शनिवार, दिसंबर 08, 2012

‎1984 दंगों को नरसंहार घोषित करने के प्रस्ताव को समर्थन

‎1984 दंगों को नरसंहार घोषित करने के प्रस्ताव को समर्थन
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वाशिंगटन। भारत में 1984 में हुए सिख विरोधी दंगे को नरसंहार घोषित करने के प्रस्ताव के समर्थन में अब तक करीब 25 हजार लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। न्यूयॉर्क के सिख फॉर जस्टिस [एसएफजे] संगठन द्वारा ओबामा प्रशासन की ओर से इस बारे में जवाब मिलने को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। अभियान गत 15 नवंबर को प्रारंभ किया गया था।

प्रस्ताव में ओबामा प्रशासन से मांग की गई है कि नरसंहार पर संयुक्त राष्ट्र समझौते के तहत नवंबर, 1984 में हुए सिख विरोधी दंगे को नरसंहार घोषित किया जाए। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि दंगे भड़काने में कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसमें कहा गया है कि इस दंगे को हमेशा से सिख विरोधी दंगा कहा जा रहा है। एसएफजे की ओर से कहा गया है कि इस प्रस्ताव को एक अन्य सिख संगठन वॉयस फॉर फ्रीडम का समर्थन मिला है। अमेरिका स्थित गुरुद्वारों ने भी इसका समर्थन किया है। एसएफजे दंगे में शामिल लोगों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मुकदमा चलाने की भी मांग कर रहा है। उसकी ओर से पहले ही कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की संसद में प्रस्ताव पेश कर 1984 के सिख विरोधी दंगे को नरसंहार घोषित करने की मांग की गई है। अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने नरसंहार पर संयुक्त राष्ट्र समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इन देशों में घरेलू कानून भी हैं जिनके मुताबिक किसी धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा को नरसंहार घोषित किया जा सकता है।

केजरीवाल के सत्ता मोह में बिखर गया हमारा आंदोलन : अन्ना

केजरीवाल के सत्ता मोह में बिखर गया हमारा आंदोलन : अन्ना

नई दिल्ली, प्रेट्र : समाजसेवी अन्ना हजारे ने अपने पुराने साथी अरविंद केजरीवाल को सत्ता लोभी करार देते हुए कहा है कि उनके इसी मोह के कारण भ्रष्टाचार विरोधी देशव्यापी आंदोलन बिखर गया। हजारे ने कहा है कि अरविंद की आम आदमी पार्टी (आप) भी अन्य दलों की तरह पैसे के बल पर सत्ता हासिल करने के रास्ते पर है। ऐसे में उसकी पार्टी को वोट नहीं दूंगा। 75 वर्षीय अन्ना हजारे ने गुरुवार को यहां एक टीवी चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सवाल जवाब के दौरान कहा, हां यह सही है कि अरविंद केजरीवाल सत्ता लोभी हो गए हैं। मेरा मानना था कि वह निस्वार्थ भाव से इस काम में लगा है, लेकिन समझ में नहीं आता कि उसके दिमाग में राजनीति में जाने की बात कहां से आ गई। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन इसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की भेंट चढ़ गया। एक सवाल के जवाब में कहा, स्वतंत्र भारत में पहली बार सिस्टम को बदलने के लिए आंदोलन खड़ा हुआ। लोग बाहर निकले, उन्हें उम्मीद थी इसका नतीजा निकलेगा। इसी दौरान पता नहीं उसके दिमाग में राजनीति में जाने की ब...
ात कहां से आ गई। तंत्र परिवर्तन व भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में अरविंद, स्वामी रामदेव और अन्य सभी लोगों के बीच एकता जरूरी थी पर ऐसा न होने से आंदोलन अंजाम तक नहीं पहुंच सका। हम सभी को संगठित रहने की जरूरत थी। अरविंद ने अलग रास्ता चुन लिया, रामदेव ने सांप्रदायिक शक्तियों से हाथ मिला लिया। एक सवाल के जवाब में अन्ना ने कहा, हालांकि मेरा इरादा अरविंद की पार्टी का समर्थन करने का था, लेकिन अब ऐसा करना मुश्किल है क्योंकि वह भी पैसे के बल पर सत्ता और सत्ता के बल पर पैसे के रास्ते पर है। अन्ना ने इससे पहले कहा था कि वह अरविंद की पार्टी का समर्थन करेंगे बशर्ते वह ईमानदार प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारें। यह भी कहा था कि अगर केजरीवाल दिल्ली की चांदनी चौक सीट से केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के खिलाफ खड़े होंगे तो वह उनके पक्ष में चुनाव प्रचार भी करेंगे। नरेंद्र मोदी के बारे में पूछे जाने पर गांधीवादी नेता ने कहा, गुजरात में भी तमाम भ्रष्टाचार है। बतौर मुख्यमंत्री मोदी राज्य में लोकायुक्त बिल क्यों नहीं ला रहे हैं। हर कोई सत्ता के बल पर पैसा बना रहा है।

http://in.jagran.yahoo.com/epaper/#id=111756605432472618_49_2012-12-07
केजरीवाल के सत्ता मोह में बिखर गया हमारा आंदोलन : अन्ना

नई दिल्ली, प्रेट्र : समाजसेवी अन्ना हजारे ने अपने पुराने साथी अरविंद केजरीवाल को सत्ता लोभी करार देते हुए कहा है कि उनके इसी मोह के कारण भ्रष्टाचार विरोधी देशव्यापी आंदोलन बिखर गया। हजारे ने कहा है कि अरविंद की आम आदमी पार्टी (आप) भी अन्य दलों की तरह पैसे के बल पर सत्ता हासिल करने के रास्ते पर है। ऐसे में उसकी पार्टी को वोट नहीं दूंगा। 75 वर्षीय अन्ना हजारे ने गुरुवार को यहां एक टीवी चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सवाल जवाब के दौरान कहा, हां यह सही है कि अरविंद केजरीवाल सत्ता लोभी हो गए हैं। मेरा मानना था कि वह निस्वार्थ भाव से इस काम में लगा है, लेकिन समझ में नहीं आता कि उसके दिमाग में राजनीति में जाने की बात कहां से आ गई। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन इसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की भेंट चढ़ गया। एक सवाल के जवाब में कहा, स्वतंत्र भारत में पहली बार सिस्टम को बदलने के लिए आंदोलन खड़ा हुआ। लोग बाहर निकले, उन्हें उम्मीद थी इसका नतीजा निकलेगा। इसी दौरान पता नहीं उसके दिमाग में राजनीति में जाने की बात कहां से आ गई। तंत्र परिवर्तन व भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में अरविंद, स्वामी रामदेव और अन्य सभी लोगों के बीच एकता जरूरी थी पर ऐसा न होने से आंदोलन अंजाम तक नहीं पहुंच सका। हम सभी को संगठित रहने की जरूरत थी। अरविंद ने अलग रास्ता चुन लिया, रामदेव ने सांप्रदायिक शक्तियों से हाथ मिला लिया। एक सवाल के जवाब में अन्ना ने कहा, हालांकि मेरा इरादा अरविंद की पार्टी का समर्थन करने का था, लेकिन अब ऐसा करना मुश्किल है क्योंकि वह भी पैसे के बल पर सत्ता और सत्ता के बल पर पैसे के रास्ते पर है। अन्ना ने इससे पहले कहा था कि वह अरविंद की पार्टी का समर्थन करेंगे बशर्ते वह ईमानदार प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारें। यह भी कहा था कि अगर केजरीवाल दिल्ली की चांदनी चौक सीट से केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के खिलाफ खड़े होंगे तो वह उनके पक्ष में चुनाव प्रचार भी करेंगे। नरेंद्र मोदी के बारे में पूछे जाने पर गांधीवादी नेता ने कहा, गुजरात में भी तमाम भ्रष्टाचार है। बतौर मुख्यमंत्री मोदी राज्य में लोकायुक्त बिल क्यों नहीं ला रहे हैं। हर कोई सत्ता के बल पर पैसा बना रहा है।

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ISI agent Shah Bukhari reaction when a reporter asked question on Shree ...




दस्ताने उर्दू समाचार पत्र के संपादक ने
जब बुखारी से सवाल किया की 1528 के
खसरे में राजा दसरथ का नाम आया है जब
राजा दशरथ का नाम आ
गया तो बेटा (राम जी ) हक़दार हुए उस
...
भूमि के तो फिर हम
मुसलमानों को सारी की सारी भूमि दे
देनी चाहिए हिन्दूओं को..............
इतना सुन बुखारी अपना आपा खो बैठा और उस उर्दू
समाचार के सम्पादक पर हाथ उठाया
सभी हिन्दू भाई इस वीडियो को जरुर देखे
और शेयर करे........
ये दिल्ली जामा मस्जिद के वही शाही इमाम बुखारी हैं जिनकी मस्जिद पर लाखो रूपए का बिजली का बिल बकाया है पर सरकार इन पर मेहरबान है, ये सीना ठोक कर कहते हैं कि मै पाकिस्तान ISI का एजेंट हूँ और हमारे इकलोते ईमानदार केजरीवाल इन्ही के भक्त है........
ये विडियो देखें-----
http://www.youtube.com/watch?v=soMTvof4lYI
दस्ताने उर्दू समाचार पत्र के संपादक ने
जब बुखारी से सवाल किया की 1528 के
खसरे में राजा दसरथ का नाम आया है जब
राजा दशरथ का नाम आ
गया तो बेटा (राम जी ) हक़दार हुए उस
...
भूमि के तो फिर हम
मुसलमानों को सारी की सारी भूमि दे
देनी चाहिए हिन्दूओं को..............
इतना सुन बुखारी अपना आपा खो बैठा और उस उर्दू
समाचार के सम्पादक पर हाथ उठाया
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ये दिल्ली जामा मस्जिद के वही शाही इमाम बुखारी हैं जिनकी मस्जिद पर लाखो रूपए का बिजली का बिल बकाया है पर सरकार इन पर मेहरबान है, ये सीना ठोक कर कहते हैं कि मै पाकिस्तान ISI का एजेंट हूँ और हमारे इकलोते ईमानदार केजरीवाल इन्ही के भक्त है........
ये विडियो देखें-----
http://www.youtube.com/watch?v=soMTvof4lYI

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देश बिक गया





ये जो लिखा जा रहा है --वो सब आपके लिए और आपके बच्चों के लिए है --आज इसको आपने नहीं समझा तो आने वाला समय आपको अच्छे से समझा देगा ---
"बिक्री दो तरीके से होती है एक "होलसेल में "और दूसरी 'रीटेल में" यानी कि फुटकर तरीके से ---ये अभी सरकार द्वारा अपने "चमचों "के सहारे पास कि है जिसका "बिजनेस ५१ फीसदी रखा गया है .
अब जो होलसेल वाली बिक्री है उसको सरकार पह्के ही पास कर चुकी --यानी कि होलसेल में ऍफ़.डी.आ...
ई पहले ही आ चुका है और उसमे कोई भी प्रतिबंद नहीं कि वो कौन से राज्य में खुले और न खुले ---होलसेल में वालमार्ट --भारतीये पार्टनर "भारती " के साथ देश में अपने स्टोर खोल चुकी है ---'बेस्ट प्राइस मार्डन होलसेल " के नाम से देश भर में स्टोर खुल चुके है ---हम आपको उत्तर प्रदेश के बारे में बताते है ---
उत्तर प्रदेश में आगरा ,मेरठ ,और लखनऊ में ये भारती-वालमार्ट के स्टोर होलसेल "थोक " का व्यापार कर रहें हैं ---और अब कानपुर ,बरेली ,गाज़ियाबाद ,आदि बड़े शहरों में तैयारी चल रही है ---अभी जो इन नगरों में पुराने जमाने से थोक का व्यापार हो रहा है विशेषता मसालों ,मोटे अनाजों में ,और अन्य खाध्य पदार्थों में उसकी बिक्री में कमी आई है --आगरा ,लखनऊ और मेरठ में --फुटकर व्यापारी ही इन होलसेल के स्टोरों से समान ले सकता है ----
मान लीजिए "अशोक मसाले " कंपनी से १०० रूपये किलो के हिसाब से निकल कर होलसेल में १२० रूपये किलो बिकतें है और आप को १३५ रूपये किलो फुटकर में मिलतें है ---अब यहाँ खेल होता है इस वालमार्ट द्वारा ये दो गुना माल अशोक मसाले कंपनी से खरीदेगी -८० रूपये किलो --और बेचेगी थोक में ७५ रूपये किलो अब जो ठीक का व्यापारी जिसको माल पहले १२० में मिल रहा था उसको वही माल ७५ रूपये में मिल रहा है उसका मुनाफा ज्यादा ---सब खुश उपभोक्ता ,थोक व्यापारी ,फुटकर व्यापारी और उत्पादनकर्ता--ये सब खुश तो सरकार भी खुश देश वासी भी खुश क्या ऍफ़.डी आई --आ गयी सब कुछ सस्ता हो गया ----लो जी खेल तो शुरू हुआ है ----दो तीन बार तो ये बिक्री बट्टा होता है अब उसके बाद जब थोक व्यापारी वालमार्ट के होलसेल से मसाले खरीदने जाता है तो उससे कहा जाता है कि अब "अशोक मसाले का दाम ७५ से १०० रूपये हो गया है लेकिन ये एक और मसाला है "चुग-फा " इसका दाम है मात्र ४५ रूपये प्रति किलो और इसमें स्कीम भी है साल में ५०० किलो खरीदने पर एक "फोर्ड"कार भी मीलेगी ---
खेल शुरू होगया आप फस जाते हो क्युकी पूरे मार्केट में अशोक मसाले जो आपकी दादी के जमाने से आपके घर में आ रहा था वो अब मिल ही नहीं रहा --अब तो हर जगह "चुग-फा " मसाले ही मिल रहें है -----अब खुश हो लो --
ये तो खेल कि शुरुआत है --केवल होलसेल का चमत्कार है --अभी तो रीटेल बाकी है ---हर शहर के बरसों पुराने थोक बाजार खत्म ---"मुन्ना लाल सुख्खी लाल",मनसुख भाई ,मुनीर & संस् ,बलबीर सिंह अर्जुन सिंह और भी न जाने कितनी पुरानी फर्म बंद --...मायावती ,मुलायम सिंह ,सोनिया आदि फर्में चालूं ---ये तो थोक का हाल होना है --अब आज से रीटेल में --भी यही होना है ,बहुत सीढ़ी सी बात है जब थोक बाजार कबजा लीया तो रीटेल बाजार तो उसका ही होना है जिसका थोक में कब्ज़ा -----देश बिक गया ---इस बेफकूफी से भरे "लोकतंत्र " के कारण ---सबसे बड़ी बात कि इस बात के गवाह हम है ----क्युकी हम जिन्दा कौम है ----और ये बात सरासर गलत है कि रीटेल के स्टोर हर राज्य में नहीं खुल सकते WTO के रुल १३३ और १४६ (ऐ ) के अनुसार कोई देश जो इस संधि से बंधा हुआ है वो किसी भी विदेशी कंपनी को इस बात से प्रतिबंधित नहीं कर सकता कि वो किसी राज्य में या फिर जनसँख्या के आधार पर व्यापार करने से नहीं रोक ले .
वक्ती तौर कि बात है बस वालमार्ट को केवल इतना ही करना होगा वो अंतर-राष्ट्रिय न्यालय में एक केस दर्ज करना होगा और WTO के रुल के कारण उत्तर प्रदेश या फिर कोई प्रदेश उसको रोक नहीं पायेगा ----
देशवासियों देश बिक चुका है ----सभी थोक व्यापारियों ,परचून (फुटकर )विक्रेता से अनुरोध है अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलाएं और सही गलत के बारे में बताएं -----
हाँ एक तरीका है ५१% भागीदारी तो तब होगी न जब ४९% का भारतीये पार्टनर मीलेगा --अब करना यही है जो ४९% का भारतीये पार्टनर हो उसके पहले से चल रहे सभी उत्पादों का बहिष्कार करें ----
जय जन जय भारत


शुक्रवार, दिसंबर 07, 2012

वेदकुरआन(vedquran) और विज्ञान(जाकिर नाइक के चेलों को समर्पित)

वेदकुरआन(vedquran) और विज्ञान(जाकिर नाइक के चेलों को समर्पित) 
आज-कल एक मुस्लिम ब्लोगर अनवर जमाल को विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथों वेदों की बुराई करने का या कह सकते है की अपने ही ढंग से उनके उलटे सीधे अर्थ निकालने का चस्का लगा हुआ है. निसंदेह वेद विश्व का सबसे महानतम ज्ञान है. परन्तु उस ब्लोगर को वेद मजाक की पुस्तके तथा विश्व का सम्पूर्ण ज्ञान कुरान में दिखता है.
मे यहाँ पर आज इस लेख में खगोल विज्ञान के कुछ तथ्यों पर द्रष्टि डालूँगा.
हिन्दू धर्म के अनुसार प्रथ्वी गोल है और सूर्य के चारो और अपनी धुरी पर घूमती है.(ऋग्वेद -१ /११ /५ )
कितना महान ज्ञान था खगोल का हजारों हजारों वर्ष पहले.

इसाई पंथ में जब वेदों से ज्ञान प्राप्त करके गैलिलियो ने १६२६ के आस पास यही बात बताई तो तो उस समय पोप ने उसे १० वर्ष का कारावास दिया . क्यों कि इसाई पंथ के अनुसार सूर्य प्रथ्वी के चारो और घूमता है.

इस्लाम मजहब में कुरआन जिसकी व्याख्या इब्नेक्सीर ने की , पारा १३,पेज २७ पर ओर पारा २७,व पेज ४८ पर की है ,दोनों ही स्थान पर प्रथ्वी को चपटा कहा गया है. १९६९ में जब आदमी चाँद पर पहुंचा और जब उसने कहा की मुझे प्रथ्वी चाँद से गोल नजर आती है , तो अरब के सुलतान फैसल ने कहा की यह बिलकुल झूठ है क्यों की कुरआन के अनुसार तो प्रथ्वी चपटी है.

कुरआन के अनुसार जिसे मकतब अलाह्सनात रामपुर ने प्रकाशित किया है ,में पारा १४,सूरा १६,आयत १५ में अल्लाह की वाणी है "और उस खुदा ने धरती में अटल पहाड़ ड़ाल दिए ताकि वह तुम्हे लेकर लुडक न जाय."
कुरआन शरीफ शेरवानी लखनऊ के संस्करण में उपरोक्त आयत का अर्थ दिया है "और पहाड़ जमीन पर गाड़े गए ताकि जमीन तुम्हे एक तरफ लेकर लुढ़क न जाय."
कितनी हास्यप्रद बात है कि कुरआन का अल्लाह ये भी नहीं जानता कि प्रथ्वी गोल है चपटी नहीं. और अल्लाह ने धरती पर पहाड़ क्यों बनाए इसका कुरआन में क्या उत्तर है ,सुनकर ही मजा आता है।
कुरआन में ही सूरा १८ की ८६ वि आयत के अनुसार सूर्य अस्त होने के लिए कृष्णा सागर में जाता है।
अरे फिर तो रोज ही सूरज को गर्म करने के लिए करोडो टन लकड़ी रोज लगती होगी।क्यों कि कृष्ण सागर में तो डूबकर सूर्य ठंडा हो जाता होगा। 
वारि जाऊं मै अल्लाह के ऐसे ज्ञान पर और खुदाई पुस्तक कुरआन पर.

वहीँ यजुर्वेद  कहता है कि"यह भूगोल प्रथ्वी जल और अग्नि के निम्मित
अर्थात उत्पन्न हुई अपनी कक्षा में सबकी रक्षा करने वाले सूर्य के चारों तरफ छन-छन घूमती है.,इसी से दिन-रात्री,ऋतु और अयन आदि काल विभाग से संभव होते हैं। " (यजुर्वेद -३/६)
"ये होता है ज्ञान."
सच आपके सामने है ,आप स्वं सोचें की क्या कुरआन के अल्लाह को इतना भी ज्ञान नहीं की प्रथ्वी गोल है.कितकी हास्यप्रद बात है की प्रथ्वी पर पहाड़ इसलिए डाले गए कि कहीं वह मोहम्मद(परमात्मा उन्हें शान्ति दे) के शिष्यों को लेकर लुडक न जाए.
मित्रों देखो कही जाकिर अरे नहीं नहीं Joker कही लुड़का तो नहीं पड़ा. किसी को मिल जाए तो मुझे जरूर बताना। .......... Naveen Tyagi
वेदकुरआन(vedquran) और विज्ञान(जाकिर नाइक के चेलों को समर्पित)
आज-कल एक मुस्लिम ब्लोगर अनवर जमाल को विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथों वेदों की बुराई करने का या कह स...
कते है की अपने ही ढंग से उनके उलटे सीधे अर्थ निकालने का चस्का लगा हुआ है. निसंदेह वेद विश्व का सबसे महानतम ज्ञान है. परन्तु उस ब्लोगर को वेद मजाक की पुस्तके तथा विश्व का सम्पूर्ण ज्ञान कुरान में दिखता है.
मे यहाँ पर आज इस लेख में खगोल विज्ञान के कुछ तथ्यों पर द्रष्टि डालूँगा.
हिन्दू धर्म के अनुसार प्रथ्वी गोल है और सूर्य के चारो और अपनी धुरी पर घूमती है.(ऋग्वेद -१ /११ /५ )
कितना महान ज्ञान था खगोल का हजारों हजारों वर्ष पहले.

इसाई पंथ में जब वेदों से ज्ञान प्राप्त करके गैलिलियो ने १६२६ के आस पास यही बात बताई तो तो उस समय पोप ने उसे १० वर्ष का कारावास दिया . क्यों कि इसाई पंथ के अनुसार सूर्य प्रथ्वी के चारो और घूमता है.

इस्लाम मजहब में कुरआन जिसकी व्याख्या इब्नेक्सीर ने की , पारा १३,पेज २७ पर ओर पारा २७,व पेज ४८ पर की है ,दोनों ही स्थान पर प्रथ्वी को चपटा कहा गया है. १९६९ में जब आदमी चाँद पर पहुंचा और जब उसने कहा की मुझे प्रथ्वी चाँद से गोल नजर आती है , तो अरब के सुलतान फैसल ने कहा की यह बिलकुल झूठ है क्यों की कुरआन के अनुसार तो प्रथ्वी चपटी है.

कुरआन के अनुसार जिसे मकतब अलाह्सनात रामपुर ने प्रकाशित किया है ,में पारा १४,सूरा १६,आयत १५ में अल्लाह की वाणी है "और उस खुदा ने धरती में अटल पहाड़ ड़ाल दिए ताकि वह तुम्हे लेकर लुडक न जाय."
कुरआन शरीफ शेरवानी लखनऊ के संस्करण में उपरोक्त आयत का अर्थ दिया है "और पहाड़ जमीन पर गाड़े गए ताकि जमीन तुम्हे एक तरफ लेकर लुढ़क न जाय."
कितनी हास्यप्रद बात है कि कुरआन का अल्लाह ये भी नहीं जानता कि प्रथ्वी गोल है चपटी नहीं. और अल्लाह ने धरती पर पहाड़ क्यों बनाए इसका कुरआन में क्या उत्तर है ,सुनकर ही मजा आता है।
कुरआन में ही सूरा १८ की ८६ वि आयत के अनुसार सूर्य अस्त होने के लिए कृष्णा सागर में जाता है।
अरे फिर तो रोज ही सूरज को गर्म करने के लिए करोडो टन लकड़ी रोज लगती होगी।क्यों कि कृष्ण सागर में तो डूबकर सूर्य ठंडा हो जाता होगा।
वारि जाऊं मै अल्लाह के ऐसे ज्ञान पर और खुदाई पुस्तक कुरआन पर.

वहीँ यजुर्वेद कहता है कि"यह भूगोल प्रथ्वी जल और अग्नि के निम्मित
अर्थात उत्पन्न हुई अपनी कक्षा में सबकी रक्षा करने वाले सूर्य के चारों तरफ छन-छन घूमती है.,इसी से दिन-रात्री,ऋतु और अयन आदि काल विभाग से संभव होते हैं। " (यजुर्वेद -३/६)
"ये होता है ज्ञान."
सच आपके सामने है ,आप स्वं सोचें की क्या कुरआन के अल्लाह को इतना भी ज्ञान नहीं की प्रथ्वी गोल है.कितकी हास्यप्रद बात है की प्रथ्वी पर पहाड़ इसलिए डाले गए कि कहीं वह मोहम्मद(परमात्मा उन्हें शान्ति दे) के शिष्यों को लेकर लुडक न जाए.
मित्रों देखो कही जाकिर अरे नहीं नहीं Joker कही लुड़का तो नहीं पड़ा. किसी को मिल जाए तो मुझे जरूर बताना। .......... Naveen Tyagi

सोमवार, सितंबर 03, 2012

तो कांग्रेस ने सोचा क्यों ना सेतु समुद्रम परियोजना के नाम पर.. और थोरियम को कचरा बताकर अमेरिका से दलाली ली जाय..


आखिर क्यों अब तक थोरियम को उपयोग में नहीं लाया गया????
और कचरा के नाम पर देश को धोखा.. और उस कचरे का भी निस्तारण अमेरिका में... क्या करेगा अमेरिका उस कचरे का????

भविष्य में ऊर्जा संकट की आशंका से पूरी दुनिया जूझ रही है, और डर के इस माहौल में एक बार फिर से थोरियम पॉवर की चर्चा फ़ैशन में आ गई है. यह भविष्यका परमाणु ईधन है. थोरियम के बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि यूरेनियम की तुलना में यह कहीं ज़्यादा स्वच्छ, सुरक्षित और 'ग्रीन' है. और, इन सब आशावादी बयानों में भारत का भविष्य सबसे बेहतर दिखता है क्योंकि दुनिया के ज्ञात थोरियम भंडार का एक चौथाई भारत में है.

अहम सवाल ये है कि अब तक थोरियम के रिएक्टरों का उपयोग क्यों नहीं शुरू हो पाया है, जबकि इस तत्व की खोज हुए पौने दो सौ साल से ऊपर बीत चुके हैं? इसका सर्वमान्य जवाब ये है- थोरियम रिएक्टर के तेज़ विकास के लिए विकसित देशों की सरकारों और वैज्ञानिक संस्थाओं का सहयोग चाहिए, और इसके लिए वे ज़्यादा इच्छुक नहीं हैं. सबको पता है कि यूरेनियम और प्लूटोनियम की 'सप्लाई लाईन' पर कुछेक देशों का ही नियंत्रण है, जिसके बल पर वो भारत जैसे बड़े देश पर भी मनमाना शर्तें थोपने में सफल हो जाते हैं. इन देशों को लगता है कि थोरियम आधारित आणविक ऊर्जा हक़ीक़त बनी,क तो उनके धंधे में मंदी आ जाएगी, उनकी दादागिरी पर रोक लग सकती है...और भारत जैसा देश परमाणु-वर्ण-व्यवस्था के सवर्णों की पाँत में शामिल हो सकता है... और वैसे भी यहां उसके दलाल पहले से ही मौजूद हैं...

थोरियम आधारित परमाणु रिएक्टर के विकास में खुल कर अनिच्छा दिखाने वालों में यूरोपीय संघ सबसे आगे है. शायद ऐसा इसलिए कि ज्ञात थोरियम भंडार में नार्वे के अलावा यूरोप के किसी अन्य देश का उल्लेखनीय हिस्सा नहीं है. (वैसे तो, रूस में भी थोरियम का बड़ा भंडार नहीं है, लेकिन वहाँ भविष्य के इस ऊर्जा स्रोत पर रिसर्च जारी है. शायद, थोरियम रिएक्टरों के भावी बाज़ार पर रूस की नज़र है!)

यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन(CERN) ने थोरियम ऊर्जा संयंत्र के लिए ज़रूरी एडीएस रिएक्टर(accelerator driven system reactor) के विकास की परियोजना शुरू ज़रूर की थी. लेकिन जब 1999 में एडीएस रिएक्टर का प्रोटोटाइप संभव दिखने लगा तो यूरोपीय संघ ने अचानक इस परियोजना की फ़ंडिंग से हाथ खींच लिया.

यूनीवर्सिटी ऑफ़ बैरगेन के इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़िजिक्स एंड टेक्नोलॉजी के प्रोफ़ेसर एगिल लिलेस्टॉल यूरोप और दुनिया को समझाने की अथक कोशिश करते रहे हैं कि थोरियम भविष्य का ऊर्जा स्रोत है. उनका कहना है कि वायुमंडल में कार्बन के उत्सर्जन को कम करने के लिए ऊर्जा खपत घटाना और सौर एवं पवन ऊर्जा का ज़्यादा-से-ज़्यादा दोहन करना ज़रूरी है, लेकिन ये समस्या का आंशिक समाधान ही है. प्रोफ़ेसर लिलेस्टॉल के अनुसार भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा सिर्फ़ परमाणु ऊर्जा ही दे सकती है, और बिना ख़तरे या डर के परमाणु ऊर्जा हासिल करने के लिए थोरियम पर भरोसा करना ही होगा.

उनका कहना है कि थोरियम का भंडार यूरेनियम के मुक़ाबले तीन गुना ज़्यादा है. प्रति इकाई उसमें यूरेनियम से 250 गुना ज़्यादा ऊर्जा है. थोरियम रिएक्टर से प्लूटोनियम नहीं निकलता, इसलिए परमाणु बमों के ग़लत हाथों में पड़ने का भी डर नहीं. इसके अलावा थोरियम रिएक्टर से निकलने वाला कचरा बाक़ी प्रकार के रिएक्टरों के परमाणु कचरे के मुक़ाबले कहीं कम रेडियोधर्मी होता है.

प्रोफ़ेसर एगिल लिलेस्टॉल के बारे में सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन की थोरियम रिएक्टर परियोजना में वो उपप्रमुख की हैसियत से शामिल थे. उनका कहना है कि मात्र 55 करोड़ यूरो की लागत पर एक दशक के भीतर थोरियम रिएक्टर का प्रोटोटाइप तैयार किया जा सकता है. लेकिन डर थोरियम युग में भारत जैसे देशों के परमाणु ईंधन सप्लायर बन जाने को लेकर है, सो यूरोपीय संघ के देश थोरियम रिएक्टर के विकास में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे.

तो कांग्रेस ने सोचा क्यों ना सेतु समुद्रम परियोजना के नाम पर.. और थोरियम को कचरा बताकर अमेरिका से दलाली ली जाय..