शुक्रवार, अगस्त 16, 2013

पहले ताजमहल फिर क़ुतुब मीनार और अब लाल किला

पहले ताजमहल फिर क़ुतुब मीनार और अब लाल किला|


जी हाँ जैसा की हम सब जानते हैं की ताजमहल का असली नाम तेजोमहालय है और क़ुतुब मीनार का असली नाम विष्णु स्तम्भ है|

लालकिला का का असली नाम लालकोट है|

अक्सर हमें यह पढाया जाता है कि दिल्ली का लालकिला शाहजहाँ ने बनवाया था| लेकिन यह एक सफ़ेद झूठ है और इतिहासकारों का कहना है की वास्तव में लालकिला पृथ्वीराज ने बारहवीं शताब्दी में पूरा बनवाया था जिसका नाम “लाल कोट “था जिसे तोमर वंश के शासक ‘अंनग पाल’ ने १०६० में बनवाना शुरू किया था |यह जानकर आप ख़ुशी से उछल ही पड़ेंगे कि महाराज अनंगपाल तोमर और कोई नहीं बल्कि महाभारत के अभिमन्यु के वंशज तथा महाराज पृथ्वीराज चौहान के नाना जी थे|

दरअसल शाहजहाँ नमक मुसलमान ने इसे बसाया नहीं बल्कि पूरी तरह से नष्ट करने की असफल कोशिश की थी ताकि, वो उसके द्वारा बनाया साबित हो सके लेकिन सच सामने आ ही जाता है|

इसका सबसे बड़ा प्रमाण तो यही है कि तारीखे फिरोजशाही के पृष्ट संख्या 160 (ग्रन्थ ३) में लेखक लिखता है कि सन 1296 के अंत में जब अलाउद्दीन खिलजी अपनी सेना लेकर दिल्ली आया तो वो कुश्क-ए-लाल ( लाल प्रासाद/ महल ) कि ओर बढ़ा और वहां उसने आराम किया| सिर्फ इतना ही नहीं अकबरनामा और अग्निपुराण दोनों ही जगह इस बात के वर्णन हैं कि महाराज अनंगपाल ने ही एक भव्य और आलिशान दिल्ली का निर्माण करवाया था| शाहजहाँ से 250 वर्ष पहले ही 1398 ईस्वी में एक अन्य लंगड़ा जेहादी तैमूरलंग ने भी पुरानी दिल्ली का उल्लेख किया हुआ है (जो कि शाहजहाँ द्वारा बसाई बताई जाती है)| यहाँ तक कि लाल किले के एक खास महल मे सुअर (वराह) के मुँह वाले चार नल अभी भी लगे हुए हैं क्या ये शाहजहाँ के इस्लाम का प्रतीक चिन्ह है या हिंदुत्व के प्रमाण?

साथ ही किले के एक द्वार पर बाहर हाथी की मूर्ति अंकित है क्योंकि राजपूत राजा गजो (हाथियों) के प्रति अपने प्रेम के लिए विख्यात थे जबकि इस्लाम जीवित प्राणी के मूर्ति का विरोध करता है|

साथ ही लालकिला के दीवाने खास मे केसर कुंड नाम से एक कुंड भी बना हुआ है जिसके फर्श पर हिंदुओं मे पूज्य कमल पुष्प अंकित है| साथ ही ध्यान देने योग्य बात यह है कि केसर कुंड एक हिंदू शब्दावली है जो कि हमारे राजाओ द्वारा केसर जल से भरे स्नान कुंड के लिए प्राचीन काल से ही प्रयुक्त होती रही है| मजेदार बात यह है कि मुस्लिमों के प्रिय गुंबद या मीनार का कोई अस्तित्व तक नही है लालकिला के दीवानेखास और दीवानेआम मे| इतना ही नहीं दीवानेखास के ही निकट राज की न्याय तुला अंकित है जो अपनी प्रजा मे से 99 % भाग (हिन्दुओं) को नीच समझने वाला मुगल कभी भी न्याय तुला की कल्पना भी नही कर सकता जबकि, ब्राह्मणों द्वारा उपदेशित राजपूत राजाओ की न्याय तुला चित्र से प्रेरणा लेकर न्याय करना हमारे इतिहास मे प्रसिद्द है| दीवाने ख़ास और दीवाने आम की मंडप शैली पूरी तरह से 984 ईस्वी के अंबर के भीतरी महल (आमेर/पुराना जयपुर) से मिलती है जो कि राजपूताना शैली मे बना हुई है| आज भी लाल किले से कुछ ही गज की दूरी पर बने हुए देवालय हैं जिनमे से एक लाल जैन मंदिर और दूसरा गौरीशंकार मंदिर है और, दोनो ही गैर मुस्लिम है जो कि शाहजहाँ से कई शताब्दी पहले राजपूत राजाओं के बनवाए हुए है| इन सब से भी सबसे बड़ा प्रमाण और सामान्य ज्ञान की बात यही है कि लाल किले का मुख्य बाजार चाँदनी चौक केवल हिंदुओं से घिरा हुआ है और, समस्त पुरानी दिल्ली मे अधिकतर आबादी हिंदुओं की ही है साथ ही सनलिष्ट और घुमावदार शैली के मकान भी हिंदू शैली के ही है सोचने वाली बात है कि क्या शाहजहाँ जैसा धर्मांध व्यक्ति अपने किले के आसपास अरबी, फ़ारसी, तुर्क, अफ़गानी के बजाए हम हिंदुओं के लिए हिन्दू शैली में मकान बनवा कर हमको अपने पास बसाता? और फिर शाहजहाँ या एक भी इस्लामी शिलालेख मे लाल किले का वर्णन तक नही है|

शंखनाद धर्म और राजनीति

गुरुवार, अगस्त 15, 2013

क्या आज हम वास्तविक रूप से स्वतंत्र हैं?

क्या आज हम वास्तविक रूप से स्वतंत्र हैं?
यदि किसी भी देश को पराधीन करना हो तो आने वाली पीढ़ी को उसके अतीत से अलग कर दो या उसके प्रति घृणा पैदा कर दो, जिससे आने वाली पीढ़ी स्वयं को अपने पूर्वजों की संतान नहीं अपितु नए शासक की संतान समझने लगेंगी और सर्वदा नए शासक के पराधीन रहेंगी और उसकी सेवा करती रहेंगी| कुछ ऐसा ही पूर्ण अलगाव होने वाला था ४ अक्टूबर १९९४ को हमारा हमारे अतीत से|

आज बहुतेरे ऐसे लोग होंगे जो संस्कृत को मृत भाषा समझते है, जोकि सत्य नहीं| परन्तु यह पूर्णतः सत्य होता यदि ४ अक्टूबर १९९४ को सर्वोच्च अदालत ने संस्कृत के पक्ष में यह निर्णय न लिया होता| धर्म निरपेक्षता के आधार पर संस्कृत पर अंकुश लगाने की बात की जाने लगी थी, देश को उसके गौरवशाली इतिहास से अलग किया जाने वाला था| आज यदि संस्कृत हमारे विद्यालयों में जीवित है तो इस निर्णय के कारण| हम अपने देश की संस्कृति को उसके अतीत से अलग करके नहीं देख सकते और कुछ सौ वर्षों के पूर्व तक हमारी संस्कृति पूर्वजों का ज्ञान संस्कृत भाषा में ही था|
अब यह आपका निर्णय है, या तो हम अपने गौरवशाली इतिहास और पूर्वजों के ज्ञान से अलग हो जाएँ या सत्य को समझें और अपनी जड़ों से जुडें और पूर्ण स्वराज प्राप्त करें|
http://www.indiankanoon.org/doc/1305668/ 

बुधवार, अगस्त 14, 2013

वो आधा अधूरा श्लोक हिन्दुस्तानियों को कायर बनाने पर तुला हुआ है

कथा सुनिए।।।

एक पहलवान ने एक आदमी थप्पड मार दिया, उसने गांधी के कथनानुसार दूसरा गाल आगे कर दिया पहलवान ने दूसरे गाल पर भी थप्पड मार दिया ! थप्पड खाने वाले ने कहा पहलवान जी गांधी के कथनानुसार मैने किया अब तो आप दो घंटे रुको मै आगे की जीवनी पढ के आता हूं ! वो गया और वापस आते ही उसने पहलवान के सीने पर बंदूक रख दी, पहलवान हैरान होकर बोला भाई तू तो गांधी वादी था फिर ये हिंसा क्यूं ? वो बोला भाई मैने गांधी के आदेशानुसार दोनो गालो पर थप्पड खा लिए हैं ।।।। और आगे कुछ कहा ही नहीं उसने यही कहता रहता है " अहिंसा परमोधर्मः"

इसलिए, अब मै सुभाष चन्द्र बौस की जीवनी पढ कर आया हूं !

और यही सत्य है दोस्तों,,,,,,, वो आधा अधूरा श्लोक हिन्दुस्तानियों को कायर बनाने पर तुला हुआ है। अहिंसा परमोधर्मः का अर्थ होता है की अहिन्सा ही परम धर्म है। लेकिन इस श्लोक के आगे का हिस्सा बताने को कोई तैयार नहीं है जिसमे लिखा है की धर्म हिंसा तथैव च।।। अर्थात अधर्म के विनाश हेतु हिंसा हो।
हमे उन महान बलिदानी चरित्रो को फिर जिंदा करना होगा ! वरना तो नापाक, पाकिस्तान, चीन, बंगलादेश सब हमे आंख दिखायेंगे ! PM अपने आप कुछ बोल नहीं सकता और जो भी बोले मैडम से पूछ के बोलेगा ! ऐसे में एक ही उपाय है तुम्हारे पांच सैनिक मारे तुम उनके पचास मारो। तुम्हारी सीमा में कोई दस किलोमीटर घुस आए तो तुम बदले में उनकी सीमा में सौ किलोमीटर अन्दर घुस जाओ। कोई भी अवैध रूप से सीमा पार करे तो देखते ही गोली मार दो। कोई हिन्दुस्तान में किसी दुसरे देश का झंडा लहराने की कोशिश करे तो सीधे यमलोक पहुंचा दो तभी सुधार होगा देश की बिगडती हुई व्यवस्था में।

- मंजू गुप्ता ( एक राष्ट्रभक्त )

एक विचित्र आजादी


एक विचित्र आजादी

* जहा जीत के सबसे बड़े ''योद्धा'' का गुमनाम बना दिया गया ,
* सम्पूर्ण स्वर्णिम इतिहास ''वामपंथियो'' की मदद से पलटा गया ,आर्थिक मदद अंग्रेजो के लूटे हुए धन से ली गयी ,
* जिन्ना को जबरदस्ती ''पाकिस्तान'' दिया गया , जबकि 5-6 % मुस्लिम समुदाय इस बटवारे के पक्षधर थे !
* उन अंग्रेजो की ''अंग्रेज़ी'' थाम ली जिसने हमको 200 साल लुटा , जिन अंग्रेजो ने नालन्दा जलाया , हमारे ज्ञान भंडार को अपने नाम से प्रकाशित किया ,
* अंग्रेजो की कूटनीति के तहत, मुस्लिम हिन्दू विरोधी दंगे मात्र सत्ता के लिये जबरदस्ती करवाये गये , आज जनता दुसमन अंग्रेज़ को नही पाकिस्तान को मानते है ,,

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अब इस गुलामी दिवस की पूर्व संध्या के रूप में मनाऊ ,या 35 लाख हिन्दू सिक्खों के बलिदान दिवस के रूप में मनाऊ ?

1947 में आजादी के नाम पर शुरु हुए दंगे आज तक जारी है , कभी असम कभी किस्तवाडा ,

न्याय , समाधन किसी को नही मिला , ना ही आगे भी दिख रहा है ,
डर है ,हिन्दू मुस्लिम के नाम पर मिली इस आजादी में, जल्दी ही कही कही पूरा देश ही ना जल जाये !

उधर ,व्यापारी चीन भी नये सौदे , संभावना की तलाश में सीमा पर खड़ा है ,
बस इन यहूदियो , अंग्रेजो और रोम के जाल (इल्लुमिनाती) पर जनता की नजर ही नही है ??

शुक्रवार, अगस्त 09, 2013

मितुल त्रिवेदी जी को हमारी और से बहोत बहोत बधाई

यह है श्री मितुल त्रिवेदी ...सूरत - दक्षिण गुजरात .. व्यवसाय - इक चार्टर्ड अकाउंटेंट ..
लोकल न्यूज़ चानेल पर इन की उप्लब्दी ओ को देखा ... सोचा शेयर करने लायक है ..

त्रिवेदी जी अमेरिकी संस्था नासा में ३ अलग अलग डिपार्टमेंट के मुखिया चुने गए है ..

मितुल जी ४० वर्ष के है .. CA की डिग्री के बाद नौकरी करते अचानक उन को वैदिक गणित में रूचि हो गयी .. इन्हों ने "वैदिक गणित" का प्रखर अभ्यास किया .. अलग अलग पौराणिक भारतीय भाषा ओ में वैदिक गणित का अभ्यास किया .. ३१ ऐसी लुप्त भाषा इ यह जानते है जो दुनिया में बहोत कम लोग जानते है ...

वैदिक गणित के अपने प्रखर अभ्यास का रिसर्च पेपर इन्हों ने भारतीय संस्था ISRO में दिया और वहां से इन का यह रिसर्च पेपर नासा में पंहुचा .. नासा को वैदिक गणित के अभ्यास में रूचि हुई और इन को आमंत्रित किया है ... नासा भारत के वेद , पूरण और उपनिषदों के साथ साथ अब वैदिक गणित पर भी अलग डिपार्टमेंट पर रिसर्च करेगा .. और ऐसी ३ शाखा ओ का कारभार त्रिवेदी जी को दिया है ...

मितुल जी नासा में सेवा देने से खुश तो है मगर वोह भारत में वैदिक गणित के प्रचार के लिए बहोत कार्य कर रहे है और आगे भी करना चाहते है ... वैदिक गणित पर इन की पुस्तके भी है ... कोई साइंस की डिग्री न होने के बाद भी नासा में सेवारत होने की इन की उपलब्धि अपने आप में मिसाल है ..

मितुल त्रिवेदी जी को हमारी और से बहोत बहोत बधाई .... और इक आशा की अपने वैदिक गणित का लोहा दुनिया मनवा कर आये ..

http://www.gujaratsamachar.com/index.php/articles/display_article/nasa-vedic-scripts-surat-gujarat

बुधवार, अगस्त 07, 2013

आशंका : अमेरिका अब जल्दी ही मुस्लिम देशों को तबाह करने जा रहा है..

मित्रों अब इस आशंका को भरपूर बल मिलता जा रहा है कि अमेरिका अब जल्दी ही मुस्लिम देशों समेत मक्का, मदीना पर कोई जबरदस्त हमला करके इनको तबाह करने जा रहा है..

क्योंकि जिस तरह से अमेरिका ने शनिवार और रविवार को अनेक मुस्लिम देशों में अपने दूतावास बंद किये, कनाडा ने रविवार को बांग्लादेश में अपना दूतावास बंद किया, और आज जर्मनी, इंग्लेंड, फ़्रांस आदि देशों ने भी अपने- अपने दूतावासों को बंद कर दिया, तथा उन दूतावास में काम करने वाले अपने पुरे स्टाफ को भी वापस अपने देशों में बुला लिया..

इस सबको देखकर मैं दावे से कह सकता हूँ कि अमेरिका सभी मुस्लिम देशों को खत्म करने की पूरी तैयारी कर चूका है..

और देखने में आ रहा है कि बांग्लादेश सहित सभी मुस्लिम देशों में अमेरिका के प्रति हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं, इससे तो साफ़ हो जाता है कि इन देशों वा इन देशों के लोगों को पता चल चूका है कि अब इनके ऊपर कोई बड़ा हमला होने वाला है.. जिसकी वजह से ये लोग बुरे तरीके से डरे हुए हैं..

ये लड़ाई अब मुसलमान देशों वा ईसाई देशों के बीच होने वाली है.. जिसमें या तो इसाई देश खत्म हो जाएंगे या सभी मुस्लिम देश, पर अभी मुस्लिम्स देशों की ये हालत नहीं है कि ये देश इसाई देशों से लड़ सकें,

क्योंकि इन सभी मुस्लिम देशों की नकेल तो केवल एक छोटे से यहूदीयों के देश इजरायल ने कसी हुई है, फिर ऐसे में यदि सभी इसाई देश मिल गए फिर सोचना आसान है कि मुस्लिम देशों का क्या हश्र होगा...

आप मित्रों का क्या ख्याल है कि मुस्लिम देशों में इतना जोर है कि वे इसाई देशों के आगे आधा दिन भी टिक पाएँ ??

http://www.hurriyetdailynews.com/us-eu-states-shut-down-embassies-on-terror-alert.aspx?pageID=238&nID=52004&NewsCatID=358

http://www.gmanetwork.com/news/story/320521/news/world/us-shuts-down-embassies-in-muslim-world-after-al-qaeda-jailbreaks
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सोमवार, अगस्त 05, 2013

मित्रों !!ईस पोस्ट को जरा गौर से पढे !!

मित्रों !!ईस पोस्ट को जरा गौर से पढे !!
अज्ञानी :- आप लोग बस इस डर को ही बेचते फिरते हैं की ऐसा हो जायेगा वैसा हो जायेगा जबकि आप भी जानते हैं की ऐसा कुछ इस युग में संभव नहीं है , हम एक स्वतंत्र गणतंत्र हैं और रहेंगें -----
कट्टर :- भाई साहब , लगता है आपको अंक गणित से समझाना पड़ेगा , देखिये :-
१९४७ में
हिन्दू जनसँख्या ३३ करोड़ (९० %) (सिक्ख , जैन , बोद्ध सब मिलाकर )
मुस्लिम जनसँख्या ३ करोड़ (८ %)
२००८ में
हिन्दू जनसँख्या ८२ करोड़ ( ७३ .९ %) दर - ४.०७ % प्रति वर्ष
मुस्लिम जनसँख्या २४ करोड़ ( २२.५ %) , दर - १३ .७ % प्रति वर्ष
(पांच करोड़ से ज्यादा बांग्लादेशियों को मिलाकर )
अगर हिन्दू और मुस्लिम अपने प्रति वर्ष की बढ़ने की दर समान बनाये रखें तो मात्र २०३५ तक मुस्लिम इस देश में बहुसंख्यक हो जायेंगें , ठीक ऐसे
हिन्दू जनसँख्या ९ ०.२ करोड़ (४ ६.९ %)
मुस्लिम जनसँख्या ९२.५ करोड़ ( ४८.२ %)
तब मेरे अज्ञानी मानवतावादी महाशय कल्पना कीजिये हालत वोट बेंक की राजनीती से कितने आगे जा चुकी होगी ? किस किस प्रकार की नाजायज़ मांगें पूरी हो चुकी होंगी ? सरकारों में किस किस स्तर तक पैठ हो चुकी होगी ? आतंकवाद किस हद तक बढ़ चुका होगा ? धार्मिक कट्टरता किस हद तक जा चुकी होगी ? इसके आगे की दास्ताँ तो मैं सुनाना भी नहीं चाहता वर्ना आप कहेंगे में बेवजह आपको डरा रहा हूँ
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अज्ञानी :- आप लोगों का धंधा डराने से ही तो चलता है
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अगर आपको इतना सब समझाने के बाद भी लगता है की मैं आपको डरा रहा हूँ तो थोडा विश्व मानचित्र उठाइए और देखिये मुस्लिम बहुल देशों का हाल, उदाहरण के लिए बोस्निया, लेबनान ,सीरिया ,गाजा ,पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और पढ़िए वहां रहते गैर मुस्लिमों पर होती यातनाएं ,आप कहें तो मैं उसमे भी आपकी मदद कर सकता हूँ !!
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अज्ञानी :- तो घूम फिर कर आप भी आ गए न अल्पसंख्यकों के खिलाफ , वही "प्रतिक्रियावादी हिंदुत्व" , इसीलिए तो हम नहीं पसंद करते आपको
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कट्टर :- पहली बात , २५ प्रतिशत आबादी किसी भी देश में अल्पसंख्यक नहीं होती ,
दूसरी बात , इस देश में कितने ही अल्पसंख्यक हजारों सालों से विदेशों से विस्थापित होकर शांति से रह रहे हैं और खुश हैं, समस्या सिर्फ एक ही वर्ग के साथ क्यों हैं ?
तीसरी बात , मैं मुस्लिमों के खिलाफ नही