान मिलता है, वह पाठकों के सामने रखने में, एक सांस्कृतिक गौरव की अनुभूति भी छू कर आह्लादित कर देती है। आप सभी को इस आनंद-गौरव में सहभागी होने के लिए, आमंत्रण हैं।

क्या यह आकस्मिक घटना है? एक साथ अनुक्रम में, निरंतर चारों महीनों के नाम अंग्रेज़ी में आएं, ऐसी, आकस्मिक घटना होनेकी संभावना, नहीं के बराबर है। जो विद्वान संभावना (प्रॉबेबिलिटी) की, अवधारणा से परिचित है, वें इसे आकस्मिक मानने के लिए तैय्यार नहीं होंगे। पर प्रश्न यह भी है, कि, यदि सप्ताम्बर-सेप्टेम्बर है, तो वह अंग्रेजी कॅलेंडर में, क्रम में नववां महीना कैसे हुआ? और उसी प्रकार, फिर अष्टाम्बर-ऑक्टोबर-दसवां, नवाम्बर-नोह्वेम्बर-ग्यारहवां, और दशाम्बर-डिसेम्बर-बारहवां, कैसे हुए?

इस प्रश्न का उत्तर ढूंढने और संदर्भ खोजने के लिए, एन्सायक्लोपिडीया ब्रिटानिका का विश्व कोष छानकर देखा, और कुछ तथ्य हाथ लगे। संक्षेप में निम्न बिंदुओं की ओर ध्यान आकर्षित हुआ। इस विश्व कोष में, कॅलेन्डर के विषय में वैसे और भी जानकारी है। ईसवी सन, १७५० के आसपास आज कल उपयोग में लिया जाता कॅलेंडर स्वीकारा गया, जिसे ग्रेगॅरियन कॅलेंडर के नाम से जाना जाता है। उसके पहले ज्युलियन कॅलेंडर उपयोग में लिया जाता था। ऐसा भी दिखाइ देता है, कि, पुराने कॅलेंडरों के अनुसार मार्च महीने से ही वर्ष प्रारंभ होता था। यह वस्तुस्थिति ध्यान देने योग्य हैं, क्यों कि, यदि, मार्च महीने से ही वर्ष प्रारंभ हो, तो, सितम्बर सातवां महीना होता है, फिर अक्तुबर आठवां, नवम्बर नववां, और डिसम्बर दसवां महीना होगा।

दूसरा एक सहज दिखाइ देनेवाला तथ्य भी, मार्च से ही नये वर्ष के प्रारंभ की, पुष्टि करता है। वह है, फरवरी में, हर चार वर्ष में आता हुआ, लिप वर्ष का सुधार। कोई भी सुधार सामान्यतः अंत में ही किया जाता है। बहुत सारी ब्यौपारी पेढियां, वर्ष के अंत में ही, हिसाब बराबर करती हैं। आय-कर(Income Tax)का हिसाब भी, वर्षानुवर्ष डिसम्बर के अंत तक, देना होता है।

तो यह प्रश्न कि, फरवरी में ही क्यों, लिप वर्षका सुधार आता है? बडा ही तर्क संगत है। इसका उत्तर कहीं, इतिहास की जमा धूल के नीचे, छिप कर बैठा है। लगता है, कि कभी न कभी तो फरवरी वर्ष का अंतिम महीना रहा होगा। कोइ वर्ष के बीच ही कारण बिना, ऐसा सुधार करे, यह संभव नहीं, मैं तो ऐसा होना तार्किक और वैज्ञानिक दृष्टिसे असंभव मानता हूं। एक और कारण भी स्पष्ट है, कि अन्य माह ३० या ३१ दिन के होते हैं ; फिर क्यों अकेले फरवरी को २८ या २९ दिन देकर पक्षपात किया गया? तो यह फरवरी का लिप वर्ष का सुधार, एक; और २८ या २९ दिनके अवधि का माह होना, दूसरा; यह दोनो तथ्य फरवरी के वर्षान्त माह होने की पुष्टि करते हैं। अर्थात् मार्च कभी तो पहला महीना रहा होगा, यह तथ्य भी इसीसे प्रमाणित होता है।

तीसरा तथ्य भी इस के साथ जोडना आवश्यक है, वह यह है, कि, भारतीय शालिवाहन शक का वर्ष गुडी पडवा (वर्ष प्रतिपदा, युगादि)से ही माना जाता है। और हिंदू तिथि और अंग्रेज़ी डेट प्रायः आगे पीछे हुआ करती है। महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित दक्षिण में सभी परंपराएं शालिवाहन शक मानती हैं। शालिवाहन शक के वर्ष का प्रारंभ, वर्ष-प्रतिपदा जो मार्च में आती है, उसी से होता है। इस ईसवी सन २०१० के वर्ष में, १६ मार्च को शक संवत १९३२ प्रारंभ हुआ था, और साथ साथ विक्रमी संवत २०६७ भी प्रारंभ हुआ था। युगाब्द का ५१११ वां वर्ष भी इसी दिनसे प्रारंभ हुआ था।

पाठकों को अब ध्यान में आया होगा, कि क्यों, सितम्बर सातवां, अक्तुबर आठवां, नवम्बर नववां, और डिसम्बर दसवां होने का आभास होता है। वैसे अम्बर अर्थात, आकाश भी संस्कृत शब्द ही है। हो सकता है कि सप्ताम्बर = सप्त+अम्बर का अर्थ संदर्भ भी, आकाश का सातवां भाग इस(एक राशि) अर्थ की व्युत्पत्ति से जुडा हो।

इंग्लैंड का इतिहास: इंग्लैंड में सन १७५२ तक २५ मार्च को नवीन वर्ष दिन मनाया जाता था। सन १७५२ में पार्लियामेंट के प्रस्ताव द्वारा कानून पारित कर, नवीन वर्ष का प्रारंभ १ ली जनवरी को बदला गया था।

मार्च २५ को नये वर्षका प्रारंभ मानने के पीछे, क्या ऐतिहासिक कारण हो सकता है? यह भी कहीं इतिहास के अनजाने अज्ञात रहस्यो में खो गया है। आज कुछ अनुमान ही किया जा सकता है। कारण हो सकता है, कि इंग्लैंड का वैदिक गुरुकुल शिक्षा पद्धति और वैदिक पंचांग से जिस वर्ष संबंध टूटा होगा, उस वर्ष वैदिक गणित के अनुसार २५वी मार्च को प्रारंभ होनेवाला, भारतीय नव वर्ष रहा होगा।

संभवतः, जिस प्रकार घडी को उलटी दिशा में घुमाते घुमाते हर बीते हुए दिन का समय और वार हमें प्राप्त हो सकता है, उसी प्रकार कॅलेंडर को भी उलटी दिशा में गिनते गिनते हम २५ वी मार्च से प्रारंभ होने वाला शक संवत खोज सकते हैं।

मध्य रात्रि में सु प्रभातम्‌? और एक रहस्यमय प्रथा के प्रति प्रश्न खडा होना स्वाभाविक है, वह है, इंग्लैंड में मध्य रात्रिके समय दिनका आरंभ माना जाना। मध्य रात्रिमें, रात के १२ बजे, Good Morning कहते हुए नया दिन आरंभ कर देते हैं। मैंने रात के १२ बज कर १ मिनट पर, मध्य रात्रि के घोर अंधेरे में, रेडियो संचालक को गुड मॉर्निंग कहते हुए सुना है। यह मुझे तो कुछ अटपटा प्रतीत होता है। मध्य रात्रि के समय सुप्रभातम्? तो, अचरज तो यह है, कि नया दिन रात को प्रारंभ होता हुआ मान लिया जाए। क्या, रातके १२ बजे जागकर कॅलेंडर की तारीख बदलनी पडेगी?

दूसरा प्रश्न इसी प्रथा से जुडा, यह भी है, कि, फिर मध्य रात्रि के बाद की बची हुई, दूसरे दिन की प्रातः तक की अंधेरे-युक्त रात्रि का क्या हुआ? मध्य रात्रि हुयी, और तुरंत एक क्षणमें, सारी शेष रात्रि को छल्लांग लगा कर सु प्रभातम्‌,। क्या कोई तर्क है, इसके पीछे? इसे कॅल्क्युलस की पारिभाषिक शब्दावलि में (Discontinuity) विच्छिन्नता, सातत्य भंग, तार्किक असंगति, या त्रूटकता इत्यादि कहते हैं। यह निश्चित ही तर्कहीन ही लगता है। इस प्रश्न का कुछ तर्क संगत उत्तर भी निम्न परिच्छेद में देने का प्रयास किया है।

वास्तवमें, इंग्लैंडके रातके बारह बजे, भारतमें प्रातः है। वैदिक संस्कृति के अनुसार भारतमें, प्रातः ५:३० बजे सूर्योदय के साथ साथ तिथि बदली जाती थी। उज्जैन (भारत) और गीनीच (इंग्लैंड) के अक्षांश में ८२.५ अंशोका (डिग्रीका) अंतर है। उज्जैन या प्रयाग के अक्षांश ८२.५ है, जब ग्रीनीच के (०)-शून्य हैं। इस लिए, भारत में जब प्रातः के, ५:३० बजते हैं, तब ग्रीनीच, इंग्लैंड में पिछली रात के, १२ बजे होते हैं, होती तो मध्य रात्रि है, किंतु भारत की प्रातः से ताल मिलाने के लिए मध्य रात्रि के तुरंत बाद, शेष रात्रिकी ओर दुर्लक्ष्य करते हुए, गुड मॉर्निंग (सु प्रभातम्‌) हो जाती है। यह तर्क शुद्ध प्रतीत होता है। इस तथ्य की एक पुष्टि यह भी है, कि भारत को पूरब का देश भी माना जाता है, और ऐसे ही स्वीकारा जाता है। पाठकों को ’पूरब और पच्छिम” नाम का चलचित्र (मूवी)भी स्मरण होगा, जिसमें भारत को पूरब माना गया था, और ऐतिहासिक दृष्टिसे सदा स्वीकारा भी गया है।

इसी संदर्भ में कुछ और भी विधान किया जा सकता है। वास्तव में, उत्तर और दक्षिण दिशाएं, पृथ्वी के, दो ध्रुवों के कारण तर्क शुद्ध हैं। पृथ्वी गोल घुमती है, और, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव दो स्थिर बिंदू हैं। परंतु, पूर्व दिशा का ऐसा नहीं है। एक मंडल में, या वृत्त में, किस बिंदु को संदर्भ बिंदू (Reference Point) माना जाए, इसका कोई तर्क नहीं दिया जा सकता। इस लिए संदर्भ बिंदू प्रयाग, या उज्जैन (जो, आज कल माना जाता है) हो सकता है।

कॅलेंडर भी (हमारा कालांतर) संयोग से एक पुर्तगाली क्लायंट के साथ बातचीत करते समय सुना, कि पुर्तगाली भाषा में, अंग्रेज़ी कॅलेंडर के लिए ”कलांदर” शब्द प्रयुक्त होता है, जो शुद्ध संस्कृत ”कालांतर” से अधिक मिलता जुलता प्रतीत होता है। अब जानकारों को यह कालांतर, शुद्ध संस्कृत युगांतर, मन्वंतर, कल्पांतर इत्यादि शब्दों जैसा ही, शुद्ध संस्कृत प्रतीत हो, तो कोई विशेष अचरज नहीं।

Day, Night, Hour इत्यादि अब कुछ Day, Night, Hour इत्यादि शब्दों का विचार करते हैं। जो वास्तव में काल गणना विषय से ही जुडे हुए हैं। Day को दिवस शब्दके मूल धातु ”दिव” के साथ मेल है। इस दिव्‌ का अर्थ दिव्यता अर्थात प्रकाश के साथ जुडा हुआ है। अपने शब्द दिवस, दिन, दिव्यता, देव (प्रकाश युक्त हस्ति) दैव (देवों पर आधारित) दिवंगत (प्रकाशमें लीन हो चुका हुआ) ऐसे शब्दों का मूल भी यह दिव‌ धातु ही है। अंग्रेज़ी में यही दिव‌ धातु के मूल से उदभूत Divine (प्रकाशमान आकृति), Day (दिवस), Deity (दैवी आकृति), Divination ( दैवी सहायता से ढूंढना), इत्यादि शब्दोंका तर्कशुद्ध संधान किया जा सकता है। यह सारे शब्द दिव्‌ धातुसे उद्‌भूत प्रतीत होते हैं।

Night उसी प्रकारसे Night को संस्कृत ”नक्त” (अर्थात रात्रि) के साथ निकटता प्रतीत होती है। संस्कृतमें ”नक्तचर” रात्रि को विचरण करने वाले प्राणियों के लिए प्रयोजा जाता है। नक्त का अर्थ रात्रि, और चर का अर्थ विचरण करने वाला यह होता है। अंग्रेज़ी में भी Nocturnal Animal सुना होगा। इस Nocturanal का ”Noct” वाला हिस्सा ”नक्त” के साथ मिलता प्रतीत होता है। उच्चारण की दृष्टि से जैसे अष्ट से अख्ट,-अठ्ठ (प ्राकृत और पंजाबी ),–आठ (गुजराती/मराठी/हिंदी) और अंगेज़ी Eight ( उच्चारानुसारी अख्ट) इसे Night (उच्चारानुसारी नख्ट) से तुलना करने पर कुछ अधिक प्रकाश पडता है।

Hour का भी मूल ”होरा” इस संस्कृत शब्द से, जिस का अर्थ एक राशि में व्यतीत किया गया समय के अर्थ से लगाया जा सकता है। ज्योतिष को ”होरा” शास्त्र भी कहा जाता है।

यह व्युत्पत्तियां अंग्रेजी डिक्‍शनरियां क्यों दिखाती नहीं है? मुझे यह प्रश्न कई बार पूछा जाता है। मेरी दृष्टि में अनुमानित उत्तर शायद यह है, कि जब यह डिक्सनरियाँ रची गई, तब हम पर-तंत्र थे, और भारत में मॅकॉले प्रणीत शिक्षा प्रणाली लागु की गई थी; जो भारतियों को भारत की महानता के प्रति उदासीन रखना चाहती थी। सोचिए कि जिस भारत नें विश्व में गणित की आत्मा समझी जाने वाले अंकों का योगदान किया, उन अंकों का उल्लेख भी अरबी अंक इस नाते से किया जाता था। बहुत से लोग आज भी उन्हे अरबी अंक ही मानते हैं; तब यह बात सरलता से समझ में आती है। पर हमें इस मति भ्रमित अवस्था से बाहर आना होगा, और गौरव अनुभव करते हुए, उपर उठना होगा।




संदर्भ:(१) एन्सायक्लोपेडिया ब्रिटानीका (२) विश्व इतिहास के कुछ विलुप्त पृष्ठ– पु. ना. ओक,(३) लेखक का ही, गुजराती त्रैमासिक, ”गुर्जरी” में प्रकाशित लेख,(४) लेखक की टिप्पणियां।

बुधवार, अक्टूबर 02, 2013

दूरात्मा गाँधी अँगरेजों और मुसलमानों का दलाल था

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• दूरात्मा गाँधी अँगरेजों और मुसलमानों का दलाल था •••



भारत के रक्षा मंत्रालय के सैनिक समाचार के 8 फरवरी 2009 के अंक में पढ़े गाँधी 1889 में ब्रिटिश एम्बुलैंस यूनिट में भर्ती हुआ था उसकी फोटो भी पाँचवें नंबर पर छपी हूई है । वो अँगरेजों का आजीवन वेतन भोगी नौकर था । देखो उसकी नीचता और हिन्दूद्रोह, गाँधी हिन्दूऔं का पाप और हिन्दुस्तान का अभिशाप है, गाँधीवाद से देश हिजङापंथी सीख गया है । देश बचाना है तो नोटों पर गाँधी के बदले सुभाष, वीर सावरकर, चंद्रशेखर आजाद, भगतसिंह आदि के चित्र छापो और देशभक्तों के चरित्र पढ़ाओ......!
• नोआखाली कांड के एक वर्ष पश्चात तक देश में रक्तपात होता रहा ।
मुसलमानों ने निर्दयता से हिन्दूऔं का संहार किया । कई स्थानों पर हिन्दुओं ने भी उतर दिया । बिहार, दिल्ली और पंजाब में हिन्दुओँ ने जो कुछ किया वह केवल प्रतिक्रियात्मक कार्यवाही थी । गाँधी जी यह भली-भाँती जानते थे कि यह सब कूच मुसलमानों के हिन्दूओं पर अत्याचारों के परिणामस्वरूप हो रहा है, लेकिन वे इस विषय में सदा-सर्वदा हिन्दूओं की ही निंदा करते रहे और कांग्रेस सरकार ने तो बिहार के हिन्दूओं पर गोलियाँ भी बरसाई । यह बात भुला दी गई कि यह सब नोआखाली और अन्य स्थानों के कांडो के परिणामस्वरूप हो रहा है । गाँधी ने अपनी प्रार्थना सभा के भाषणों में यह प्रचार किया कि वे मुसलमानों के साथ बहुत आदर और उदारता का व्यवहार करें और सुहरावर्दी को भले ही वह गुंडो का सरदार हो दिल्ली में स्वतंत्रता पूर्वक सैर करने दी जाए और उसे कुछ न कहा जाए ।
गाँधी के निम्नलिखित भाषणों से यह भलीभाँति ज्ञात होता है :-)-
• "हमें शांतिपूर्वक यह विचारना चाहिए कि हम कहाँ बहे जा रहे हैं...?
• हिन्दूओँ को मुसलमानों के विरुद्ध क्रोध नहीं करना चाहिए, चाहे मुसलमान उन्हें मिटाने का विचार ही क्यों न रखते हों ।
• अगर मुसलमान सभी को मार डाले तो हम बहादुरी से मर जाएँ ।
• इस दुनियां में भले उन्हीं का राज हो जाए, हम नई दुनियां के बसने वाले हो जाएँगे । कम से कम मरने से हमें बिल्कुल नहीं डरना चाहिए ।
• जन्म और मरण तो हमारे नसीब में लिखा हुआ है, फिर उसमें हर्ष-शोक क्यों करे । अगर हम हँसते-हँसते मरेंगे तो सचमुच एक नए जीवन में प्रवेश करेंगे, एक नए हिन्दुस्तान का निर्माण करेंगे ।" (दिनांक 6 अप्रैल, 1947 )
• मेरे पास रावलपिंडी से जो भाई आज मिलने आए थे वे तो तगङे थे, बहादुर थे और व्यापार में दक्ष थे । मैंने तो उस भाई से कहा आप शांत रहें और आखिर में तो ईश्वर बड़ा है । ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ ईश्वर न हो । उसका भजन करो और उसका नाम लो, सब अच्छा हो जाएगा । उन्होंने पूछा, वहाँ पाकिस्तान में जो पड़े हैं, उनका क्या करें...? मैंने उनको कहा, आप यहाँ आए क्यों, वहाँ मर क्यों नहीं गए....? मैं तो इसी चीज पर कायम हूँ कि हम पर जुल्म हो तो भी हम जहाँ पड़े हैं वहीं पड़े रहें, मर जाएँ मुसलमान लोग मार डाले तो मर जाएँ, यह न कहें कि हम अब क्या कर सकते हैं: मकान नहीं कुछ नहीं । मकान तो पड़ा है, धरती माता हमारा मकान है, उपर आकाश है । जो मुसलमान डर से भाग गए, उनके मकान पड़े हैं, जमीन पड़ी हैं । तो क्या कहूँ कि आप मुसलमानों के घरों में चले जाएँ...? मेरी जुबान से ऐसा नहीं निकल सकता । मुसलमानों के घर कल तक थे, वे आज उनके हैं । उसमें जो हमारे शरणार्थी हैं वे अपने आप चलें जाएँ मैं आपको यह परामर्श दूँगा कि आप सिख और हिन्दू शरणार्थियों को कहें कि वे पुलिस और सेना की सहायता के बिना पाकिस्तान में अपने स्थान पर वापिस जाएँ । ( 23 सितंबर, 1947 )
• जो लोग पंजाब में मर चुके हैं उनमें से एक भी वापिस नहीं आ सकता । हमें भी अंत में माना है । यह सच है कि वे कत्ल कर दिए गए, लेकिन कोई बात नहीं है ।
• बहुत से हैजे और दूसरे कारणों से मर जाते हैं । यदि वे मुसलमानों के हाथों से कत्ल हुए है तो वीरता से मरे, उन्होंने कुछ खोया नहीं, पाया है ।
• लेकिन प्रश्न यह है कि उनका क्या होगा जिन्होंने संहार किया....? यह समझ लो कि मनुष्य बड़ी भूलें करता है । पंजाब में अँगरेजी सेना ने हमारी रक्षा की, परंतु यह कोई रक्षा नहीं है । लोगों को चाहिए खुद अपनी रक्षा करें और मौत से न डरें । मारने वाले तो हमारे मुस्लिम भाई ही तो हैं । हमारे भाई अपना धर्म बदल दें तो क्या वे अपने भाई न रहेंगे...?

मंगलवार, अक्टूबर 01, 2013

अधनंगी लड़कियां, 9 साल की बच्ची और तीन युवक....???


अधनंगी लड़कियां, 9 साल की बच्ची और तीन युवक....?


कृपया पूरा पढ़ें ....बिना पढ़े अपनी बात ना कहने लग पड़ें.मतलब एकतरफा बातों से बचें क्योंकि यहाँ नर-नारी दोनों का दोष बताया गया है . .....
एक ब्लॉग पे ''युविका शर्मा'' जो खुद एक महिला /लड़की है, का सत्य के दर्शन करवाता ये लेख पढ़ा, मैं भी यही कहता रहा हूँ कि आज इंसान को जानवर बनाने में सबसे बड़ा हाथ किसका है जिसके कारण उसे नारी बस एक भोग्या शरीर दिखाई देती है उसकी उम्र , पहनावा कुछ मायने नहीं रखता ...

श्याम ,सलीम और सैम तीनो एक ही गाँव मैं रहते हैं तीनो पक्के दोस्त हैं ,तीनो के घर साथ साथ हैं ! गाँव शहर से बहुत दूर है इसलिए गाँव में कभी कभी ही बिजली आती है !अब तीनो 20 को पार कर चुके हैं ,तीनो के घर से मेहनत ,मजदूरी के लिए दबाव आना शुरू हो गया है,,लेकिन गाँव मैं कुछ काम नहीं है ! तीनो दिल्ली में शाम के चचा छगन के पास जाकर काम करने का मन बनाते हैं और जल्दी ही तीनो का बुलावा भी आ जाता है बस अड्डे पर उतरते ही शहर की चकाचोंध उनकी आँखों मैं घर कर जाती है.....

तीनो छगन चाचा के घर पहुँचते हैं ,,अगली सुबह १० बजे से ही तीनो को एक कारखाने मैं काम पर जाना है ,,थके हारे तीनो सो जाते हैं !सुबह के ६ बजे उठते ही छगन उनको उठा देता है शाम उठते ही सामने पड़ा टी वी पर एक न्यूज़ चैनल चला देता है।
@ न्यूज़ चैनल पर सुबह सुबह एक चैनल पर एक अधनंगी लड़की ''TUMMY FIT OIL'' की ऐड करती दिखती है !तभी सलीम उठ कर चैनल बदलता है एक चैनल पर KAREENA का जन्मदिन मनाया जा रहा है उसके सभी अश्लील गाने और ठुमके दिखाए जाते हैं , वो खुद को गटक लेने का न्योता दे रही है !
तीसरे चैनल पर अधनंगी लड़कियां exercise कर रही हैं साथ में तेज विदेशी धुन बज रही है.! एक चैनेल बता रहा है कि दो लगाओ लड़की पटाओ और अंडरवियर को बड़ा टॉइंग भी बता रहे हैं .छगन टी वी बंद कर देता है सबको तैयार होने को बोलता है सब नहाने धोने मैं व्यस्त हो जाते हैं. ठीक 9 बजे सब लोग कारखाने के लिए निकलते हैं.

@@ मेट्रो स्टेशन पर अधनंगे कपडे पहने लड़कियां बाँहों मैं बाहें डाले प्रेमी जोड़े ,,देख के तीनो दांग रह जाते हैं तीनो कारखाने पहुँचते हैं बॉस की बेहद खूबसूरत सेक्रेट्री माइक्रो मिनी स्कर्ट मैं अपने केबिन में जाती है ! पांच बजे तक कम करने के बाद तीनो और छगन कारखाने से निकलते हैं. छगन तीनो को पहले पास के बाज़ार से कुछ कपडे दिलवाने के लिए ले जाता है !बाज़ार पूरी तरह से सजा हुआ है छोटी छोटी बनियान नुमा टॉप पहने लड़कियां अपने अपने बॉय फ्रेंड के साथ शौपिंग का मज़ा ले रही हैं ! कुछ अधेड़ उम्र की औरतें भी मॉडर्न कपड़ो मैं खूबसूरत दिखने की असफल कोशिश मैं अश्लीलता फैला रही हैं !

@@ चारो कपडे खरीद कर सिनेमा देखने का प्रोग्राम बनाते हैं! सैम के कहने पर चारो..
'' GRAND MASTI'' फिल्म देखते हैं ! बड़े परदे पर ऐसी नग्नता तीनो ने पहली बार देखी थी! तीनो के दिमाग इस वक़्त बुरी तरह से बिगड़े हुए हैं. काफी रात हो चुकी है ,चारो घर के लिए निकलते हैं..!
एक बस आकर रूकती है ,चारो उसमे चढ़ जाते हैं !थोड़ी दुरी पर एक बूढी औरत अपनी 9 साल की पोती के साथ बस में चढती है ,, तीनो के मन मैं हलचल है !
बूढी औरत और वो चारो एक ही स्टॉप पर उतारते हैं ! बूढी औरत अलग दिशा मैं और चारो अलग दिशा मैं चल पड़ते हैं ! तभी सलीम छगन को बोलता है चाचा आप चलो हम थोडा घूम कर आते हैं ! ये कहते ही तीनो उस बूढी औरत के पीछे हो लेते हैं! सुबह देल्ली मैं एक 9 साल की बच्ची के साथ रेप और एक बूढी औरत की हत्या की खबर आग की तरह फ़ैल जाती है!
सभी चैनल पर एक ही सवाल पूछ रहे हैं ?

9 साल की बच्ची ने ऐसे कौनसे अश्लील कपडे पहने थे ?
क्या पुरुषों की मानसिकता इतनी गिर चुकी है???
क्यों आखिर एक 9 साल की बच्ची ही क्यों ????
आज आप सब जवाब दें.....
क्या मानसिकता केवल पुरुषो की गिरी है ???
क्या ९ साल की बच्ची के लिए बड़ी औरतें जो अश्लीलता फैलाती हैं जिम्मेदार नहीं ???
मीडिया और टी वी जिम्मेदार नहीं ???
टी वी एक्ट्रेस और अधनंगी लड़कियां जिम्मेदार नहीं ???
कृपया जवाब दें क्या दिन भर जो आप देखते हैं ,,जीते हैं ,, उन सबका असर आपके मन मस्तिष्क पर नहीं पड़ता ??

Comments:
वालीवुड वाले नँगई परोस रहे हैं और हमारे देश के माता पिता सिर्फ रिमोट चेंज करते हैं कार्यवाही न करते
क्या सिर्फ A प्रमाण पत्र देकर जिम्मेदारी से मुक्त हुआ जा सकता है सरकार द्वारा ..?
शर्मनाक तो ये है की यही बेशर्म नायिकाएं और इन्हें माया दिखाकर बेशर्म करने वाले लोग बलात्कार होने पे घडियाली आंसू बहाते हैं
ये है वास्तविक कारण ---क्या कोई संगठन है जो इतना साहस कर सके कि जब तक हमारे देश में भूख है भीख है ---तब तक ऐसी नग्नता को सहन करने की -या ब्रह्मचर्य धारण करने की संस्कृति जन्म नहीं ले सकती है --कृपया इस असहाय ,कुंठित ,गरीब ,बेरोजगार समाज के युवाओं को अपने चंगुल से छोड़ दो ---जिन देशो में सब शिक्षित ,रोजगार युक्त है वहां जाकर अपनी जीवन शैली और कलाओं को दिखाए तो ---ये भी मादाभक्षी नहीं बनेंगे ---जिस दिन न्यायलय का ध्यान इस और जाएगा आप सभी ---अभिनेत्रिया ,और युवतिया सामाजिक अपराधी की श्रेणी में गिनी जाओगी --संभल सको तो संभल जाओ ---और समाज से अपनी फिल्मो के टिकिट का पैसा लो तो उन्हें सचमुच आत्मबल दो -----कुछ ऐसा दो कि अपने परिवार से दूर होकर वो आपको अपना आदर्श माने या मार्गदर्शिका समझे -----अन्यथा आप सभी का समाज हमारे समाज से पृथक हो सकता है --आज जो तालिया बजाते है कल देखेंगे भी नहीं --क्यूंकि आपका नाम समाज का विध्वंस करने वालो में जो होगा --
आज कई कलयुगी बाप अपनी बेटी से और भाई अपनी सगी बहन से बलात्कार कर रहे हैं..इसका क्या कारण है..कृपया बताएँगे..?
आदमी की टांगों और औरत की टांगों में कोई अंतर नहीं..पर इन्होने औरत की टांगों को बिकाऊ बना दिया इसलिए आदमी टांगें दिखाए तो कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन औरत दिखाए तो दिक्कत हो जाती है उसे...इसका कारण यही भांड हैं..

इन्हें औरत में कूल्हों,,वक्ष ,,से आगे कुछ नहीं दिखता,,कैमरा वही रहता है ...भोग्या बना डाला है पूजनीया को...

# थक गया याद करते-करते

Hemant Khanchandani
#थक गया याद करते-करते
१. यूपी के लोग भिखारी होते हैं - राहुल गाँधी
२. पंजाब के 70% लोग नशेड़ी होते हैं – राहुल गाँधी
३. 90% बलात्कार तो लड़की की मर्जी से होते हैं – धरम वीर गोयत (हरयाणा कांग्रेस के प्रवक्ता)
४. बीवी पुरानी हों जाये तो मजा नहीं आता – प्रकाश जैसवाल (कोयला मंत्री)
५. महंगाई अच्छी है, ये तोऐसे ही बढ़ेगी – पी चिदंबरम
६. बलात्कार तो हर जगह होता है – रेणुका चौधरी
७. मंदिर से ज्यादा अहम है शौचालय – जयराम रमेश
८. पाकिस्तान के हिंदुओं को अपने ऊपर हों रहे अत्याचार के सबूत देने होंगे – सुशील शिंदे
९. मैं सोनिया जी के लिए जान तक दे दूँगा– सलमान खुर्शीद
१०. बोफोर्स की ही तरह कोयला घोटाला भी जनता भूल जायेगी – सुशील शिंदे
११. हमारे सैनिकों को पाकिस्तान की सेना ने नहीं बल्कि उनकी वर्दियोंमें आतंकवादियों ने मारा है- एके एंटनी
१२. पुलिस और सेना के लोग मरने के लिए ही होते हैं – भीम सिंह
१३. पीने के लिएपानी नहीं है तो क्या बांधों में पेशाब कर के ला दूं - अजित पवार
१४. महंगाई ज्यादा सोना खरीदने की वजह से बढ़ रही है – पी चिदंबरम
१५. हमें बिना आईएस के यूपी को चला लेंगे – रामगोपाल यादव
१६. पैसे पेड़ परनहीं लगते – मनमोहन सिंह
१७. हमारे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है जिससे महंगाई पर काबू किया जाये – मनमोहन सिंह
१८. गरीबी सिर्फ दिमाग का वहं है – राहुल गाँधी
१९. इस देश को हिन्दुओ से ज्यादा खतरा है – राहुल गाँधी
२०- बतला हाउस में आतंकवादियों के मरने पर सोनिया जी बहुत रोयीं थीं - सलमान खुर्शीद
२१- सत्ता ज़हर है और माँ मेरे कमरे में आके रात में रोयीं थी- राहुल गाँधी
थक गया याद करते-करते, अगर आपको भी कुछ याद है तो आगे जोड़ दें.,Hemant

सोमवार, सितंबर 23, 2013

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जरूरी नहीं है आधार कार्ड बनाना

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जरूरी नहीं है आधार कार्ड बनाना
http://www.tehelka.com/aadharcarduid/
http://tnews.in/ap-news/aadhar-cards-compulsory-says-supreme-court
http://zeenews.india.com/news/nation/aadhar-cards-not-compulsory-supreme-court_878540.html

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की महत्वनकांक्षी योजना आधार कार्ड को बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने आधार कार्ड को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए बतौर पहचान मानने से इंकार कर दिया है. इसी के साथ हर नागरिक को पहचान देने वाला आधार कार्ड बनवाना अब अनिवार्य नहीं है. यह बात खुद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कही है. सरकार ने यह भी कहा है कि आधार कार्ड बनाने का फैसला लोगों की इच्छा पर है.
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने एक फैसले में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि इस बात का ध्यान रखा जाए कि किसी भी अवैध नागरिक का आधार कार्ड न बने. इसके साथ ही अदालत ने ये भी निर्देश दिए हैं कि जरूरी सेवाओं जैसे एलपीजी कनेक्शन, टेलीफोन वगैरह के लिये आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है.
कोर्ट ने यह निर्देश एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया. पहले कई चीजों के लिए आधार कार्ड का होना जरूरी था और जिनके पास आधार कार्ड नहीं था उन्हें परेशानी हो रही थी.
गौरतलब है कि इसके पहले केंद्र सरकार ने भी साफ तौर पर कहा था कि सरकारी सब्सिडी लेने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य नहीं बनाया गया है. चाहे मामला एलपीजी का हो या कुछ और.
पहले खबरें थीं कि रसोई गैस पर दी जाने वाली सब्सिडी आधार कार्ड से जुड़े बैंक एकाउंट में आएगी. सब्सिडी की राशि तभी एकाउंट में आएगी, जब आपने आधार कार्ड बनवाकर अपने बैंक अकाउंट से उसे लिंक कराया होगा. यह भी बात सामने आ रही थी कि आधार कार्ड न होने पर बाजार मूल्यक पर सिलेंडर खरीदना पड़ेगा. सबसे ज्यादा भ्रम की स्थिति एलपीजी के मसले पर ही थी जो कोर्ट के फैसले के बाद अब दूर हो गई है.

क्या भारत सचमुच में एक सेकुलर देश है .......????


क्या भारत सचमुच में एक सेकुलर देश है .......????

दरअसल.... हमारे राजनेताओं द्वारा अक्सर यह दावा किया जाता है कि.... भारत एक सेकुलर देश है ...

परन्तु... यहाँ के हालत देख कर तो लगता नहीं है कि..... भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है .... बल्कि, भारत एक इस्लामी देश प्रतीत होता है....जिसने सेकुलरिज्म की खाल ओढ़ी हुई हो . ...!

यह चौंकने नहीं बल्कि, समझने की बात है... ताकि, समय रहते इसमें परिवर्तन किया जा सके....

आश्चर्य है कि एक तरफ तो... सरकार भारत को सेक्यूलर राज्य कहती है.... और , दूसरी तरफ धर्म के आधार पर मुसलमानों व ईसाइयों को विशेष सुविधाएँ देती है .....जो, पूर्णतया असंवैधानिक है....!

सिर्फ इतना ही नहीं.... बल्कि, 15 -17 प्रतिशत भारतीय मुसलमान किसी भी मापदण्ड में अल्पसंखयक नहीं हैं........ फिर भी, कांग्रेस व अन्य सेक्यूलर राजनैतिक दल .......राज्यों एवं केन्द्र सरकार में मुसलमानों के लिए अनेकों असंवैधानिक सुविधाएं स्वीकार की जा रही है......।

जैसे कि....विश्व के 57 इस्लामी देशों में से कही भी मुसलमानों को हज यात्रा के लिए आर्थिक सहायता नहीं दी जाती है ...क्योंकि, हज के लिए आर्थिक सहायता लेना गैर-इस्लामी है...।

परन्तु, फिर भी बेहद निर्लज्जता से .... भारत सरकार प्रत्येक हज यात्री को हवाई यात्रा के लिए लगभग 60000 रुपये की आर्थिक सहायता देती है....!

इतना ही नहीं .. बल्कि , हजियों के लिए राज्यों में हज हाउस बनाए गये हैं.. और, जिद्‌दा में हाजियों की सुविधाएँ देखने के लिए एक विशेष दल जाता है, मानो वहाँ की एम्बेसी काफी नहीं है।

और तो और....

मुस्लिमों वक्फ बोर्डों के पास बारह लाख करोड़ी की सम्पत्ति है..... जिसकी वार्षिक आय .... लगभग 12000 करोड़ है.... मगर फिर भी सरकार वक्फ बोर्डों को आर्थिक सहायता देती है....

लेकिन... यह जानकर आपका मुंह खुला का खुला रह जाएगा कि.... सरकार ... हम हिन्दुओं के टैक्स का जो भी रूपया इन वक्फ बोर्डों को मदद के तौर पर देती है . .....उसका हिसाब किताब कभी सार्वजनिक नहीं किया जाता है ....क्योंकि, इसी रुपये से जिहादी हथियार और विस्फोटक खरीदते हैं .....

जबकि सरकार....बाबा रामदेव के देशभक्ति के काम की हमेशा सीबीआई जाँच करवाती रहती है ... और, उनके ट्रस्ट पर पर अक्सर छापे पड़ते रहते हैं ....!

अगर सरकार इतना भी कर के रुक जाती तो ... फिर भी गनीमत थी.... लेकिन.... इसके आगे भी दास्तान जानिए ......

आज विश्व के लगभग सभी देश यह मान चुके हैं कि ...... मदरसे आतंकवादियों को तैयार करने वाले कारखाने है .. क्योंकि, जितने भी आतंकी पकडे जाते हैं ... वे सभी के सभी कभी मदरसा में पढ़े हुए होते हैं...

फिर बी हमारी सरकार ने..... धार्मिक कट्‌टरवाद एवं अलगावदवाद को बढावा देने वाली मदरसा शिक्षा को न केवल दोष मुक्त बताया .....बल्कि, उसके आधुनिकीकरण के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए आर्थिक सहायता देती है....।

फिर भी मुसलमान....... अपने इन मदरसों को केन्द्रीय मदरसा बोर्ड या आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जुड़ने देना नहीं चाहते....।

यहाँ तक कि ...... मुस्लिम पाठ्‌यक्रम में सुझाव व अन्य किसी प्रकार का नियंत्रण तक नहीं मानते हैं.....

फिर भी ... हर चीज जानने-समझने के बावजूद ....

**** पश्चिमी बंगाल सरकार ने 2010 तक ...... 300 अंग्रेजी माध्यम के मदरसा स्थापित करने का निर्णय लिया है ........(पायो. 23.12.2009),

*** सरकार ने अल्पसंखयकों के संस्थानों को उच्च शिक्षा में ओबीसी विद्यार्थियों के लिए आरक्षण से मुक्त रखा हुआ है ...

*** इलाहाबाद हाई कोर्ट के विरोध के बावजूद .....अलीगढ़ विश्व विद्यलाय को अल्पसंख्यक स्वरूप बनाए रखने पर बल दिया....

*** अल्पसंख्यकों के कक्षा एक से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए पच्चीस लाख बजीफे दिए.... जबकि सवर्णों को नहीं हैं......

*** केरल सरकार ने..... मदरसों के मौलवियों के लिए पेंशन देने का निर्णय किया है......

*** बिहार में 10वीं की परीक्षा पास करने वाले मुस्लिम छात्र को 10000/- रुपये का पुरस्कार मिलेगा....

*** राजस्थान में मुस्लिम विद्यार्थी निजी विद्यालयों में पढ़ते समय भी छात्रवृत्ति ले सकते हैं.....(शिक्षा बचाओं आन्दोलन, बुले. 48 पृ. 32) (8) ....
और तो और..... समिति की सिफारिशें के अनुरुप 1 से 12 कक्षा तक की पुस्तकें मदरसे में ही तैयार होंगी और, अध्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी उर्दू में संचालित करने की योजना है' (राजस्थान पत्रिका 9..7.2007)

*** यहाँ तक कि.... मदरसों के पाठ्‌य-पुस्तकों में.... पिछली (1998-2003) सरकार द्वारा निकाले गए...... हिन्दू विरोधी और मुस्लिम-उन्मुख अंशों को.... दुबारा पुस्तकों में डाल दिया गया....

*** सरकार ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केन्द्र ......भोपाल, पुरी, किशनगंज (बिहार) मुर्शिदाबाद (पं. बगांल) व मुल्लूपुरम (केरल) में खोलने के लिए दो हजार करोड़ का अनुदान दिया....(वही. बुल. 48, पृ. 31)

*** अल्पसंखयकों के... एम फिल ओर पी.एच.डी. करने वाले 756 विद्यार्थियों को...... राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा या राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा के बिना ही ..... बारह से चौदह हजार रुपये महीना रिसर्च फैलोशिप मिलेगी। (दैनिक जाग. 23.12.2009)
जबकि अन्यों को सरकारी रिसर्च फैलोशिप पाने के लिए ....ये परीक्षाएँ पास करना अनिवार्य है।

*** उच्च प्रोफेशनल कोर्सों में पढ़ने वाले अल्ससंखयक विद्यार्थियों की फीस सरकार देगी....

*** स्पर्धा वाली सरकारी परीक्षाओं के कोचिंग के लिए भी फीस सरकार ही देगी... जबकि, ये सुविधाएँ भारत के सामान्य नागरिकों को नहीं है।

हद तो यह है कि......जिनके पूर्वजों ने भारत के लिए सर्वस्व लुटा दिया....... और , आज भी भारत को अपनी माता मानते है .... ये तथाकथित हरामी सेकुलर सरकार उनके अधिकार छीन कर मुसलमानों को देती रहती है ..... जबकि, मुसलमान हमेशा भारत विरोधी कामों में लगे रहते हैं ..........फिर भी , सरकारों को वोट बैंक का ऐसा चस्का लगा है कि....सरकारें मुसलमानों के लिए खजाने खोल देती है ....
जैसे कि.....

(1) अल्पसंखयकों के नाम पर...... विशेषकर मुसलमानों के लिए अलग मंत्रालय बनाया गया है....और, उनके लिए 11वीं पंचवर्षीया योजना में 15 प्रतिशत बजट रखा गया है ।

(2) 2004 में सत्ता में आते ही कांग्रेस ने...... आतंकवाद में फंसे मुसलमानों को बचाने के लिए पोटा कानून को निरस्त कर दिया ....जिसके फलस्वरूप देश के आतंकवादी घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हो गयी...

(3) सरकार ने.....मुस्लिम पर्सनल कानूनों और शरियत कोर्टों का समर्थन किया...

(4) 13 दिसम्बर 2001 में संसद पर हमले के दोषी अफजलखां को फांसी की सजा मिल जाने पर भी .... वर्षों तक उसमे टाल-मटोल किया गया ...!

(5) 17 दिसम्बर 2006 को नेशनल डवलपमेंट काउंसिल की मीटिंग में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने यहाँ तक कह दिया कि ......''भारतीय संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है।''
शायद इसीलिए उन्हें .........रोजगार, ऋण, शिक्षा आदि में विशेष सुविधाऐं दी जा रही हैं।

(6) सरकार बंगला देशी मुस्लिमों घुसपैठियों को निकालने में उत्साहहीन है......... जबकि वे बेहद सुनियोजित ढंग से भारत के इस्लामीकरण एवं यहाँ आतंकवाद फ़ैलाने के लिए यहाँ बस रहे हैं

ध्यान रखें कि....एक तरफ तो मुसलमान आबादी बढ़ाने में लगे रहते है ......और, दूसरी तरफ अपनी गरीबी का बहाना बना कर सरकार से आर्थिक मदद माँगते रहते हैं ...

परन्तु, इनकी मांगे कम होने की जगह और बढती जाती हैं .......और, ऐसा तब तक होता रहेगा .... जब तक भारत पुर्णतः एक इस्लामी देश नहीं बन जाता .....
इसलिए , मुसलमान अपनी गरीबी और पिछड़ेपन का ढोंग करके सदा रोते रहते हैं ......और, सरकार ने उनकी इसी राक्षसी भूख को मिटाने के लिए कई कमेटियां बना रखी है .....जैसे ,

(1) सच्चर कमेटी द्वारा..... मुस्लिमों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए 5460 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है

(2) उनके लिए सस्ती ब्याज दर पर ऋण देने के लिए एक कारपोरेशन बनाया गया,

(3) सार्वजनिक क्षेत्र में उदारता बरतें। इस अभियान की निगरानी के लिए एक मोनीटरिंग कमेटी' काम करेगी।'' (दैनिक नव ज्योति, 4/1/2006)।

(4) अल्पसंखयक विद्यार्थियों को माइनोरिटी डवलपमेंट एण्ड फाइनेंस कारपो. से 3 प्रतिशत पर ऋण दिया जाता है।

(5) पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रत्येक विभाग के बजट में से 30 प्रतिशत आवंटन मुसलमानों के लिए किया गया...... (वही. बृ. पृ. 32)

(6) 13 अगस्त 2006 को सरकार ने लोक सभा में बतलाया कि..... मुस्लिम प्रभाव वाले 90 जिलों और 338 शहरों में मुसलमानों के लिए विशेष विकास फण्ड का प्रावधान किया गया है। (वही, बृ. 48, पृ. 33)।

इस तरह ........एक धर्मनिरपेक्ष देश की सरकार ....धर्म के आधार पर एक वर्ग विशेष के वोट पाने के लिए सभी उचित व अनुचित तरीके अपना रही हैं.......

इसीलिए , उच्चतम न्यायालय ने भी सरकार को सावधान करते हुए 18 अगस्त 2005 को कहा.......- ''राजनैतिक या सामाजिक अधिकारों में कमी को आधार बनाकर भारतीय समाज में अल्पसंखयक समूहों को निर्धारित करने और उसे मानने की प्रवृत्ति पांथिक हुई ...तो, भारत जैसे बहुभाषी, बहुपांथिक देश में इसका कोई अन्त होने वाली नहीं है .....क्योंकि, एक समुदाय द्वारा विशेषाधिकारों की मांग दूसरे समुदाय को ऐसा ही करने के लिए प्रेरित करेगी..... जिससे परस्पर संघर्ष और झगड़े बढ़ेगें।''

परन्तु, वोटों की लालची और सत्ता की प्यासी,,,,,, सेक्यूलर सरकारें इन चेतावनियों की परवाह नहीं करती हैं.....

सबसे अधिक पीड़ा की बात तो यह है कि .........

जिस भारत की स्वाधीनता व अखंडता के लिए ...........हमारे पूर्वजों ने सैकड़ों वर्षों तक संघर्ष किया........लाखों योद्धाओं ने अपने प्राण न्यौछावर किए....... और, देश को इस्लामीकरण से बचाया ...

तथा... आज जिन नेताओं को देश की रक्षा का उत्तरदायित्व सौंपा गया है ..........वे ही, स्वार्थवश कुछ दिन राज करने के लिए भारत के इस्लामीकरण में निर्लज्जता के साथ सहयोग दे रहे हैं...

वे.... उन करोड़ों देशभक्तों के साथ विश्वासघात कर रहे हैं .........जिन्होंने देश के लिए बलिदान किए।

कांग्रेस एवं अन्य सेक्यूलर पार्टियों का मुस्लिमों के सामने आत्मसमर्पण एवं वोट बैंक की राजनीति करना...... देश की भावी स्वाधीनता के लिए बेहद चिन्ता का विषय है......

क्योंकि, सरकार की इन्ही मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के कारण ..... आज सारा देश इस्लामी जिहाद और आतंकवाद से पीड़ित है....

क्या देश की सेक्यूलर पार्टियों को दिखाई नहीं देता कि ..........पाकिस्तान एवं भारत के मुसलमान शेष भारत में इस्लामी राज्य स्थापित करना चाहते हैं.....?????

क्या हमारी सरकारें.... सेकुलरता का ढोंग करके ... अपने स्वार्थ के लिए.... हमारे हिंदुस्तान को ...... मुगालिस्तान में बदल देना चाहती है....?????????

आज के सरकारी क्रियाकलापों से तो.... ऐसा ही कुछ आभास हो रहा है....

इसीलिए मित्रो.....

यदि आप भी उपरोक्त बातों से सहमत हैं ..... और, अपने हिंदुस्तान को ..... एक इस्लामी देश में परिवर्तित होने से बचाना चाहते हैं तो....

सेकुलरिज्म के पाखण्ड का त्याग कर.. देश भक्त बनिए..........एवं, हमारे अभियान का साथ दीजिये .....!

जय महाकाल...!!!

भारत को अशीलता की राह में ले जाने की साजिशे


मेरे भारत को अशीलता की राह में ले जाने की साजिशे देखिये मेरे भाइयो नही तो अपनी सनातन धर्म को खत्म करने पूर्ण तैयारी कब से चल रही आपका साथ चाहिए नही तो अपना भाई और बहन की जिंदगी बिगड़ सकती है
आपसे निवेदन है की जो गलत है उसका विरोध होना चाहिए नही सत्य का अस्तित्व खत्म हो जायेगा अधर्म फ़ैल जायेगा समाज में...



जैसे जैसे अर्थव्यवस्था विकसती गई धन्नासेठ धनपति ( इल्ल्युमिनिटी ) मानजात को कंट्रोल करने लगे । उनका सपना पूरी दुनिया पर राज करने का था आज लगभग पूरा होने के करीब है । पूरा और ओफिसियल राज अपने हाथमें तभी ले सकते हैं जब पूरी दुनिया की जनता एक अबोध जानवर बन जाये और आबादी भी १०% ही रह जाये । आज के शैतान धनपति को हम किल्ल्युमिनिटीवाले यहुदी बता देते हैं । वो पूरा सच नही है । यहुदी तो है पर वो अल्खान्जी यहुदी है । उन को नास्तिक समजा जाता है लेकिन वो शैतान पूजक है । उन का मूल पूर्वि युरोप और पस्चिम रसिया है । वो मुर्ति पूजक पॅगन (सनातन हिन्दु धर्म का विकृत रूप ) थे । यहुदियों की “दुनिया का डोमिनेशन” वाली धर्मिक थियरी से प्रभावित हो कर और उन से कारोबारी रिश्ते बढाने के लिए यहुदी धर्म अपनाया था । इजराइल और दुनिया के धार्मिक यहुदी असली यहुदी है । इन असली यहुदियों ने नकली यहुदिओं से फायदा बहुत उठाया लेकिन जब ये शैतान सारे धर्मों के साथ साथ उन का भी धर्म और उन के भगवान को मिटाकर शैतानी धर्म को आगे ला रहे है तो अचानक उन की आंख खूली है । इजराईल की सरकार, अमरिकी और भारत साकार की तरह इल्लुमिनिटी की गुलाम ही है । वो अब सरकार के विरोध में खूल कर आ गये हैं । इस लिन्क पर आप देख सकते हो ।

http://www.nkusa.org/

सब से प्रथम तो इजराईल में स्कूल के बच्चों के पढाए जाने वाले सेक्स का विरोध किया है । देश द्रोही सेक्युलर जनता विरोध करनेवालों को ऑर्थोडोक्स या पूराने खयाल वाले कहते हैं ।


इजराईल की स्कूलें दो भाग में बंट गई है । सेक्युलर स्कूलें और प्राईवेट धार्मिक स्कूलें । मुस्लिम और धार्मिक जनता धार्मिक स्कूल में जाते हैं जहां सेक्स नही पढाया जाता है ।


इल्लुमिनिटी का “सेक्स एज्युकेशन” को पूरा समजना होगा क्यों की भारतमें भी आते आते रूक गया है और कभी भी आ सकता है ।


इल्ल्युमिनिटी का एक हथियार सेक्स एज्युकेशन ----------------

डो. हेनरी मेकोव लिखते हैं “इन्टरनेट पर पोर्न जीस तरह फ्री में मिलता है मानने में नही आता । शायद युएस की पोर्न इन्डस्ट्री सालाना १२ बिलियन डॉलर की है । मुझे शक है की ये इन्डस्ट्री इल्लुमिनिटी की तरफ से सबसिडी पाती है, वरना पोर्न फ्री नही हो सकता । ये सबसिडी मनिलोन्डरिन्ग से दी जाती है ।“



पोर्न इल्ल्युमिनिटी के लिए बहुत बडा रोल निभाता है, हम जान गये हैं की वो हमे गुलाम बनाना चाहते हैं, ऋण, माइन्ड कंट्रोल और फोल्ज फ्लॅग टेरीरिजम से । पर अभी तक सब लोग नही जानते की सेक्स और धर्म के मिश्रण से एक कार्यक्रम बनाया है जो आध्यात्मिक लेवल से हमें वश में कर ले ।



ये शैतानो का विज्ञान कहता है संभोग ब्रह्मांडीय सद्भाव पुनर्स्थापित करने का माहौल बनाता है । युवा सुन्दर स्त्रीयां हमारे सामुहिक मानसमें एक आह्वान है, सेक्स / रोमांटिक प्रेम की अति, हमारा विचलन, ये सब शैतानी कब्जे का सबूत है । पुरुषों, और महिला भी ऐसे सोच रहे हैं “होट ओर नोट”, “हिटिन्ग धीस अन्ड डुइन्ग धेट” चाहे कितना भी अनुचित हो । सेक्स धर्म से जुडा एक थकाऊ सांस्कृतिक जुनून है । समलैंगिकता को सामान्यीकृत कर दिया है और बढ़ावा दिया जा रहा है । अनजान पराई व्यक्ति से सेक्स एक पत्नीत्व और परिवार के विपरीत है । परायों से सेक्स अब आदर्श है, "आत्म अभिव्यक्ति" और स्वतंत्रता है ।



यौन आजादीः


"यौन मुक्ति" एक चाल थी शैतानों की । एक पत्नित्व, धर्म और परिवार का पौष्टिक और जीवन हैं । सेक्स शादी के साथ ही पवित्र है । इसका उद्देश्य पति और पत्नी के बंधन के लिए है और बच्चों के लिए एक पौष्टिक वातावरण प्रदान करने के लिए है ।"यौन मुक्ति" शैतानो का महत्वपूर्ण पहला कदम है, यह ऐसा विभाजक है जो सभी रिश्तों को कमजोर कर देता है ।


अश्लीलता से हमे सिखाया जाता है की आप सामने वालों को सेक्स अपील की टर्म से जज करो । इस से स्त्री पुरुष संबंधों के लिए बेहिसाब नुकसान हुआ है । कई पुरुष के लिए “टर्न ओन” नही पर “टर्न ओफ” है, कुछ भी नही, उन महिलाओं के लिए अवमानना ही है जो बेहूदगी से खुद को प्रदर्शित करती है, और यह अवमानना सभी महिलाओं की कहानी है ।


हजारों लंपट सुन्दर लडकियों को शादी और मातृत्व के लिए अयोग्य बना रहे हैं । प्रबुद्ध कम्युनिस्ट इल्ल्युमिनिटी का लक्ष्य है विवाह और परिवार को नष्ट करना और महिलाओं को एक सार्वजनिक यौन उपयोगिता, यानी शौकिया वेश्याएं बनाना ।


यह सारा अश्लील साहित्य गुप्त एजेंडा का हिस्सा है । लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात समझने के लिए यह है: हम बहुत बड़े पैमाने पर मनोवैज्ञानिक हमले के शिकार है । सेक्स द्वारा हमे शैतान की तरफ ले जा रहे है । जीसे हम "आधुनिकता." समजते हैं, यौन संबंध के इस मोहित मोह वाली शैतानी खेल का एक बड़ा हिस्सा है । इस हमले को बेअसर करने के लिए, हमें हकिकत और कल्पना दोनों में से, अश्लील साहित्य और परायों से सेक्स त्याग करना पडेगा ।

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भारत में दो महान सेक्सगुरु हो गये जो इल्ल्युमिनिटी के प्यादे थे, जिन्हों ने सेक्स को बॅडरूम से सडक पर लाने की कोशीश की थी ।



https://www.facebook.com/notes/siddharth-bharodiya/शेइम-शेइम-कुछ-तो-शरम-करो-/225028667650002



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आज भारत में ही नही सारे विश्व में बच्चा तो क्या आदमी बुढे होने तक एक शैतान की गोदमें बैठ कर ही पढाई करता है । शैतान ही उसका गुरु है । इन गुरुओं में स्कुल-कोलेज, मिडिया, मनोरंजन, सहित्य और सोस्यल साईट्स भी शामिल है । ईन सबके द्वारा हजारों विषय पर पढाया जाता है, सिखाने के मकसद से नही, समाज जीवन के फायदे को देख कर नही बल्की एक सोस्यल एन्जिनियरिन्ग की तरह, जीस से समाज जीवन बदला जा सके । बदलने का मतलब समाज की उन्नत्ति नही पर अधोगति है ।



सेक्स के पाठ की जरूरत आदमी को क्यों पडी ? २०००० हजार साल की मानव सभ्यता में आज ही क्यों ? एक मुर्खामी भरा जवाब मिला “ एइड्ज इत्यादी यौन रोगों के प्रति बच्चों को जागरुक करना जरूरी है ” । ऐसी शिक्षा तो बच्चे के बाप को देनी चाहिए बच्चों को क्यों ? कीसी के पास जबाब नही ।



भारत में इस पढाई को लाने के पिछे भारत में बलात्कार को कारण बताया गया । क्या बुढे बलात्कार नही करते ? उसने पूरी जिन्दगी सिखा ही नही सेक्स क्या होता है ? बुढों को भी सिखाओगे नाईट स्कूलमें ?



ये शैतान जहां सफल हो गया ऐसे देश अमरिका के लोगों की कुछ बात रखता हुं ।

अमरिकामें सेक्स एज्युकेशन के बाद सामाजिक ढांचे में बडा अंतर आ गया है । बच्चे स्कूल की उमर में ही सेक्स में रत हो गये हैं, यहां तक की स्कूल बॅग मे निरोध के पेकेट रखने लगे हैं ।



शादी की उमर होते होते सेक्स को लेकर जो भी अनुभव हुए उस के कारण शादी का जो सबसे बडा आकर्षण सेक्स होता है वो खतम हो गया है । लोग शादी करना टालने लगे हैं । सामाजिक सुरक्षा के कारण शादी करते हैं लेकिन देरसे करते हैं । पति पत्नि के बीच की वफादारी पूरानी बात हो गई है । कुटुंब प्रथा तुट गई है । कब पत्नी छोड के भाग जाये या कब पति पत्नि को छोड दे कोइ गेरंटी नही । १९६० में अमरिकन एडल्ट ७२% शादीशुदा होते थे आज ५१% रह गये हैं । बाकी के ४९% बिना शादी के, तलाक शुदा और विधवा-विधुर । जन्म-दर का लेवल भी इतिहास में सब से नीचे । हरेक १००० के पिछे २३ का आंकडा था, आज १३.८ पर आ गया ।



अमेरिका में हर साल 15 से 19 साल की उम्र की सात लाख, 50 हजार लड़कियां गर्भवती हो जाती हैं। सबसे ज्यादा हैरत की बात यह है कि 80 फीसदी लड़कियों का गर्भवती होने का कोई इरादा नहीं होता है।



15 से 25 साल की उम्र के एक करोड़, 90 लाख युवाओं को सेक्शुअल ट्रांसमिटेड डिसीज (एसटीडी) की शिकायत होती है।

हर घंटे 13 से 29 साल की उम्र के दो युवा एचआईवी पॉजिटिव होते हैं।



अमेरिका में ज्यादातर लोग शादी होने या सेक्स एजुकेशन कोर्स पूरा होने से पहले वर्जिनिटी न खोने देने की प्रतिज्ञा लेते हैं। बावजूद इसके आंकड़े बताते हैं कि प्रतिज्ञा लेने वाले अक्सर उसे तोड़ देते हैं। ऐसे लोग यौन संक्रमित रोग (एसटीडी) से ग्रस्त होते हैं और यौन संबंध बनाने के दौरान गर्भनिरोधक का सबसे कम इस्तेमाल करते हैं।



65 फीसदी मिडल और हाई स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं ने क्लास में लेक्चर के दौरान शारीरिक शोषण और अजीब तरीके से छूने की शिकायतें दर्ज कराई हैं।

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हमारे सह ब्लोगर bhagwanbabu के शब्द



अगर सरकार या सरकार का थिंक टैंक ये समझती है कि सेक्स एजुकेशन देकर यौन अपराधो पर लगाम लगा लेगी तो ये सिर्फ इस बात को प्रदर्शित करती है कि सरकार, जनता को सिर्फ बहकाने की कोशिश कर रही है। या फिर सरकार को ये समझ मे नही आ रहा है कि वो इस परिस्थिति से कैसे निबटे, तो ये नुस्खा आजमा कर देखना चाहती है। अगर जनता को कोई लाभ नही हुआ तो कम से कम नेता राजनीतिक लाभ तो उठा ही सकते है। और वैसे भी सरकार जनता की समस्याओं पर गम्भीर कब हुई है?



जस्टिस जे.एस. वर्मा की समिति स्कूली पाठ्यक्रम में यौन शिक्षा को शामिल करके बच्चों को सही-गलत जैसे व्यवहार और आपसी संबंधों के विषय में बताना चाहती है। केन्द्रीय मानव संसाधन और विकास मंत्री एम.एल. पल्लम राजू भी वर्मा समिति से सहमत होकर इसे लागू करने की सोच रही है….



मै इन समिति और मंत्रियों से ये पूछना चाहता हूँ कि क्या उन्हे बच्चो के मौजूदा पाठ्यक्रम के बारे मे अवगत नही है..? ये सही-गलत और आपसी सम्बन्ध के विषय मे पहले से ही “शारीरिक व नैतिक शिक्षा” के रूप मे शामिल है.. जिसे बच्चे रट-रट्कर परीक्षा पास कर लेते है। लेकिन क्या बच्चों द्वारा नैतिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल शिक्षाओं का अनुसरण किया जाता है? फिर क्या जरूरी है कि सेक्स के बारे मे बताई गई सैद्धांतिक बातों से बच्चों मे इसकी व्यवहारिक बातो को जानने के उत्सुकता नही बढेगी?



जहाँ तक सवाल है यौन अपराधो का, तो सेक्स एजुकेशन का इससे कोई सम्बन्ध नही दिखता। और जिन अपराधो के लिए बच्चो को शिक्षाएँ दी जा रही है और यहाँ तक कि कठोर कानून भी है, क्या किसी को उन अपराधों में कमी दिखाई देती है ? दिन-ब-दिन अपराध और भ्रष्टाचार की घटनाएँ बढ़्ती ही जा रही है..। एक-दो घटना (जैसे दिल्ली गैंगरेप मामला) जो मीडिया की नजर मे आ जाती है उसे सारी दुनिया देखती है, लेकिन इस तरह की घटनाएँ अब आम होने लगी है. जरा आप अपने आस-पास झाँक कर देखे तो पता चलेगा …. ।



पता नहीं सरकार हर क्षेत्र मे महिलाओ को आरक्षण देकर आगे क्यों लाना चाहती है ? और एक महिला, आई0 एस0, आई0 पी0 एस0 बनकर मंत्रियो के साथ रंगरलियाँ मनाना चाहती है(ऐसा भी खबर आया है) ? नेताएँ अपने घर की छोटी-बड़ी पार्टी मे भी अर्धनग्न व कम उम्र की लड़्कियों को नचाकर आनन्द लेते है क्या इससे यौन अपराध को हवा न मिलेगी? एक महिला,… पुलिस बनकर क्या दिखाना चाहती है? क्या पुलिस बनने के लिए पुरूष कम पड गये है… । एक बड़ी कम्पनियाँ अपना प्रोडक्ट बेचने के लिये अपने प्रोडक्ट के साथ अर्धनग्न स्त्रियों को खड़ा कर देती है… और ताज्जुब की बात ये है कि ये लड़्कियाँ और स्त्रियाँ नये जेनरेशन का हवाला देकर हंसते हुए अपने कपड़े उतार देती है। आज टेलीविजन पर दिखने वाले शत-प्रतिशत विज्ञापन महिलाओ द्वारा आकर्षक और कम कपड़े पहना कर कराये जाते है। विज्ञापन में प्रोडक्ट पर कम लड़्कियों के शरीर पर टेलीविजन के कैमरा का फोकस ज्यादा रहता है। कंपनियाँ अपने रिसेप्शन पर एक आकर्षक, मनलुभावन और कम उम्र की लड़्कियो को बिठाती है क्योंकि इससे उसकी कम्पनी मे ज्यादा से ज्यादा लोग आये और आते भी है, कम से कम उस लड़्की को देखने और उससे बैठकर बकवास करने का उचित तरीका तो लोगों को मिलता ही है और इसमे कम उम्र के लड़्के ही नहीं अधेड़ और बूढ़े लोग भी शामिल होते है । अगर किसी टेलीकॉम कम्पनी के कस्टमर केयर पे कोई लड़्की मिल जाये फिर देखिये क्या-क्या बातें और कितनी देर तक होती है। इन सब का परिणाम अब ये भी देखा गया है कि एक मध्यम वर्गीय आदमी अगर एक दुकान भी खोलता है तो दुकान अच्छा चले इसके लिये एक सुन्दर लड़्की को काउंटर पर बिठाता है । एक शादी में जब मै गया तो देखा कि लड़्कियो ने ऐसे कपड़े पहन रखे थे जिससे उसका आधा शरीर तो साफ-साफ दिखाई पड़्ता था, जबकि मौसम सर्दियों का था हमलोगों ने जैकेट पहन रखा था। क्या इससे अपराध न बढ़ेगा ?



सेक्स एक नेचुरल क्रिया है जिसके साथ जितना भी आप छेड़्छाड़ करने की कोशिश करेंगे उतना ही ये घातक सिद्ध होगा। और इसके प्रति आप किसी की मानसिकता एजुकेशन से नही बदल सकते……… आपने चारो तरफ अर्धनग्न लड़्कियो का मेला लगा रखा है और उसमे भी आपके नेता और बड़े लोग गन्दी हरकत करने से बाज नही आते, ऐसे मे आप बच्चो को सेक्स ऐजुकेशन देकर उससे क्या अपेक्षा रखते है ?



अमरिका और युरोपमें जो पोर्न का बहुत बडा बाजार खूला है उस के पिछे सेक्स एज्युकेशन तो नही ? पोर्न के पिछे पिछे मानव भक्षण की भी फेशन चलाई है । स्कूल कोलेज की लडकियों और हजारों पोर्न स्टार के अनचाहे गर्भ को अबोर्ट कर के निकाल दिया जाता है और एक प्रोडक्ट समज कर बेचा जाता है, उस का बाजार खूल गया है । पेप्सी और कोकाकोला जैसी मल्टिनेशनल अपनी बोटल में पानी के साथ जो मसाला डालते हैं वो गुप्त है, उस का कारण है भुण से निकाले गये पदार्थ को वो उस में मिलाते हैं । उस में कोइ पोषण तो नही पर आदमी को आदी बनाने के काम करता है । हररोज पिनेवालों को आदत पड जाती है । इस तरह ही डीब्बापॅक खाना बेचनेवाली कंपनियां भी भुण का उपयोग करती है । अभी तक बात छूपी थी, अब जाहिर हो गया है । क्या फरक पडा ? क्या पाप लगा ? क्या आप का नूकसान गया ? इसे कहते हैं शैतानों की जीत ।



चीन में तो बच्चों का भ्रुण सीधा किराने की दुकान में मिलता है, होटलों की डिशमें मिलता है और शैतान आदमी बडे चाव से खाते हैं । बस सर पर सिंग नही है वरना राक्षस ही है ।



ऐसी फूड सिक्युरिटी को भारतमें भी लानी है, आबादी बहुत बडी है तो भुण का प्रोडशन भी बहुत बडे पैमाने पर होगा । देश को जल्दी सेक्समय करना है लेकिन जनता का धर्म बिचमे आ जाता है ।



दिल्ली का गेंन्ग रेप को मिडियामें बहुत उछाला गया था वो जानबूजकर उछाला गया था । जनता में गुस्सा फैलाना था, जीस से जनता ही नये कडे कानून की मांग कर दे । और मुर्ख जनता ने मांग भी कर दी । उस के पिछे सरकार की मुराद थी स्कूल में सेक्स एज्युकेशन को लाना और उस के लिए सेक्स करने की कानूनी उमर को घटाकर १४ साल करनी थी । वो इस लिये यदी सेक्स सिखाते सिखाते मास्टर और दुसरे विद्यार्थी १४ साल की लडकियों से सेक्स करने लगे तो किसी को जेलमें जाना ना पडे । बिकाउ नायमुर्ति ने बताया बचपन से ही आदमी को सेक्स की शिक्षा देनी चाहिए जीस से बलात्कार की घटना ना हो । उस आधार पर, डायरेक्ट सेक्स एज्युकेशन की बात करने की हिम्मत नही हुई पर जनता को बुध्धिहीन समजते हुए, सरकारने लडकी की सेक्स करने की उमर घटानी चाही जब की शादी करने की उमर घटाने के लिए तैयार नही थी । याने कम उमरमें सेक्स तो किया जा सकता है पर शादी नही । दूसरे शब्दों में १८ साल के अंदर ओफिसियल सेक्स नही अनओफिसियल करो । कम से कम भ्रुण मिलने तो शुरु हो जाते, भारत में तो कोइ खायेगा नही एक्पोर्ट से डोलर तो मिल सकते थे । लेकिन बीचमे विरोधी और धर्म आ गये । कोई बात नही, इसलिए पहले विरोधियों को पछाडने की ट्रीक बना ली । बलात्कार के कानून पोस्को में एक कलम (section 9 of POCSO Act) डाल दी । १८ से निचे की कोइ लडकी अगर कह दे की इस आदमी ने मेरा रेप या अन्य शारिरिक शोषण किया है तो कानून की अंधी देविको मानना ही पडेगा की लडकी सच बोलती है । भले वो जुठी हो या बालवेश्या भी क्यों ना हो, आदमी बच नही सकता । आज एक विरोधी और धर्म के प्रचारक आशाराम को टार्गेट बनाया है । मिडिया सहीत इल्लुमिनिटी के सारे साधनों को काम पर लगाए गये हैं उसे खतम करने के लिए ।