रविवार, जून 09, 2013

अरब की प्राचीन समृद्ध वैदिक संस्कृति और भारत

अरब की प्राचीन समृद्ध वैदिक संस्कृति और भारत

अरब देश का भारत, भृगु के पुत्र शुक्राचार्य तथा उनके पोत्र और्व से ऐतिहासिक संबंध प्रमाणित है, यहाँ तक कि "हिस्ट्री ऑफ पर्शिया" के लेखक साइक्स का मत है कि अरब का नाम और्व के ही नाम पर पड़ा, जो विकृत होकर "अरब" हो गया। भारत के उत्तर-पश्चिम में इलावर्त था, जहाँ दैत्य और दानव बसते थे, इस इलावर्त में एशियाई रूस का दक्षिणी-पश्चिमी भाग, ईरान का पूर्वी भाग तथा गिलगित का निकटवर्ती क्षेत्र सम्मिलित था। आदित्यों का आवास स्थान-देवलोक भारत के उत्तर-पूर्व में स्थित हिमालयी क्षेत्रों में रहा था। बेबीलोन की प्राचीन गुफाओं में पुरातात्त्विक खोज में जो भित्ति चित्र मिले है, उनमें विष्णु को हिरण्यकशिपु के भाई हिरण्याक्ष से युद्ध करते हुए उत्कीर्ण किया गया है।
उस युग में अरब एक बड़ा व्यापारिक केन्द्र रहा था, इसी कारण देवों, दानवों और दैत्यों में इलावर्त के विभाजन को लेकर 12 बार युद्ध 'देवासुर संग्राम' हुए। देवताओं के राजा इन्द्र ने अपनी पुत्री ज्यन्ती का विवाह शुक्र के साथ इसी विचार से किया था कि शुक्र उनके (देवों के) पक्षधर बन जायें, किन्तु शुक्र दैत्यों के ही गुरू बने रहे।

यहाँ तक कि जब दैत्यराज बलि ने शुक्राचार्य का कहना न माना, तो वे उसे त्याग कर अपने पौत्र और्व के पास अरब में आ गये और वहाँ 10 वर्ष रहे। साइक्स ने अपने इतिहास ग्रन्थ "हिस्ट्री ऑफ पर्शिया" में लिखा है कि 'शुक्राचार्य लिव्ड टेन इयर्स इन अरब'। अरब में शुक्राचार्य का इतना मान-सम्मान हुआ कि आज जिसे 'काबा' कहते है, वह वस्तुतः 'काव्य शुक्र' (शुक्राचार्य) के सम्मान में निर्मित उनके आराध्य भगवान शिव का ही मन्दिर है। कालांतर में 'काव्य' नाम विकृत होकर 'काबा' प्रचलित हुआ। अरबी भाषा में 'शुक्र' का अर्थ 'बड़ा' अर्थात 'जुम्मा' इसी कारण किया गया और इसी से 'जुम्मा' (शुक्रवार) को मुसलमान पवित्र दिन मानते है।

"बृहस्पति देवानां पुरोहित आसीत्,
उशना काव्योऽसुराणाम्"-जैमिनिय ब्रा.(01-125)

अर्थात बृहस्पति देवों के पुरोहित थे और उशना काव्य (शुक्राचार्य) असुरों के।
प्राचीन अरबी काव्य संग्रह गंथ 'सेअरूल-ओकुल' के 257वें पृष्ठ पर हजरत मोहम्मद से 2300 वर्ष पूर्व एवं ईसा मसीह से 1800 वर्ष पूर्व पैदा हुए लबी-बिन-ए-अरव्तब-बिन-ए-तुरफा ने अपनी सुप्रसिद्ध कविता में भारत भूमि एवं वेदों को जो सम्मान दिया है, वह इस प्रकार है-

"अया मुबारेकल अरज मुशैये नोंहा मिनार हिंदे।
व अरादकल्लाह मज्जोनज्जे जिकरतुन।1।

वह लवज्जलीयतुन ऐनाने सहबी अरवे अतुन जिकरा।
वहाजेही योनज्जेलुर्ररसूल मिनल हिंदतुन।2।

यकूलूनल्लाहः या अहलल अरज आलमीन फुल्लहुम।
फत्तेबेऊ जिकरतुल वेद हुक्कुन मालन योनज्वेलतुन।3।

वहोबा आलमुस्साम वल यजुरमिनल्लाहे तनजीलन।
फऐ नोमा या अरवीयो मुत्तवअन योवसीरीयोनजातुन।4।

जइसनैन हुमारिक अतर नासेहीन का-अ-खुबातुन।
व असनात अलाऊढ़न व होवा मश-ए-रतुन।5।"

अर्थात-
(1) हे भारत की पुण्यभूमि (मिनार हिंदे) तू धन्य है, क्योंकि ईश्वर ने अपने ज्ञान के लिए तुझको चुना।

(2) वह ईश्वर का ज्ञान प्रकाश, जो चार प्रकाश स्तम्भों के सदृश्य सम्पूर्ण जगत् को प्रकाशित करता है, यह भारतवर्ष (हिंद तुन) में ऋषियों द्वारा चार रूप में प्रकट हुआ।

(3) और परमात्मा समस्त संसार के मनुष्यों को आज्ञा देता है कि वेद, जो मेरे ज्ञान है, इनके अनुसार आचरण करो।

(4) वह ज्ञान के भण्डार साम और यजुर है, जो ईश्वर ने प्रदान किये। इसलिए, हे मेरे भाइयों! इनको मानो, क्योंकि ये हमें मोक्ष का मार्ग बताते है।

(5) और दो उनमें से रिक्, अतर (ऋग्वेद, अथर्ववेद) जो हमें भ्रातृत्व की शिक्षा देते है, और जो इनकी शरण में आ गया, वह कभी अन्धकार को प्राप्त नहीं होता।

इस्लाम मजहब के प्रवर्तक मोहम्मद स्वयं भी वैदिक परिवार में हिन्दू के रूप में जन्में थे, और जब उन्होंने अपने हिन्दू परिवार की परम्परा और वंश से संबंध तोड़ने और स्वयं को पैगम्बर घोषित करना निश्चित किया, तब संयुक्त हिन्दू परिवार छिन्न-भिन्न हो गया और काबा में स्थित महाकाय शिवलिंग (संगे अस्वद) के रक्षार्थ हुए युद्ध में पैगम्बर मोहम्मद के चाचा उमर-बिन-ए-हश्शाम को भी अपने प्राण गंवाने पड़े। उमर-बिन-ए-हश्शाम का अरब में एवं केन्द्र काबा (मक्का) में इतना अधिक सम्मान होता था कि सम्पूर्ण अरबी समाज, जो कि भगवान शिव के भक्त थे एवं वेदों के उत्सुक गायक तथा हिन्दू देवी-देवताओं के अनन्य उपासक थे, उन्हें अबुल हाकम अर्थात 'ज्ञान का पिता' कहते थे। बाद में मोहम्मद के नये सम्प्रदाय ने उन्हें ईष्यावश अबुल जिहाल 'अज्ञान का पिता' कहकर उनकी निन्दा की।

जब मोहम्मद ने मक्का पर आक्रमण किया, उस समय वहाँ बृहस्पति, मंगल, अश्विनी कुमार, गरूड़, नृसिंह की मूर्तियाँ प्रतिष्ठित थी। साथ ही एक मूर्ति वहाँ विश्वविजेता महाराजा बलि की भी थी, और दानी होने की प्रसिद्धि से उसका एक हाथ सोने का बना था। 'Holul' के नाम से अभिहित यह मूर्ति वहाँ इब्राहम और इस्माइल की मूर्त्तियो के बराबर रखी थी। मोहम्मद ने उन सब मूर्त्तियों को तोड़कर वहाँ बने कुएँ में फेंक दिया, किन्तु तोड़े गये शिवलिंग का एक टुकडा आज भी काबा में सम्मानपूर्वक न केवल प्रतिष्ठित है, वरन् हज करने जाने वाले मुसलमान उस काले (अश्वेत) प्रस्तर खण्ड अर्थात 'संगे अस्वद' को आदर मान देते हुए चूमते है।

प्राचीन अरबों ने सिन्ध को सिन्ध ही कहा तथा भारतवर्ष के अन्य प्रदेशों को हिन्द निश्चित किया। सिन्ध से हिन्द होने की बात बहुत ही अवैज्ञानिक है। इस्लाम मत के प्रवर्तक मोहम्मद के पैदा होने से 2300 वर्ष पूर्व यानि लगभग 1800 ईश्वी पूर्व भी अरब में हिंद एवं हिंदू शब्द का व्यवहार ज्यों का त्यों आज ही के अर्थ में प्रयुक्त होता था।

अरब की प्राचीन समृद्ध संस्कृति वैदिक थी तथा उस समय ज्ञान-विज्ञान, कला-कौशल, धर्म-संस्कृति आदि में भारत (हिंद) के साथ उसके प्रगाढ़ संबंध थे। हिंद नाम अरबों को इतना प्यारा लगा कि उन्होंने उस देश के नाम पर अपनी स्त्रियों एवं बच्चों के नाम भी हिंद पर रखे।

अरबी काव्य संग्रह ग्रंथ ' सेअरूल-ओकुल' के 253वें पृष्ठ पर हजरत मोहम्मद के चाचा उमर-बिन-ए-हश्शाम की कविता है जिसमें उन्होंने हिन्दे यौमन एवं गबुल हिन्दू का प्रयोग बड़े आदर से किया है । 'उमर-बिन-ए-हश्शाम' की कविता नयी दिल्ली स्थित मन्दिर मार्ग पर श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर (बिड़ला मन्दिर) की वाटिका में यज्ञशाला के लाल पत्थर के स्तम्भ (खम्बे) पर काली स्याही से लिखी हुई है, जो इस प्रकार है -

" कफविनक जिकरा मिन उलुमिन तब असेक ।
कलुवन अमातातुल हवा व तजक्करू ।1।

न तज खेरोहा उड़न एललवदए लिलवरा ।
वलुकएने जातल्लाहे औम असेरू ।2।

व अहालोलहा अजहू अरानीमन महादेव ओ ।
मनोजेल इलमुद्दीन मीनहुम व सयत्तरू ।3।

व सहबी वे याम फीम कामिल हिन्दे यौमन ।
व यकुलून न लातहजन फइन्नक तवज्जरू ।4।

मअस्सयरे अरव्लाकन हसनन कुल्लहूम ।
नजुमुन अजा अत सुम्मा गबुल हिन्दू ।5।

अर्थात् -
(1) वह मनुष्य, जिसने सारा जीवन पाप व अधर्म में बिताया हो, काम, क्रोध में अपने यौवन को नष्ट किया हो।

(2) अदि अन्त में उसको पश्चाताप हो और भलाई की ओर लौटना चाहे, तो क्या उसका कल्याण हो सकता है ?

(3) एक बार भी सच्चे हृदय से वह महादेव जी की पूजा करे, तो धर्म-मार्ग में उच्च से उच्च पद को पा सकता है।

(4) हे प्रभु ! मेरा समस्त जीवन लेकर केवल एक दिन भारत (हिंद) के निवास का दे दो, क्योंकि वहाँ पहुँचकर मनुष्य जीवन-मुक्त हो जाता है।

(5) वहाँ की यात्रा से सारे शुभ कर्मो की प्राप्ति होती है, और आदर्श गुरूजनों (गबुल हिन्दू) का सत्संग मिलता है ।


- विश्वजीत सिंह ' अनंत '

प्रस्तुतकर्ता Vishwajeet Singh Anant

मूल लेखन ....प्रिय अनुज "विश्वजीत सिंह"-- "अनंत "

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रविवार, जून 02, 2013

कथीत पीर ने किया 200 का बलात्कार

कथीत पीर ने किया बलात्कार ( वीडियो )

 खुद को पीर बतानेवाले ने किया बलात्कार
               " मैं नूर हूं और तुम आग हो.. नूर आग से मिलेगा तो पूरा नूर बन जाएगा .... 'मैं तुम्हें जहां-जहां हाथ लगाऊंगा तुम्हारे शरीर का वह अंग दोजख में भी नहीं जलेगा " ये शब्द थे धार्मिक संस्थान चलनेवाले ओर खुद को सूफ़ी समजनेवाले " गुलजार अहमद बट " के जिसने कई लड़कियो पर किया है धार्मिक केन्द्रो मे बलात्कार ,गुलजार अहेमद बट ने टीवी एवं अखबारो से अपना गोरखधंधा चलाया था मगर जब इम्तियाज अहमद सोफी ने गुलजार अहेमद को एक लड़की के साथ आपत्तीजनक परिस्थियों मे देखा तो खुला एक भयानक रहस्य | "
कथित पीर गुलजार अहेमद बट
 ....................... देह शुद्धिकरण के नाम पर बलात्कार......

* मुफ़लिसी से छुटकारा पाने के लिए
             " कश्मीर स्थीत बड़गाम लोकल कोर्ट में पीड़ित लड़कियों ने उसकी करतूत की पूरी कहानी जब सुनाई जिसमे दर्द उभर रहा था क्यू की जिस धार्मिक सेंटर मे ये लड़कियो पर पीर के नाम पर बलात्कार हो रहे थे उस केंद्र मे करीबन 500 बच्चे है पीड़ित लड़कीयोने बताया की इस धार्मिक केंद्र मे जो भी नई लड़की दाखिल होती थी उसे महिला कर्मचारी शकीला बानो की देखरेख मे रखा जाता था ओर बाद मे शकीला कथित पीर के कमरे मे उस लड़की को ले जाती ओर कहेती की 'अगर मुफलिसी से छुटकारा पाना चाहती हो तो पीर साहब की दिल से सेवा करो
* नूर से नूर मिलेगा तो पूरा नूर बन जाएगा
 
                         “ लड़कियो को शुद्ध करने के नाम पर बलात्कार कर रहा था ये कथित पीर ओर इस काम मे सहयोग दे रही थी केंद्र की महिला परिचारिका शकीला ओर नूर मोहम्मद क्यू की दूसरी पीड़ित लड़की ने बताया की उसे नूर मुहम्मद बहेला फूसलाकर सेंटर मे लाया था ओर एक दिन उसने मुझे गुलजार (कथित पीर) के प्राइवेट कमरे मे जाने को कहा जिसे हुजरा ए पाक कहा जाता है मगर जैसे ही मई कमरे के अंदर दाखिल हुई मौलवी गुलजार ने अंदर से कमरा बंद करने को कहा उसके बाद उसने मेरी आंखों में देखा और कहने लगा, 'मैं तुम्हें जहां-जहां हाथ लगाऊंगा तुम्हारे शरीर का वह अंग दोजख में भी नहीं जलेगा। मैं नूर हूं और तुम आग हो.. नूर आग से मिलेगा तो पूरा नूर बन जाएगा।' फिर वह डरावनी आंखों से मुझे घूरने लगा और मैं बेहोश होने लगी। वह मुझे बिस्तर पर ले गया। मेरी आंखें सबकुछ देख रही थीं, लेकिन मेरा शरीर असहाय हो गया था।'

* इस कार्य मे सहयोगी थे
 
               " बलात्कारी कथित पीर के दो करीबी सहयोगियों अब्दुल गनी और बशीर अहमद मीर की तलाश बडगाम की पुलिस कर रही है , डीएसपी बशीर अहमद ने बताया कि लोकल कोर्ट ने गुलजार अहमद को 15 दिनों के लिए पुलिस रिमांड पर दे दिया है। पुलिस के मुताबिक गुलजार के खिलाफ लड़कियों के यौन शोषण के पक्के सबूत हैं। लड़कियों के मेडिकल टेस्ट से इसकी पुष्टि हो चुकी है। वह इसमें पूरी तरह शामिल था और इसमें कोई शक-सुबहा नहीं है।'
                " कथित बलात्कारी पीर 27 मई तक रिमांड पर है मगर सवाल ये उठता है की जब पुलिस के पास पुख्ता सबूत है तो फिर ऐसे लोग जो धर्म को बदनाम करते हो ओर धर्म के नाम तले लड़कियो का शोषण करते हो उसे जीवित ही क्यू रखा जाए ?आप ही कहो की ऐसे लोगो पर मुकदमा चलाने से क्या होगा ? जो धर्म के नाम पर खुद को " पीर " समजकर ऐसा घीनोना काम करते हो ? क्यू पीर को बदनाम करते हो ?
 विडियो :
http://www.youtube.com/watch?v=iz43348nBlM&feature=player_embedded
http://eksacchai.blogspot.com/2013/05/blog-post_24.html



: शुक्रिया " टाइम्स नाऊ "

अल्लाह की कौनसी बात मानें ?

अल्लाह की कौनसी बात मानें ?
http://bhaandafodu.blogspot.in/2013/05/blog-post.html

अपने द्वारा  कही गयी  बात  से मुकर जाना , किसी विषय पर एक जगह एक बात कहना  और दूसरी जगह उसी विषय  पर दूसरी या पहली बात के विपरीत  बात कहना एक प्रकार का दुर्गुण  माना जाता  है .और ऐसी  बातें कहने  वालों  को लोग दोगला  कहते  हैं , और ऐसे व्यक्तियों  की किसी भी बात पर न  तो  विश्वास  करते है ,और न उसकी बात को मानते  है .मुसलमानों  का दावा  है कि   कुरान  अल्लाह   की वाणी है , और उसमे दिए गए आदेश और निर्देश  अल्लाह  के द्वारा ही  कहे  गए हैं और उनमे किसी प्रकार  का विरोधाभास   नहीं  है लेकिन वास्तविकता  यह  है कि  कुरान  में अल्लाह  ने अनेकों  बार  परस्पर विरोधी बयान  दिए  हैं फिर भी अल्लाह ने .दावा   किया है , कि  उसकी  बातों में किसी प्रकार  का अंतरविरोध  नहीं है ,इस लेख  को पढ़ने वाले प्रबुद्ध  पाठक  निष्पक्ष  हो कर  खुद निर्णय  करें  कि  अल्लाह के दावों  में  कितनी सच्चाई  है ,और ऐसे अल्लाह  की बातों पर विश्वास  करने वालों  का अंजाम  होगा ?    

1-अल्लाह   का कानून   अटल  है 
"यही रीति  है  हमारे रसूलों की ,जिन्हें हमने तुम से पहले भेजा  था .और तुम हमारी रीति और नियमों  में कोई परिवर्तन नहीं पाओगे "
सूरा -बनी इस्रायेल17:77
2-अल्लाह  का  कानून बदल नहीं सकता 
"और अल्लाह की बातों  को  कोई  बदलने  वाला नहीं  है  "सूरा -अल अनआम 6:34

"तुम अपने  रब  की किताब ( कुरान )जो तुम्हें वही  की गयी है ,सबको सुना दो और कह दो  कोई उसकी बातों  को बदलने  वाला   नहीं   है "सूरा -अल कहफ़ 18:27
" यह सांसारिक  जीवन और आखिरत  के लिए भी   सूचना  है कि अल्लाह की बातें बदल नहीं सकती "
सूरा -युनुस 10:64

3-अल्लाह  का  कानून स्पष्ट  है 
"और अल्लाह  ने यह ऐसी  किताब उतार दी है ,जिसमे सारी  बातें खोल खोल कर समाझा  दी गयी हैं "सूरा -अल अनआम 6:115
4-अल्लाह  ने सब  कुछ  बता दिया  है
"हमने किताब में कोई चीज नहीं छोड़ी है " सूरा -अल अनआम 6:38
"कोई  भी गीली और सूखी चीज ऐसी नहीं  है ,जिसके बारे में   स्पष्ट रूप में किताब में नहीं लिखा गया  हो "सूरा -अल अनआम 6:59
"कण भर  भी कोई चीज या उस से छोटी या उस से भी छोटी   या बड़ी ,या धरती आकाशों में कोई चीज नहीं  है ,जो तेरे रब से छुपी     हुई हो , सब  के बारे में साफ साफ इस किताब  में   मौजूद  है "सूरा -यूनुस 10:61

अभी  तक   आपने  अल्लाह के द्वारा कुरान  में किये गए दावे    देखे , और अब इन आयातों  में कुछ  विषयों  पर अल्लाह के परस्पर  विरोधी  बयान दखिये ,
1-गुमराह कौन करता है ?
"शैतान  ने कहा ,मैं लोगों  को बहकाऊंगा  ,और उनको कामनाओंके  मायाजाल में फंसाऊँगा "सूरा -अन निसा 4:119
"शैतान  लोगों  से  जो वादे   करता है ,वह धोखे  के सिवा  कुछ  नहीं  है "सूरा -अन निसा 4:120
इस आयत  में अल्लाह  लोगों को गुमराह करने  का अपराध  शैतान  पर लगा रहा  है , फिर दूसरी जगह यह कहता  है ,

"अल्लाह  जिसको चाहे गुमराही  में  डाल  देता  है , और जिसे चाहता है  सीधा  मार्ग  दिखा  देता  है "सूरा -अन नह्ल16:93
" कह  दो  सब  कुछ  अल्लाह  की ओर   से  होता  है ,तो इन लोगों  को क्या  हो गया कि इस समझबूझ  के निकट भी   नहीं होते "
सूरा -अन निसा 4:78.

2-माता पिता  की बात मानें ?
"यदि  वह तुझ  पर दवाब  डालें   कि  तू किसी ऐसी चीज को  मेरा  (अल्लाह )   सहभागी  बना  ,जिसका तुझे ज्ञान  नहीं हो तो , तू  उनका   कहना  नहीं  मानना  "सूरा -लुकमान 31:15
इस बात  के बारे  में भी अल्लाह उलटी बात कहता  है ,
"हे ईमान वालो तुम अपने  बापों और भाइयों  को अपना मित्र नहीं बनाओ ,यदि वह  इस्लाम  की जगह कुफ्र  को पसंद   करें  .और जो कोई इन से मित्रता  का नाता  जोड़ेगा  तो ऐसे ही लोग जालिम  होंगे "
सूरा -अत तौबा 9:23
3-क्या  शिर्क  माफ़  होगा ?
" निस्संदेह  अल्लाह इस बात को क्षमा  नहीं करेगा कि उसका सहभागी  ठहराया   जाये .और इसके आलावा अल्लाह  जिसके चाहे  क्षमा   कर देगा "सूरा -अन निसा 4:48
लेकिन कुरान  के अनुसार अल्लाह  ने लोगों  का शिर्क माफ़ कर दिया था . यानि अपना   कानून  बदल  दिया था  देखिये ,
"और फिर उन्होंने एक बछड़े  को अपना  देवता बना  लिया , जबकि उनके पास खुली  निशानियाँ  भी  आ चुकी थीं . फिर भी हमने उनके इस  अपराध  को माफ़  कर दिया "सूरा -4:153
4--ईसाई स्त्री   से शादी  करें  या नहीं  ?
"तुम  मुशरिक  स्त्रिओं से तब तक विवाह  नहीं करो  जब तक वह ईमान  नहीं  लातीं , मुशरिक औरत से ईमान  वाली  लौंडी  अच्छी  होती  है "सूरा -बकरा 2:221
फिर  भी अल्लाह  मुशरिक  स्त्रियों  से शादी  को  वैध   ठहराता   है .
"तुम्हारे  लिए ईमान  वाली  स्त्रियां और वह स्त्रियां  भी वैध  हैं ,जिन्हें तुम  से पहले  किताब  दी  गयी थी "सूरा -अल माइदा 5:5
5-ईसाई  स्वर्ग  में जायेंगे या नर्क  में ?
निस्संदेह  जो ईमान  लाये ,और यहूदी हुए ,और नसारा  ,और साबई  हों ,जो भी अल्लाह पर ईमान  लाये और उसके मुताबिक  काम  किये ,तो ऐसे लोगों  के लिए अल्लाह के पास अच्छा  प्रतिदान  है .और उनके लिए कोई भय  नहीं होगा  ,और वह कभी दुखी नहीं  होंगे "सूरा -अल बकरा2:62
और यही बात कुरान  की सूरा  माइदा  5:69 में भी कही गयी है
अल्लाह  की दोगली बातों  का एक और नमूना  देखिये ,
"निश्चय  ही उन लोगों ने कुफ्र किया ,जिन्होंने कहा कि मरियम पुत्र  ईसा ही  अल्लाह  है ,और जो कोई अल्लाह  के साथ किसी को शरीक करेगा  तो उस पर अल्लाह जन्नत हराम  कर देगा .और उसका ठिकाना  आग  ( जहन्नम  ) है "सूरा -अल माइदा 5:72
"और जो कोई इस्लाम  के सिवा  कोई दूसरा  धर्म   पसंद  करेगा तो ,वह  आखिरत के दिन घाटा  होने वालों  में से होगा " सूरा -आले इमरान
6-इस्लाम  कैसे फैलाएं ?
"तुम  किताब  वालों  और उम्मियों ( जिनके पास किताब  नहीं है )   के पास जाओ और  उन से कहो कि क्या तुम भी इस्लाम स्वीकार  करने को राजी हो , और यदि वह ख़ुशी से इस्लाम स्वीकार कर लें तो  उन्होंने सही मार्ग  पा  लिया . और यदि वह इस से मुंह मोड़ें  तो ,तुम पर सिर्फ यह सन्देश  देने की जिम्मेदारी है "सूरा -आले  इमरान 3:20
"धर्म  के  बारे में कोई जबरदस्ती  नहीं  है " सूरा -बकरा 2:256
 बताइये  इन दौनों  बातों  में  कौन सी बात सही है ?

"यदि  वह इस्लाम  स्वीकार नहीं करें  तो उन से इतना लड़ो  कि सिर्फ पूरे  का पूरा   अल्लाह  का धर्म   इस्लाम  ही  बाकी  रह  जाये "
सूरा -अल अनफाल 8:39
7-अल्लाह  की धमकी 
"ईमान लाने वालो अल्लाह का आदेश मानो ,और साथ में रसूल का  आदेश  भी मानो "सूरा -अन निसा 4:59
"ईमान लाने वालो अल्लाह का आदेश मानो ,और साथ में रसूल का  आदेश  भी मानो ,और उनके कोप से बचते  रहो " सूरा -अल माइदा 9:92
"जो लोग उसके अनुसार फैसला  नहीं करें ,जो अल्लाह की किताब में   है ,तो वही  काफ़िर हैं " सूरा -अल माइदा 5:44
कुरान  से लिए गये  इन कुछ प्रमाणों  से हमें स्वीकार  करना पड़ेगा कि  जब खुद अल्लाह  ही  इतनी दोगली बातें  कहता  है , तो  उसके ऊपर  ईमान  रखने वाले मुसलमान कितने  झूठे होंगे , और अपनी  कही बातों   पर कायम  कैसे रह सकते हैं , यही बात इतिहास   से भी सिद्ध  हो चूका  है , कि  जिसने भी मुसलमानों पर विश्वास किया है उसे सदा  पछताना    पड़ा  है .


http://www.answering-islam.org/Quran/Contra/ashraf.html

देश की वानस्पतिक विविधता को नष्ट करते कुछ पोधे...


देश की वानस्पतिक विविधता को नष्ट करते कुछ
पोधे.....

१ .कांग्रेस घास ....
यह दुनिया की सबसे अधिक विनाशकारी और
अवांछित खर-पतवार है, जो 1950 के आसपास
अमेरिका से मँगाये गये पीएल-480 गेंहूँ के साथ भारत में आयी थी। इसका वैज्ञानिक नाम पार्थेनियम
हिस्टीरोफोरस है। इसे कांग्रेस घास कई कारणों से
कहा जाता है-
1. इसका ‘आयात’ कांग्रेस की केन्द्र सरकार के समय
किया गया था।
2. यह ठीक उसी प्रकार तेजी से फैलती है, जिस प्रकार
कांग्रेस के शासन में भ्रष्टाचार फैलता है।
3. यह समूह में फैलती है और एक पौधे से लगभग 25-30
हजार नये पौधे उत्पन्न हो जाते हैं। समूह को अंग्रेजी में
कांग्रेस कहा जाता है।
वैसे इसे ‘गाजर घास’ भी कहा जाता है,
क्योंकि इसका पौधा देखने में गाजर के पौधे जैसा लगता है,
परन्तु इसका ‘कांग्रेस घास’ नाम अधिक लोकप्रिय है। इस पौधे के फूलों से ऐसे कण वातावरण में फैल जाते हैं,
जो मनुष्य और पशुओं के सम्पर्क में आकर उनमें चर्म और
श्वाँस सम्बंधी तमाम गम्भीर बीमारियाँ पैदा करते हैं, जैसे-
एलर्जी, खाज, एक्जीमा, साइनस, ब्रोंकाइटिस,
अस्थमा (दमा) आदि। पर्यावरण में वायु को प्रदूषित
करने में इसका सबसे अधिक हाथ होता है, जिसके कारण हम चैन की साँस भी नहीं ले सकते। इसको नष्ट करने के
तमाम प्रयास अब तक असफल रहे हैं। यह मानसून के
दिनों में सबसे अधिक फैलती है। इसके द्वारा उत्पन्न
होने वाली बीमारियों के इलाज पर अब तक लाखों करोड़
रुपयों की राशि व्यय की जा चुकी है, परन्तु इससे छुटकारे
के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। कांग्रेस घास से शारीरिक ही नहीं तमाम मानसिक और
सामाजिक बीमारियाँ भी फैलती हैं। इसमें चर्म और
श्वाँस रोगों के साथ ही साम्प्रदायिकता, देशद्रोहिता,
चापलूसी, भ्रष्टाचार और आतंकवाद के कीटाणु भी पलते
और फैलते हैं। कई बार यह देखा जा चुका है कि जब भी यह
सर्वनाशी कांग्रेस (घास) प्रबल होती है, तभी ये समस्याएँ अपने प्रबलतम रूप में सामने आती हैं।
कांग्रेस घास के कारण देश को अरबो रुपये के अनाज
का नुक्सान हो चूका है |

२.यूकेलिप्टस (सफेदा )...आस्ट्रलिया से आयातित
यूकेलिप्टस भूमाफियो की पहली पसंद है...आसमान
को छूते ये वृक्ष भूजल का तेजी से दोहन करते है जिसके
कारण इनके आसपास के क्षेत्र में पेयजल
की कमी हो जाती है |अत्यधिक लम्बे होने के कारण ये
छाया भी नहीं देते....फिर भी कांग्रेस सरकार ने इनको राष्ट्रीय राजमार्गो के दोनों तरफ लगवा दिया है
जिसके कारण समीपस्थ गावो को पेयजल की किल्लत
से जूझना पड रहा है......

३.विलायती बबूल ...
हमारी खेती को तहस - नहस करने के लिए पूरे देश में
इंदिरा गाँधी की कांग्रेस सरकार द्वारा हवाई जहाज के
जरिये विलायती बबूल के बीजों को " बरसाया " गया , ये
ऐसे बीज थे जिनको थोड़ी सी पानी की फुहार ने
भी पनपा दिया . इन बीजों की ख़ास बात यह है कि इनकी जड़े धरती में एकदम नीचे तक उतर जाती है
और पूरा का पूरा जल - संचय पी जाती है . ख़ास बात तो यह
है कि इस बीज से पनपे पेड़ का कोई
भी हिस्सा किसी भी काम का नहीं है - न इसके
पत्तों को कोई जानवर खाता है न इसकी फलियाँ कोई
काम की है और न ही इसकी लकड़ी घरेलु इंधन के काम की है .और तो और पेड़ को अगर काट भी दें तो पुनः अपने
आप उग जाता है . नतीजन हमारी धरती माता निरंतर जल
विहीन होती जा रही है . पृथ्वी के जल स्तर को नीचे ले
जाने में इस दुष्ट पेड़ ने भी अपनी अहम् भूमिका निभाई है
- निभाते ही जा रहा है ....
ये पेड़ अपने आसपास की जमीन में एक विशेष प्रकार का जहर छोड़ते है जिससे अन्य पोधे नहीं पनप पाते और
भूमि बंजर हो जाती है |

मंगलवार, मई 14, 2013

5000 year old Viamana craft was found in Afghanistan :

Russian Foreign Intelligence Service (SVR) report

5000 year old Viamana craft was found in Afghanistan :

अफगानिस्तान में बड़ा क्षेत्र है जहाँ US Military का केम्प है। इस क्षेत्र में कभी कभी electromagnetic shockwave यानि खतरनाक किरणें उत्पन्न होती थी जिससे मिलिट्री के कई जवान मारे गए या गायब हो गए।

इसकी तह तक पहुँचने के लिए अमेरिका 8 सील कमांडो अफगानिस्तान के उसी स्थान पार एक गुफा में गये तथा वहां उन्हें एक फंसा हुआ विमान दिखा जब वो उसेको निकालने प्रयास कर रहे थे। तभी वो अचानक गायब हो गए।

इस बारे में Russian Foreign Intelligence Service (SVR) report द्वारा 21 December 2010 को एक रिपोर्ट पेश की गयी की जिसमे बताया ये विमान द्वारा उत्पन्न एक रहस्यमयी Time Well क्षेत्र है जिसकी खतरनाक electromagnetic shockwave से ये जवान मारे गये या गायब हो गये।
इसी की वजह से कोई गुफा में नहीं जा पा रहा।

US Military scientists ने इसकी ने बताया की ये विमान ५००० हज़ार पुराना है और जब कमांडो इसे निकालने का प्रयास कर रहे थे तो ये सक्रिय हो गया जिससे इसके चारों और Time Well क्षेत्र उत्पन्न हो गया यही क्षेत्र विमान को पकडे हुए थे। इसी क्षेत्र के सक्रिय होने के बाद 8 सील कमांडो गायब हो गए।

Time Well क्षेत्र विद्युत चुम्बकीये क्षेत्र होता है जो सर्पिलाकार होता है हमारी आकाशगंगा की तरह।

Russian Foreign Intelligence ने साफ़ साफ़ बताया की ये वही विमान है जो संस्कृत रचित महाभारत में वर्णित है। और जब इसका इंजन शुरू होता है तो बड़ी मात्र में प्रकाश का उत्सर्जन होता है।

SVR report का कहना है यह क्षेत्र 5 August को फिर सक्रिय हुआ था electromagnetic shockwave यानि खतरनाक किरणें उत्पन्न हुई ये इतनी खतरनाक थी की इससे 40 सिपाही तथा trained German Shepherd dogs इसकी चपेट में आ गए।

US Army CH-47F Chinook हेलीकाप्टर जो ओसामा बिन लादेन को मरने के बाद बापस लौट रहा था ये हेलीकाप्टर इसी विमान की shockwaves चपेट में आ गया था।

http://www.wired.com/dangerroom/2011/05/aviation-geeks-scramble-to-i-d-osama-raids-mystery-copter/
http://www.youtube.com/watch?v=TOWxoyfpg9c
http://www.whatdoesitmean.com/index1510.htm

http://www.youtube.com/watch?v=qBlwhVyZxmQ

http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache%3Ahttp%3A%2F%2Freinep.wordpress.com%2F2011%2F10%2F09%2F5000-year-old-viamana-craft-was-found-in-afghanistan%2F

गुरुवार, मई 09, 2013

कुरान और गैर मुस्लमान

कुरान और गैर मुस्लमान

इस लेख को लिखने से मेरा किसी भी धर्म का विरोध करने का कोई उद्देश्य नही है। अपितु यह लेख इस्लाम के प्रचार के लिए है । कुरान मुसलमानों का मजहबी ग्रन्थ है.मुसलमानों के आलावा इसका ज्ञान गैर मुस्लिमों को भी होना आवश्यक है। .............................................................
मानव एकता और भाईचारे के विपरीत कुरान का मूल तत्व और लक्ष्य इस्लामी एकता व इस्लामी भाईचारा है. गैर मुसलमानों के साथ मित्रता रखना कुरान में मना है. कुरान मुसलमानों को दूसरे धर्मो के विरूद्ध शत्रुता रखने का निर्देश देती है । कुरान के अनुसार जब कभी जिहाद हो ,तब गैर मुस्लिमों को देखते ही मार डालना चाहिए।
कुरान में मुसलमानों को केवल मुसलमानों से मित्रता करने का आदेश है। सुरा ३ की आयत ११८ में लिखा है कि, "अपने (मजहब) के लोगो के अतिरिक्त किन्ही भी लोगो से मित्रता मत करो। "
लगभग यही बात सुरा ३ कि आयत २७ में भी कही गई है, "इमां वाले मुसलमानों को छोड़कर किसी भी काफिर से मित्रता न करे। "
कुरान की लगभग १५० से भी अधिक आयतें मुसलमानों को गैर मुसलमानों के प्रति भड़काती है। सन १९८४ में हिंदू महासभा के दो कार्यकर्ताओं ने कुरान की २४ आयातों का एक पत्रक छपवाया । उस पत्रक को छपवाने पर उनको गिरफ्तार कर लिया गया। परन्तु तुंरत ही कोर्ट ने उनको रिहा कर दिया। कोर्ट ने फ़ैसला दिया,"कुरान मजीद का आदर करते हुए इन आयतों के सूक्ष्म अध्यन से पता चलता है की ये आयते मुसलमानों को गैर मुसलमानों के प्रति द्वेषभावना भड़काती है............."उन्ही आयतों में से कुछ आयतें निम्न है................
सुरा ९ आयत ५ में लिखा है,......."फ़िर जब पवित्र महीने बीत जायें तो मुशरिकों (मूर्ती पूजक) को जहाँ कहीं पाओ कत्ल करो और उन्हें pakdo व घेरो और हर घाट की जगह उनकी ताक में बैठो। यदि वे तोबा करले ,नमाज कायम करे,और जकात दे तो उनका रास्ता छोड़ दो। निसंदेह अल्लाह बड़ा छमाशील और दया करने वाला है। "
इस आयत से साफ पता चलता है की अल्लाह और इश्वर एक नही हो सकते । अल्लाह सिर्फ़ मुसलमानों का है ,गैर मुसलमानों का वह तभी हो सकता है जब की वे मुस्लमान बन जाए। अन्यथा वह सिर्फ़ मुसलमानों को गैर मुसलमानों को मार डालने का आदेश देता है।

सुरा ९ की आयत २३ में लिखा है कि, "हे इमां वालो अपने पिता व भाइयों को अपना मित्र न बनाओ ,यदि वे इमां कि अपेक्षा कुफ्र को पसंद करें ,और तुमसे जो मित्रता का नाता जोडेगा तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे। "
इस आयत में नव प्रवेशी मुसलमानों को साफ आदेश है कि,जब कोई व्यक्ति मुस्लमान बने तो वह अपने माता , पिता, भाई सभी से सम्बन्ध समाप्त कर ले। यही कारण है कि जो एक बार मुस्लमान बन जाता है, तब वह अपने परिवार के साथ साथ राष्ट्र से भी कट जाता है।

सुरा ४ की आयत ५६ तो मानवता की क्रूरतम मिशाल पेश करती है ..........."जिन लोगो ने हमारी आयतों से इंकार किया उन्हें हम अग्नि में झोंक देगे। जब उनकी खाले पक जाएँगी ,तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसा-स्वादन कर लें। निसंदेह अल्लाह ने प्रभुत्वशाली तत्व दर्शाया है।"

सुरा ३२ की आयत २२ में लिखा है "और उनसे बढकर जालिम कोन होगा जिसे उसके रब की आयतों के द्वारा चेताया जाए और फ़िर भी वह उनसे मुँह फेर ले।निश्चय ही ऐसे अप्राधिओं से हमे बदला लेना है। "

सुरा ९ ,आयत १२३ में लिखा है की," हे इमां वालों ,उन काफिरों से लड़ो जो तुम्हारे आस पास है,और चाहिए कि वो तुममे शक्ति पायें।"

सुरा २ कि आयत १९३ ............"उनके विरूद्ध जब तक लड़ते रहो, जब तक मूर्ती पूजा समाप्त न हो जाए और अल्लाह का मजहब(इस्लाम) सब पर हावी न हो जाए. "

सूरा २६ आयत ९४ ..................."तो वे गुमराह (बुत व बुतपरस्त) औन्धे मुँह दोजख (नरक) की आग में डाल दिए जायंगे."

सूरा ९ ,आयत २८ ......................."हे इमां वालों (मुसलमानों) मुशरिक (मूर्ती पूजक) नापाक है। "
गैर मुसलमानों को समाप्त करने के बाद उनकी संपत्ति ,उनकी औरतों ,उनके बच्चों का क्या किया जाए ? उसके बारे में कुरान ,मुसलमानों को उसे अल्लाह का उपहार समझ कर उसका भोग करना चाहिए।
सूरा ४८ ,आयत २० में कहा गया है ,....."यह लूट अल्लाह ने दी है। "
सूरा ८, आयत ६९..........."उन अच्छी चीजो का जिन्हें तुमने युद्ध करके प्राप्त किया है,पूरा भोग करो। "
सूरा १४ ,आयत १३ ............"हम मूर्ती पूजकों को नष्ट कर देंगे और तुम्हे उनके मकानों और जमीनों पर रहने देंगे।"
मुसलमानों के लिए गैर मुस्लिमो के मकान व संपत्ति ही हलाल नही है, अपितु उनकी स्त्रिओं का भोग करने की भी पूरी इजाजत दी गई है।
सूरा ४ ,आयत २४.............."विवाहित औरतों के साथ विवाह हराम है , परन्तु युद्ध में माले-गनीमत के रूप में प्राप्त की गई औरतें तो तुम्हारी गुलाम है ,उनके साथ विवाह करना जायज है। "

अल्बुखारी की हदीस जिल्द ४ सफा ८८ में मोहम्मद ने स्वं कहा है, "मेरा गुजर लूट पर होता है । "
अल्बुखारी की हदीस जिल्द १ सफा १९९ में मोहम्मद कहता है ,."लूट मेरे लिए हलाल कर दी गई है ,मुझसे पहले पेगम्बरों के लिए यह हलाल नही थी। "
इस्लाम का सबसे महत्वपूर्ण मिशन पूरे विश्व को दारुल इस्लाम बनाना है। कुरान, हदीस, हिदाया, सीरतुन्नबी इस्लाम के बुनयादी ग्रन्थ है.इन सभी ग्रंथों में मुसलमानों को दूसरे धर्म वालो के साथ क्रूरतम बर्ताव करके उनके सामने सिर्फ़ इस्लाम स्वीकार करना अथवा म्रत्यु दो ही विचार रखने होते है। इस्लाम में लूट प्रसाद के रूप में वितरण की जाती है..............

शनिवार, मई 04, 2013

दुनिया में इस्लाम में ही वेश्यावृति ना सिर्फ वैध है बल्कि इसे इस्लाम में धार्मिक कार्य माना जाता है....!

क्या आप जानते हैं कि........ दुनिया में इस्लाम ही एक मात्र ऐसा धर्म है .... जहाँ वेश्यावृति ना सिर्फ वैध है बल्कि इसे इस्लाम में प्रोत्साहित भी किया जाता है और एक धार्मिक कार्य माना जाता है....!
क्या आप जानते हैं कि........ दुनिया में इस्लाम ही एक मात्र ऐसा धर्म है .... जहाँ वेश्यावृति ना सिर्फ वैध है बल्कि इसे इस्लाम में प्रोत्साहित भी किया जाता है और एक धार्मिक कार्य माना जाता है....!

इसका कारण जानने से पहले हमें इस्लाम और उसके प्रतिपादक मुहम्मद के क्रिया कलापों और उसकी मानसिकता को समझना अतिआवश्यक है...!

और, सारी कहानी का सार ये है कि.... मुहम्मद साहब कोई साधू-महात्मा तो थे नहीं ..... वे तो एक अनपढ़, जाहिल और पेशे से दुर्दांत लुटेरे थे....!

तो.... अपनी लूट -मार और तथाकथित रूप से जेहाद फ़ैलाने के सिलसिले में उन्हें और उनके गिरोह को हफ़्तों-महीनों तक घर से बाहर रहना रहना पड़ता था ( शायद यही वजह थी कि.. मौका लगते ही उन्होंने अपनी सगी और मात्र 6 साल की मासूम बेटी तक को ............... ).

खैर.... तो , उसी लूट-मार के दौरान कहीं उनके साथी बिदक ना जाएँ और उनके लूट-पाट का फलता-फूलता धंधा चौपट ना हो जाए .. इसी डर से मुहम्मद साहब ने ना सिर्फ वेश्यावृति के धंधे को बढ़ावा दिया ..बल्कि उसे एक धार्मिक और कानूनी जामा पहनाते हुए उसे ना सिर्फ कुरान में भी उल्लेखित कर दिया बल्कि उसे पुण्य का काम भी घोषित कर दिया .

आपलोगों को लग रहा होगा कि ऐसा भला कैसे हो सकता है.... लेकिन आप ये बात जान लो कि.... जहाँ मुहम्मद साहब मौजूद हों वहां कुछ भी हो सकता है (सिर्फ उलुल -जुलूल और बुरी बातें )

लीजिए .... आप भी कुरान की उन हदीसों का अध्धयन करें और अपना सामान्य ज्ञान बढाएँ ...

इस्लाम में "मुथा" और "मिस्यर" शादी शब्द ला कर वेश्यावृति को कानूनी जामा पहनाया गया है.... जिसे यात्री विवाह भी कहा जाता है..!
ये एक प्रकार से अनुबंध आधार पर अल्पावधि शादियां हैं और कुछ घंटों के लिए भी हो सकती है...!

@ इब्न मसूद ने बताया, "हम रसूल के साथ लड़ रहे थे और अपनी पत्नियों हमारे साथ नहीं थीं, तब हमने रसूल से पूछा, 'क्या हम खुद को संतुष्ट करना चाहिए....? रसूल हमें उस से मना किया और फिर वह हमें (अस्थायी) Mutha शादी की अनुमति दी. तो, हम सभी कपड़े का एक टुकड़ा की दहेज के लिए एक निश्चित समय (आमतौर पर तीन दिन) के लिए शादी कर के पत्नी बना लिए...... Al Hadis, Vol. 2, page no. 686

@ सलामा बिन अल-अक्वा कहते हैं : अल्लाह से प्रेरित होकर मैं कहता हूँ .. अगर एक आदमी और एक औरत सहमत हैं ( अस्थायी रूप से शादी के लिए) तो उनकी शादी अधिकतम तीन रातों के लिए वैध होगी, और उसके बाद अगर वे इसे जारी रखना चाहते हैं तो रखें रख सकते हैं, अन्यथा अलग होना चाहते हैं तो वे ऐसा कर सकते हैं....Volumn 007, Book 062, Hadith Number 053.

### मुझे तो लगता है कि जहाँ हिन्दू धर्म में स्त्रियों को सम्मान की नजर से देखा जाता है और उन्हें देवी तक की संज्ञा दी गयी है वहीँ मुहम्मद साहब ने "इस्लाम में स्रियों को" भोग-विलास की "मात्र एक वस्तु" बना रखने में कोई कोर-कसर नहीं रख छोड़ी है.

नोट: इस्लाम को छोड़कर दुनिया के सभी धर्मों में चरित्रवान रहने पर जोर दिया गया है और वेश्यावृति को पाप मानते हुए उसे एक घिनौने अपराध की संज्ञा दी गई है...!
ये लेख लोगों के सामाजिक जागरूकता में वृद्धि करने के पवित्र उद्देश्य से गया है!
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जय हिन्दू राष्ट्र !!